Ind vs Aus 3rd ODI: तीसरे ODI में विराट अगर टॉस हारे तो जीतना हो सकता है मुश्किल, जानिए क्यों

Ind vs Aus 3rd ODI: तीसरे ODI में विराट अगर टॉस हारे तो जीतना हो सकता है मुश्किल, जानिए क्यों

कैनबरा, रायटर।  Ind vs Aus 3rd one dya match: ऑस्ट्रेलिया में कुछ कर गुजरने के लिए पहुंची भारतीय टीम सिडनी में हुए शुरुआती दो मैचों में गुजरी हुई नजर आई। तीन मैचों की सीरीज पहले ही 0-2 से हार चुकी विराट की टीम को अब कैनबरा की बल्लेबाजों की मुफीद पिच पर अपना सम्मान बचाना है। चयन और अंतिम-11 को लेकर पहले ही विवादों में घिरे विराट कोहली पिछले दो मैचों में टॉस हारे और अगर वह ऑस्ट्रेलियाई राजधानी में स्थित मानुका ओवल मैदान पर में भी टॉस हारते हैं तो शुरुआत में ही उनके हाथ से मैच फिसल सकता है क्योंकि यहां पिछले सात मैच उसी ने जीते हैं जिसने पहले बल्लेबाजी की है।

पिछले दोनों मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने 350 से ऊपर का स्कोर खड़ा किया और भारत को करारी शिकस्त दी। पहले मैच में भारत को 66 रनों से हार मिली जबकि दूसरे मैच में उसे 51 रनों की शिकस्त झेलनी पड़ी थी। अब उसका लक्ष्य कैनबरा में जीत हासिल करते हुए आने वाले मैचों के लिहाज से जरूरी आत्मबल हासिल करना है।

ऑस्ट्रेलिया हर विभाग में भारी : मेजबान टीम ने दोनों मैच में भारत को खेल के हर विभाग में दोयम साबित किया है। भारतीय गेंदबाज जहां दोनों मैचों में सिर्फ 10 विकेट ले सके हैं जबकि गेंदबाजों ने 763 रन लुटाए हैं। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों पर काफी दबाव रहा। वे तमाम कोशिशों के बावजूद 646 रन ही जुटा सके। दो मैचों में ऑस्ट्रेलिया की ओर से तीन शतक लगे हैं जबकि भारतीय बल्लेबाज एक भी शतक नहीं लगा सके हैं।

गेंदबाज को दिखाना होगा दम : ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने घरेलू हालात का फायदा उठाते हुए इस सीरीज में अब तक भारत के 17 विकेट चटकाए हैं और अपनी टीम की कामयाबी में अहम भूमिका निभाने में सफल रहे हैं। दूसरी ओर गेंदबाजों की नाकामी भारत पर भारी पड़ रही है। पहले मैच भारतीय गेंदबाजों ने 374 रन लुटा दिए। दूसरे मैच में सुधार की गुंजाइश की उम्मीद थी लेकिन वह मैच भारतीय गेंदबाजों के लिहाज से और भी बुरा साबित हुआ। इस मैच में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने 389 रन बटोर लिए। उसकी ओर से एक शतक और चार अर्धशतक लगे।

टीमों में दिखेगा परिवर्तन : पहले मैच में मुहम्मद शमी और दूसरे मैच में हार्दिक पांड्या को छोड़कर और कोई गेंदबाजी में प्रभावित नहीं कर सका है। इसके बाद परिवर्तन की मांग उठ रही है। विराट के पास मयंक अग्रवाल को हटाकर केएल राहुल से ओपनिंग कराने और मध्यक्रम में मनीष पांडेय को खिलाने का विकल्प है। इसके अलावा यह भी देखना होगा कि क्या वह टेस्ट सीरीज को देखते हुए जसप्रीत बुमराह या मुहम्मद शमी में से किसी एक को आराम देते हैं या नवदीप सैनी की जगह नटराजन को खिलाते हैं।

चोटिल होने के कारण डेविड वार्नर नहीं खेलेंगे। पैट कमिंस को भी आराम दिया गया है। कप्तान आरोन फिंच के पास डी आर्ची शॉट या मैथ्यू वेड के साथ ओपनिंग करने का विकल्प है। मध्यक्रम में उतर रहे मार्नस लाबुशाने ने ओपनिंग करने की इच्छा जताई है। अगर फिंच ओपनिंग में लाबुशाने के साथ उतरते हैं तो कैमरन ग्रीन को मध्यक्रम में पहला वनडे खेलने को मिल सकता है। कमिंस की जगह शेफील्ड शील्ड में तीन मैचों में 17.92 के औसत से 14 विकेट लेने और 130.50 के औसत से 261 रन बनाने वाले ऑलराउंडर शीन एबॉट को भी मौका मिलेगा।

