कोहली ने बदला ड्रेसिंग रूम का माहौल,  हिंदुस्तान ने न्यूजीलैंड के विरूद्ध खेली जा रही इस सीरीज को लेकर कहा

कोहली ने बदला ड्रेसिंग रूम का माहौल,  हिंदुस्तान ने न्यूजीलैंड के विरूद्ध खेली जा रही इस सीरीज को लेकर कहा

 मौजूदा भारतीय टीम अच्छी है? इसका कारण यह नहीं है कि टीम में बहुत ज्यादा टैलेंटेड खिलाड़ी हैं. बल्कि उनका माइंडसेट है. मैच किसी भी कंडिशन में हो लेकिन वे पराजय नहीं मानते. 

हिंदुस्तान ने तीसरे व चौथे मैच में न्यूजीलैंड के विरूद्ध सुपर ओवर में जीत दर्ज की. लेकिन मैच का सुपर ओवर में जाना जरूरी नहीं है. बल्कि मैच का अंतिम ओवर सबसे ज्यादा जरूरी रहा. दोनों में टीम पराजय के समीप थी लेकिन यहीं से मैच बदला. यह बताता है कि भारतीय टीम विषम परिस्थितियों में कैसे प्रदर्शन करती है. मैच में सरल जीत भी जरूरी होती है लेकिन रोमांचक जीत याद रहती है.

यह याद रखने वाली बात है कि टेस्ट में टीम इंडिया पिछले 36 महीने से नंबर-1 पर है. वनडे में टीम नंबर-1 व नंबर-2 के बीच रही. लेकिन टी20 में टीम टॉप-3 में भी नहीं है. हालांकि पॉइंट में टीम अधिक पीछे नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में टीम के तीनों फॉर्मेट में अच्छे प्रदर्शन का कारण क्या रहा? इसके तीन बड़े कारण हैं. पहला तेज गेंदबाजी में अच्छे खिलाड़ी, दूसरा आक्रामक कप्तानी व तीसरा खिलाड़ियों के बीच टीम में स्थान बनाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा.

कोहली ने ड्रेसिंग रूम का माहौल बदल दिया

पिछले बहुत ज्यादा दशक से हमें अच्छे खिलाड़ी देखने को मिल रहे हैं. इस कारण दूसरे व तीसरे कारण ज्यादा जरूरी हैं. कोहली अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित करने से आगे निकल गए हैं. उन्होंने ड्रेसिंग रूम का माहौल बदला है. मनीष पांडे चौथे मैच में अर्धशतक लगाकर चर्चा में आए हैं. घरेलू क्रिकेट में मनीष नंबर-3 या नंबर-4 पर खेलते हैं. लेकिन भारतीय टीम में उनकी स्थान नंबर-6 पर है. टॉप-4 में कोई स्थान खाली नहीं है. यह ऋषभ पंत व संजू सैमसन जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए सीख है तो कठिन में टीम में स्थान बना पा रहे हैं.

न्यूजीलैंड वर्ल्ड कप में अच्छा खेली थी

अगर पूछा जाए कि इतनी अच्छी टीम होने के बाद भी टीम इंडिया ने छह महीने पहले वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड को क्यों हरा सकी थी तो इसका केवल एक की कारण हैं उस दिन न्यूजीलैंड ने अच्छा खेल दिखाया. खेल में ऐसे उदाहरण हमें देखने को मिलते हैं जब एक बेकार दिन बहुत ज्यादा कुछ कर जाता है. 1983 के वर्ल्ड कप फाइनल में विंडीज टीम फाइनल में भारतीय टीम से पराजय गई. हालांकि यह नहीं कर सकते हैं कि मौजूदा भारतीय टीम 1975-90 वाली विंडीज याद 1990-2008 वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम है. कोहली की टीम अभी इस श्रेणी में आने से दूर है. जीत का सिलसिला इस तरह से जारी रहा तो टीम को इस श्रेणी से बाहर करना असंभव होगा.