केजीएमयू में इमरजेंसी सेवाओं के सही न होने के कारण गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों की लगानी पड़ रही दौड़

केजीएमयू में इमरजेंसी सेवाओं के सही न होने के कारण गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों की लगानी पड़ रही दौड़

केजीएमयू में इमरजेंसी सेवाओं का हाल बेहाल है. कोरोना की रिपोर्ट में घंटों मरीज तड़पते रहते हैं. वार्डों में शिफ्टिंग न होने से होल्डिंग एरिया फुल रहता है. लिहाजा, गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है.

सीतापुर के मदनापुर निवासी 52 वर्षीय अयोध्या को पैर में मल्टीपल फ्रैक्चर है. हड्डी अलग होकर लटक रही है. शुक्रवार रात नौ बजे अयोध्या को ट्रॉमा सेंटर लाया गया. परिवारजन अंकुर के मुताबिक, मरीज को स्कैनिंग एरिया में भेज दिया गया. इस दौरान कोरोना जाँच के लिए स्वैब कलेक्शन किया गया, मगर शाम पांच बजे तक रिपोर्ट नहीं आई. ऐसे में मरीज होल्डिंग एरिया में तड़पता रहा. रिपोर्ट आने के बाद वार्ड में शिफ्ट करने को कहा. ऐसे में मरीज का ऑपरेशन फंसा हुआ है.

पिता घायल, 19 घंटे से रिपोर्ट नहीं

रायबरेली निवासी सुमित के मुताबिक, 19 घंटे से पिता होल्डिंग एरिया में भर्ती हैं. उनके सिर, हाथ-पैर में चोटें हैं, मगर संबंधित विभाग में रिपोर्ट आने के बाद ही शिफ्ट करने को बोला गया.

सौ बेड फुल, लौटाए गए मरीज

ट्रॉमा के स्कैनिंग एरिया में हर रोज 300 के करीब मरीज आ रहे हैं. इनके लिए होल्डिंए एरिया में सौ बेड हैं. वहीं, जाँच में 18 से 19 घंटे में रिपोर्ट आने से नए मरीजों की भर्ती में परेशानी आ रही है. शनिवार दोपहर 12 बजे से ही न्यूरोलॉजी इमरजेंसी, पीडियाट्रिक होल्डिंग एरिया, ट्रॉमा होल्डिंग एरिया के बेड फुल बताकर मरीज लौट दिए गए. इस दौरान 150 के करीब मरीज विभिन्न अस्पतालों में भटकने को विवश हुए हैं.

किट अप्रूव होने पर होगी पीपीपी मॉडल जांच

ट्रॉमा में गंभीर मरीजों की समय पर जाँच के लिए पीपीपी मॉडल पर प्रयोगशाला बनाई गई. यहां रियल टाइम पीसीआर और ट्रूनेट मशीन से टेस्ट करने का दावा किया गया. वहीं, पीसीआर मशीन से जाँच के लिए किट वैलीडेशन आइसीएमआर से कराया जाना है. किट वैलीडेशन होने पर ही व्यक्तिगत कंपनी पीसीआर टेस्ट कर सकेगी.

क्या कहते हैंकेजीएमयू प्रवक्ता?

केजीएमयू प्रवक्ता डाक्टर संदीप तिवारी के मुताबिक, मेन प्रयोगशाला में लोड ज्यादा है. वहीं पीपीपी मॉडल पर बनी प्रयोगशाला में किट का आइसीएमआर से अप्रूव होना बाकी है. ऐसे में जितनी भी जल्दी संभव है मरीज की रिपोर्ट दी जा रही है. इसके अतिरिक्त अस्पतालों से मरीजों को रेफर करने में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. इसलिए होल्डिंए एरिया फुल हो रहा है.