लॉडर्स क्रिकेट स्टेडियम को जितने सम्मान दिया जाया है उतना ही सम्मान दिया जाता है टेनिस जगत में ऑल इंग्लैंड क्लब को, पढ़े

 लॉडर्स क्रिकेट स्टेडियम को जितने सम्मान दिया जाया है उतना ही सम्मान दिया जाता है टेनिस जगत में ऑल इंग्लैंड क्लब को, पढ़े

क्रिकेट के मैदान में जो सम्मान लॉडर्स क्रिकेट स्टेडियम (Lords Cricket Stadium) की है, वैसा ही सम्मान टेनिस जगत में ऑल इंग्लैंड क्लब (All England Club) को दिया जाता है। 

कारण है दोनों ही स्थान अपनी परंपराओं व नियमों के लिए प्रतिबद्धता के चलते बड़े से बड़े नामचीन को भी टोक दिया जाना। जैसे हर क्रिकेटर अपने करियर में कम से कम एक बार लॉडर्स में खेलना चाहता है, उसी तरह हर टेनिस खिलाड़ी भी कम से कम एक बार ऑल इंग्लैंड के ग्रास न्यायालय पर विंबलडन (Wimbledon) के सफेद कपड़ों में मुकाबला करने का सपना देखता है। लेकिन इस बार कोरोना वायरस (Coron Virus) महामारी ने टेनिस प्रेमियों को 75 वर्ष बाद एक बार फिर इस पारंपरिक ग्रैंड स्लैम को देखने से महरूम कर दिया है। वैसे तो इस टूर्नामेंट के 134वें सीजन के रद्द होने की घोषणा एक अप्रैल को ही कर दी गई थी। लेकिन रविवार को इसका आयोजन चालू होने की औपचारिक तारीख पर फिर से इस वर्ष टूर्नामेंट रद्द होने को याद किया  गया।  

आखिरी बार दूसरे दुनिया युद्ध ने रोका था आयोजन
करीब 144 वर्ष पहले 1877 में रॉयल टेनिस चैंपियनशिप के नाम से चालू किए गए विंबलडन ग्रैंड स्लैम का आयोजन इससे पहले महज दो बार ही रोका गया है। लेकिन दोनों बार कोई महामारी इसकी राह में रोड़ा नही बनी थी। यहां तक कि यूरोप में कोरोना वायरस की तर्ज पर ही भयानक कहर बरपाने वाले स्पेनिश फ्लू महामारी के दौरान भी विंबलडन का आयोजन चालू रहा था। इस ग्रैंड स्लैम के आयोजन पर पहली बार ब्रेक 1915 से 1918 के बीच प्रथम दुनिया युद्द के कारण लगा था तो दूसरी बार इसे 1940 से 1945 तक दूसरे दुनिया युद्द के कारण ही रोकना पड़ा था।

फेडरर व विंबलडन की साझेदारी खत्म!
विंबलडन के इतिहास की जब भी चर्चा की जाएगी तो स्विट्जरलैंड के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर (Roger Federer)के जिक्र के बगैर शायद ही इसे पूरा माना जाएगा। पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 फेडरर के लिए ऑल इंग्लैंड क्लब को हमेशा दूसरे घर जैसा माना गया, जहां उन्होंने अपने करियर के 8 विंबलडन खिताब जीते हैं। इस ग्रैंड स्लैम में उनके जैसा दबदबा किसी का नहीं रहा है। माना जा रहा था कि 38 वर्ष के हो चुके फेडरर संभवत: इस वर्ष यहां अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर देंगे, लेकिन कोरोना वायरस के चलते ये मौका उनसे छिन गया है। अब यह स्पष्ट नहीं है कि फेडरर अगले वर्ष यहां खेलने लौटेंगे या नहीं।  

इस वर्ष आयोजन नहीं होने से होगा भारी घाटा
इस वर्ष विंबलडन का आयोजन नहीं किए जाने के चलते इसकी आयोजन समिति को करीब 1500 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान है। यह घाटा व ज्यादा होने कि सम्भावना था, लेकिन ऑल इंग्लैंड क्लब की तरफ से 2003 में सार्स महामारी का कहर झेलने के बाद हर वर्ष बीमा कंपनी को 15 करोड़ रुपये का प्रीमियम चुकाए जाने का फायदा उनके घाटे को करीब 950 करोड़ रुपये तक कम कर रहा है। आयोजकों को बीमा कंपनी से 950 करोड़ रुपये मिलेंगे। विंबलडन के चीफ एक्जीक्यूटिव रिचर्ड लेविस ने भी माना कि टूर्नामेंट का बीमा होना किस्मत की बात है व इससे घाटा कवर करने में मदद मिलेगी।  

खाली स्टेडियम में आयोजन का खतरा नहीं उठाया
इस समय तकरीबन हर खेल का आयोजन खाली स्टेडियम में कराए जाने की बात चल रही है, लेकिन विंबलडन के आयोजकों ने कोविड-19 (Covid-19) के कहर को देखते हुए खतरा उठाने से मना कर दिया। 3 बार विंबलडन जीत चुके बोरिस बेकर (boris becker) ने आयोजकों से थोड़ा ठहरने की अपील की थी, लेकिन विंबलडन आयोजन समिति ने खिलाड़ियों के लिए खतरे को देखते हुए आयोजन रद्द ही कर दिया।