श्रीलंका में देश का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम बनने वाली योजना हुई रद्द, जाने वजह

श्रीलंका में देश का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम बनने वाली योजना हुई रद्द, जाने वजह

श्रीलंका में 3 अरब से अधिक मूल्य में देश का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम बनने वाला था, मगर श्रीलंकाई दिग्‍गज महेला जयवर्धने (Mahela Jayawardene) व सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) के कड़े विरोध के बाद इस योजना को रद्द कर दिया गया है।

 श्रीलंका के पीएम ने रद्द करने का निर्णय लिया। पूर्व कप्‍तान जयसूर्या व जयवर्धने ने देश की राजाानी कोलंबों के पास प्रस्‍तावित क्रिकेट मैदान का विरोध किेया था व बोला कि स्‍टेडियम न बनाकर इस पैसों का इस्‍तेमाल युवा खिलाड़ियों की मदद करने के लिए किया जाए।
श्रीलंका सरकार ने पीएम महिंदा राजपक्षे की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में देश का सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण की परियोजना को रोकने का निर्णय किया।
इस मीटिंग में पूर्व क्रिकेटरों ने भाग लिया था, जिसके बाद पीएम ऑफिस की तरफ से जारी विज्ञप्ति में बोला कि होमागामा में नए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण की प्रस्तावित परियोजना निलंबित करने का निर्णय किया गया है। इसमें बोला गया है कि राजपक्षे ने आदेश दिये हैं इस धन का उपयोग स्कूल क्रिकेट व लोकल स्टेडियम के निर्माण में किया जाना चाहिए। इस स्टेडियम के निर्माण को लेकर जनता के विरोध के बाद राजपक्षे ने पूर्व सीनियर क्रिकेटरों से बात की थी।

आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए बताई थी जरूरत

श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) ने बोला था कि देश को 2023 से 2031 के भविष्य दौरा प्रोग्राम चक्र में आईसीसी आयोजनों की मेजबानी के लिए अपनी बोली को मजबूत करने के लिए एक नया स्टेडियम बनाने की आवश्यकता है। एससीएल ने घोषणा कि थी कि वह होमागामा शहर के बाहरी इलाके में 40 हजार दर्शकों की संख्या वाला अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम बनाने के लिए निरीक्षण कर रहा है। इस घोषणा के बाद बोर्ड की बहुत ज्यादा आलोचना होने लगी थी। श्रीलंका के पूर्व कैप्टन महेला जयवर्धने ने भी इस निर्णय पर आश्चर्य प्रकट करते हुए बोला था कि जब श्रीलंका की टीम अंतर्राष्ट्रीय व घरेलू स्तर पर ज्यादा क्रिकेट नहीं खेल रही तो स्टेडियम की आवश्यकता नहीं है। पिछले कुछ सालों से वित्तीय कठिनाई का सामना कर रहे एससीएल ने बोला कि खेल के छोटे फॉर्मेट की बढ़ती लोकप्रियता के कारण स्टेडियम बनाने की आवश्यकता है। बोर्ड ने बोला था कि यह परियोजना एसएलसी का एक पूर्ण व व्यक्तिगत निवेश होगा। निर्माण के किसी भी स्तर पर सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मांगी जाएगी।