राजस्थान से पूर्व पीएम डाक्टर मनमोहन एकमात्र कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य बने

राजस्थान से पूर्व पीएम डाक्टर मनमोहन एकमात्र कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य बने

 राजस्थान में राज्यसभा की खाली हो रही तीन सीटों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार होने के कारण राज्यसभा में जाने के लिए कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गजों ने दिल्ली दरबार में लॉबिंग तेज कर दी है। राजस्थान से राज्यसभा की दस में से तीन सीटें 10 अप्रैल को खाली होने जा रही हैं।

लिहाजा तीनों सीटों को लेकर कांग्रेस पार्टी व भाजपा दोनों पार्टियों के नेता अपने अपने समीकरण सेट करने में लग चुके हैं। वर्तमान में खाली हो रही तीनों सीटें भाजपा के पास हैं लेकिन संख्या बल के अनुसार इनमें से 2 सीटें कांग्रेस पार्टी के खाते में व एक सीट पर भाजपा का ही अतिक्रमण रहेगा हालांकि इन तीन सीटों के लिए निर्वाचन आयोग ने अभी तक कोई प्रोग्राम जारी नहीं किया है।

कांग्रेस का पलड़ा भारी
वोटों की गणित के मुताबिक राज्यसभा की खाली होने वाली तीनों सीटों में से दो सीटों पर कांग्रेस पार्टी का पलड़ा भारी रहने वाला है। विधानसभा चुनाव 2018 के बाद बदले राजनैतिक समीकरणों का प्रभाव राजस्थान में 10 अप्रैल को रिक्त होने वाली राज्यसभा की तीन सीटों पर भी पड़ने वाला है। विधानसभा चुनावों से पहले राज्यसभा के चुनावों में प्रदेश की तमाम दस सीटों पर भाजपा काबिज थी लेकिन सत्ता के बदलने से प्रदेश की राज्यसभा की सीटों में भी पार्टियों का गणित बदल गया व एक सीट पर कांग्रेस पार्टी का अतिक्रमण हो गया है।

कांग्रेस के कई महान लॉबिंग में लगे 
कांग्रेस पार्टी के लिए कहां जा रहा है कि दो में से एक सीट के लिए लोकल व एक सीट के लिए आलाकमान की ओर से भेजे नाम पर मोहर लगेगी। इसलिए कई महान अपने अपने सीमकरण बिठाने में लग चुके हैं। सूत्रों की जानकारी के अनुसार, वैसे कॉन्ग्रेस में प्रियंका गांधी, मुकुल वासनिक, गुलाम नबी आजाद , अविनाश पांडे का नाम राजस्थान से राज्यसभा के लिए चल रहा है।

वहीं लोकल नेता के तौर पर जुबेर खान, रघुवीर मीणा, नमो नारायण मीणा, अश्क अली टाक, रामेश्वर डूडी के नाम चर्चा में आए है माना जा रहा है कि गुलाम नबी आजाद व सीएम अशोक गहलोत की पिछले दिनों जयपुर में मुलाकात इसी सिलसिले में हुई थी। कांग्रेस पार्टी जानकारों ने बताया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सीट पर ओबीसी (जाट) व एक सीट पर किसी दलित चेहरे को राज्यसभा में भेजा जा सकता है लेकिन सबसे अहम बात यह है कि राज्यसभा के लिए जो भी सदस्यों का चयन किया जाएगा, उसमें वर्तमान सियासी वातावरण को ध्यान में रखते हुए होगा। खासकर दिल्ली विधानसभा के नतीजों को मद्देनजर रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी।

बीजेपी ने अभी तक नहीं खोले पत्ते 
भाजपा की बात करें तो अभी तक कोई पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन बताया जा रहा है कि वर्तमान तीनों सांसदों की वापसी कठिन लग रही है। फिर भी तीनों जोर आजमाइश लगे हुए हैं लेकिन भाजपा सूत्रों का बोलना है कि वसुंधरा राजे खेमे के किसी चेहरे को शायद ही स्थान मिल पाएगी। सूत्रों का बोलना है कि  विजय गोयल की वापसी न के बराबर है व वसुंधरा खेमे के माने जाने वाले रामेश्वर डूडी के लिए भी दरवाजा बंद लग रहा है लेकिन नारायण पचारिया अभी न्यूटल खेल रहे हैं। संघ पृष्ठभूमि के चलते चांस बन सकते हैं लेकिन यह भी बताया जा रहा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व किसी नए चेहरे को ही राजस्थान से राज्यसभा भेजेगी।

प्रदेश में एक सीट के लिए वोटों का गणित 
प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर सारे 200 विधायकों के मान्य वोट हैं। प्रदेश की इन तीनों सीटों की बात करें तो हर एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए, इसमें कांग्रेस पार्टी के पास 107, भाजपा के पास 72 वोट हैं। अन्य छोटी पार्टियों व निर्दलीय विधायकों की कुल संख्या 21 है, जिनमें से 13 निर्दलियों ने कांग्रेस पार्टी को समर्थन दे रखा है। नंबरों की गणित के अनुसार 2 सीटों पर कांग्रेस, एक सीट भाजपा के खाते में जाएगी।  

वोटों की गणित के अनुसार कांग्रेस पार्टी को दो सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं। वहीं भाजपा के पास 72 विधायक हैं, ऐसे में प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए इसलिए भाजपा के खाते में एक सीट जाएगी।

राजस्थान से पूर्व पीएम डाक्टर मनमोहन एकमात्र कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य
पिछले वर्ष मदन लाल सैनी के निधन के बाद एक सीट पर हुए चुनाव में  पूर्व पीएम डाक्टर मनमोहन सिंह निर्विरोध चुने गए थे लेकिन वैसे तीन सीटों से भाजपा के रामनारायण डूडी, विजय गोयल व नारायण लाल पंचारिया का कार्यकाल पूरा हो रहा है।