वनडे सीरीज के बाद चार दिसंबर से तीन मैचों की वनडे सीरीज होगी। इसके बाद 17 दिसंबर से चार मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी है, जिसका पहला मैच एडिलेड में होगा। यह मैच दोनों टीमों के बीच का पहला दिन-रात का टेस्ट होगा। टेस्ट सीरीज भारत के लिए काफी अहम है और इसके लिए जरूरी आत्मबल जुटाने के लिए भारत को बुधवार को हर हाल में जीत हासिल करनी ही होगी।

दोनों टीम :

भारत : विराट कोहली (कप्तान), शिखर धवन, शुभमन गिल, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर, मनीष पांडे, हार्दिक पांड्या, मयंक अग्रवाल, रवींद्र जडेजा, युजवेंद्रा सिंह चहल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मुहम्मद शमी, नवदीप सैनी और शार्दुल ठाकुर।

ऑस्ट्रेलिया : आरोन फिंच (कप्तान), स्टीव स्मिथ, मार्नस लाबुशाने, ग्लेन मैक्सवेल, मार्कस स्टोइनिस, एलेक्स कैरी, मिशेल स्टार्क, एडम जांपा, जोश हेजलवुड, सीन एबॉट, एश्टन एगर, कैमरन ग्रीन, मोजेस हेनरिक्स, एंड्रयू टाई, डेनियल सैम्स, मैथ्यू वेड और शीन एबॉट।


अजिंक्य रहाणे की सफलता से विराट कोहली पर बढ़ा दबाव, दिग्गज बोले...

अजिंक्य रहाणे की सफलता से विराट कोहली पर बढ़ा दबाव, दिग्गज बोले...

अजिंक्य रहाणे के अंदर युवा खिलाड़ियों के साथ एक कमजोर भारतीय टीम का नेतृत्व करने की क्षमता है, जिसके दम पर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज जीती है और अब उनके इस प्रदर्शन से नियमित कप्तान विराट कोहली पर फिर से खुद को कप्तान के रूप में सफल होने का दबाव बढ़ गया है। रहाणे अब तक अपनी कप्तानी में एक भी टेस्ट नहीं हारे हैं। रहाणे ने अब तक पांच टेस्ट में भारतीय टीम की कप्तानी की और चार टेस्ट में जीत दिलाई, जबकि एक टेस्ट ड्रॉ रहा।

भारतीय टीम के नियमित कप्तान विराट कोहली अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए पहला टेस्ट खेलने के बाद स्वदेश लौट आए थे। उनके बाद रहाणे ने टीम की कमान संभाली थी और दूसरे टेस्ट में भारत को आठ विकेट से जीत दिलाई थी। इसके बाद सिडनी में मैच ड्रॉ रहा था और ब्रिसबेन में भारत ने तीन विकेट से ऐतिहासिक जीत के साथ सीरीज 2-1 से जीत ली थी। यहां तक कि पहले टेस्ट मैच में विराट कोहली की कप्तानी में भारत को करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें भारतीय टीम 36 रन पर ढेर हुई थी।


दिग्गजों ने उठाई मांग

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन हों या फिर पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी, रहाणे की कप्तानी से काफी प्रभावित नजर आए हैं। वॉन ने ट्वीट कर कहा था कि भारत रहाणे की कप्तानी में बेहतर प्रदर्शन करेगा। वॉन को लगता है कि रहाणे चतुराई से एक अच्छे कप्तान हैं। वॉन ने ट्वीट कर कहा कि मुझे लगता है कि बीसीसीआइ निश्चित रूप से रहाणे को कप्तानी देने पर विचार करेगा। कोहली केवल एक बल्लेबाज के रूप में भारत को मजबूत बनाएंगे और रहाणे के पास अविश्वसनीय उपस्थिति और रणनीति है। वहीं, बिशन सिंह बेदी ने कहा था कि रहाणे की कप्तानी ने उन्हें पूर्व भारतीय कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की याद दिला दी। बेदी ने कहा था कि रहाणे के अंदर गेंदबाजों को सही समय पर बदलने और शांतचित्त रहकर रणनीति बनाने की कारीगरी है।


मुश्किल सफर पर बड़ी सफलता

मुंबई में मुलुंड से आजाद मैदान तक धक्के खाकर ट्रेन से पहुंचने का रहाणे का सफर ही उनके संघर्ष से कठोर बनने की कहानी का गवाह है। चेहरे से शांतचित्त, लेकिन दिमाग से चालाक रहाणे अच्छे से जानते हैं कि उन्हें कौन सा दांव कब खेलना है। 2013 में दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जब वह पहली बार टेस्ट खेलने उतरे थे तो वह सफल नहीं रहे थे, लेकिन उसी साल डरबन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 51 और 96 रनों की पारी खेलकर रहाणे ने अपने करियर को रफ्तार दी।


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