चीनी के न्यूनतम दाम तय करने को लेकर उच्चतम न्यायालय ने सुनाया अहम् निर्णय

चीनी के न्यूनतम दाम तय करने को लेकर उच्चतम न्यायालय ने सुनाया अहम् निर्णय

यूपी में चीनी के न्यूनतम दाम तय करने को लेकर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अहम निर्णय सुनाया। न्यायालय ने बोला कि प्रदेश सरकार को भी न्यूनतम दाम तय करने का पूरा अधिकार है।

हालांकि न्यायालय ने इसके साथ ही ये भी बोला कि प्रदेश को केन्द्र सरकार की ओर से तय की गई मूल्य से ज्यादा दाम तय करने होंगे। न्यायालय ने बोला कि केन्द्र सरकार की ओर से तय किया हुआ दाम ही मान्य होगा।

राज्य ज्यादा मूल्य तय कर सकता है
केन्द्र व प्रदेश में से किसकी तय मूल्य को माना जाए, इस बात पर उच्चतम न्यायालय ने बोला कि दाम तो केन्द्र का ही मान्य होगा लेकिन यदि प्रदेश सरकार केन्द्र से ज्यादा मूल्य देने की सलाह देती है तो वो बात अलग होगी। प्रदेश सरकार चाहे तो केन्द्र के तय न्यूनतम दामों से ज्‍यादा मूल्य पर अपना न्यूनतम दाम जरूर तय कर सकती है।

इससे पहले सरकार ने दी थी राहत

इससे पहले चीनी मिलों को सरकार ने राहत देते हुए एमएसपी (न्यूनतम बिकवाली मूल्य) में 2 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा किया था। सरकार के निर्णय के बाद चीनी का एमएसपी 31 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई थी। न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) वह दर है जिसके नीचे, चीनी मिलें खुले मार्केट में चीनी की बिक्री नहीं सकती है। इस मसले पर कैबिनेट सचिवों के समूह की मीटिंग हुई थी व इसमें चीनी बेचने की न्यूनतम मूल्य 29 रुपए से बढ़कर 31 रुपए प्रति किलोग्राम कर दी गई थी। हालांकि इस प्रस्ताव पर पीएमओ पहले ही चर्चा कर चुका है। सरकार के इस निर्णय से मार्केट में चीनी की कीमतों में इजाफा होने कि सम्भावना है।

सरकार ने यह निर्णय आर्थिक संकट से जूझ रहीं चीनी मिलों को राहत देने के लिए लिया गया था। पिछले वर्ष केन्द्र सरकार ने खुदरा चीनी की कीमतों में आई गिरावट के दौरान चीनी मिलों व चीनी निर्यात में मदद करने के लिए पूर्व-कारखाना चीनी बिक्री मूल्य 29 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।

चीनी मिलों का तर्क था कि 29 रुपये पर चीनी की बिक्री करने पर चीनी मिलों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीनी मिल संगठन बहुत ज्यादा समय से एमएसपी को 35 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे थे। जानकार बताते हैं कि सरकार ने एमएसपी में इजाफे की मांग पर यह शर्त रखी थी कि एमएसपी बढ़ोतरी के बाद शुगर मिल केन्द्र सरकार से सब्सिडी की मांग नहीं करेंगी।