डीएलएड से अभ्यर्थियों का मोहभंग, 2 लाख 40 हजार सीटें भरना होगा मुश्किल

डीएलएड से अभ्यर्थियों का मोहभंग, 2 लाख 40 हजार सीटें भरना होगा मुश्किल

दो वर्षीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण 2021 में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों के आवेदन करने की रफ्तार बेहद धीमी है। 20 जुलाई से आवेदन लिए जा रहे हैं और अब तक मुश्किल से 50 हजार का आकड़ा पार हो सका है। उत्तर प्रदेश में करीब 2,40,200 सीटों के लिए 10 अगस्त तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इस तरह शेष बचे करीब एक सप्ताह में सीटों के मुताबिक आवेदन आना मुश्किल है। पिछले साल कोरोना महामारी के चलते प्रवेश नहीं हुआ था। उसके पहले के दो वर्षों की भी स्थिति चिंताजनक ही रही है।

डीएलएड-2021 में प्रवेश के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने विज्ञापन जारी कर अभ्यर्थियों से आनलाइन आवेदन मांगे हैं। जिन संस्थाओं में प्रवेश दिया जाएगा, उनमें जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, सीटीई वाराणसी तथा एनसीटीई से मान्यता के बाद संबद्ध निजी डीएलएड प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाना है। प्रवेश के लिए आवेदन की स्थिति यह है कि अगर सभी आवेदकों को दाखिला दे दिया जाए, तब भी सीटें भरना मुश्किल हैं। यह स्थिति इसी साल नहीं है। 2020 के सत्र में कोरोना के चलते आवेदन नहीं लिए गए।


इससे पहले 2019 के सत्र में 69,515 और 2018 में भी 76,929 सीटें रिक्त रह गई थीं। अब देखना है कि अंतिम तिथि में शेष बचे एक सप्ताह में कितने आवेदन और होते हैं। इस साल के लिए अब तक कम आवेदन को लेकर परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय उपाध्याय का मानना है कि इसका प्रमुख कारण कोरोना महामारी के चलते विश्वविद्यालयों का रिजल्ट प्रभावित होना है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों का झुकाव बीएड की ओर होना भी एक कारण है।

यूपी डीएलएड शैक्षणिक सत्र 2021-22 में दाखिले के लिए प्रवेश की प्रक्रिया 20 जुलाई 2021 से शुरू हो गई है। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट updeled.gov.in के जरिए 10 अगस्त 2021 तक आवेदन कर सकते हैं। निर्धारित अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।


गोरखपुर में बोले CM योगी, कोरोना काल में दुनिया ने देखा सरकार का मानवीय चेहरा

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 1 950 के दशक में समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास का जो सपना देखा था, सात दशक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसे पूरा कर रहे हैं। बीते सात वर्ष से उन्होंने गरीबों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किया है जबकि पिछली सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। मुख्यमंत्री शनिवार को पं. दीनदयाल की जयंती पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन परिसर में पं. दीनदयाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि करने के बाद मौजूद शिक्षकों और कर्मचारियों को संबोधित कर रहे थे।

गोविवि के प्रशासनिक भवन में मुख्यमंत्री ने पं. दीनदयाल की प्रतिमा पर की पुष्पांजलि

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की अगुवाई में गरीबों के कल्याण के लिए बीते सात वर्ष में जो भी योजनाएं लागू हुई हैं, अंत:करण से उसकी प्रेरणा पं. दीनदयाल के अंत्योदय और एकात्म मानववाद से मिली। पं. दीनदयाल का स्पष्ट मत था कि हमारी योजनाओं का आधार समाज का संपन्न नहीं बल्कि अंतिम व्यक्ति होना चाहिए। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज हर गरीब को आवास, शौचालय, एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच दिया जा रहा है। इन योजनाओं का लाभ किसी का चेहरा, जाति, मजहब, क्षेत्र देखकर नहीं दिया जा रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल के दौरान कई ऐसे कार्यक्रम शुरू हुए, जिससे लोककल्याणकारी सरकार का मानवीय चेहरा दुनिया के सामने आया। इसे पूरी दुनिया ने देखा।


दो साल में 15 महीने गरीबों को मुफ्त राशन दिया

आमतौर पर महामारी के समय बीमारी से तो मौतें हाेती ही हैं, भूख भी इसकी वजह बनती है पर सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया। पिछले दो साल में 15 महीने गरीबों को मुफ्त राशन दिया गया। देश में 80 और प्रदेश में 15 करोड़ लोग इससे लाभान्वित हुए। निश्चित रूप से यह कल्याणकारी योजनाएं एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने की माध्यम बनेंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि पं. दीनदयाल की जयंती पर हर ब्लाक मेंं गरीब कल्याण मेला आयोजित किया जा रहा है। हर नागरिक काे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले, यह मेला इसे सुनिश्चित करेगा। इस दौरान कुलपति प्रो. राजेश सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह, अधिष्ठाता विज्ञान संकाय प्रो. शांतनु रस्तोगी, प्रो. नंदिता सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डा. धर्मेंद्र सिंह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राहुल श्रीवास्तव, महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता, डा. सत्येंद्र सिन्हा आदि मौजूद रहे।