कोरोना जुझ रहे क्रिकेट पिच उपचार नहीं मिला, जाने कैसे आएंगे परिणाम

कोरोना जुझ रहे क्रिकेट पिच उपचार नहीं मिला, जाने कैसे आएंगे परिणाम

कोरोना वायरस (Coronavirus) ने पूरी संसार में तबाही मचा दी। इस महामारी के कारण लोग अपने घरों में कैद हैं। ज्‍यादातर देश लॉकडाउन (Lockdown) है। खेल इवेट्स भी ठप्‍प पड़े हुए हैं। 

हालांकि कुछ राष्ट्रों में बिना दर्शकों के इवेंट प्रारम्भ हो गए है व हिंदुस्तान में भी चौथे लॉकडाउन में स्‍टेडियम को खोल दिया गया, ताकि खिलाड़ी ट्रेनिंग पर लौट सके। कोरोना के कारण सिर्फ खिलाडि़यों की ट्रेनिंग ही प्रभावित नहीं हुई है, बल्कि क्रिकेट पिच भी इस वायरस से जुझ रही है व अगर इसे समय पर उपचार नहीं मिला तो इसके परिणाम अगले सीजन में नजर आएंगे।
दरअसल जून में मानसून आने से पहले क्रिकेट पिच की ड्रेसिंग की जाती है। यानी इसमें खाद, उर्वरक व खास किस्‍म की मिट्टी डाली जाती है। जिससे मानसून आने पर यह तैयार हो सके व अगले सीजन में इस पर अच्‍छे तरह से मैच खेला जा सके। हिंदुस्तान के इंटरनेशनल मैचों की पिच के लिए यह पूरी तरह से 10 दिनों का कार्य है, जो पिछले सीजन की थकी हुई पिचों को फिर से ताजा करती है व खेलने लायक बनाती है। मगर कोरोना वायरस के निपटने के लिए जारी लॉकडाउन में यह कार्य बहुत ज्यादा कठिन हो गया है।
धीमी हो जाएगी पिच
हिंदुस्‍तान टाइम्‍स से बात करते हुए बीसीसीआई (BCCI) के पूर्व चीफ क्‍यूरेटर दलजीत सिंह ने बोला कि आप सारे वर्ष इस पर खेलते हैं। इस पर बहुत ज्यादा कुछ होता है व सीजन के अंत में विकेट भी ओवरलोड हो जाता है। घास मर जाती है, कार्बनिक पदार्थ अंदर चले जाते हैं। अगले सीजन के लिए इसकी ड्रेसिंग करनी होती है। मानसून से पहले करने पर बारिश के दौरान यह सेट हो जाता है। नयी घास उग जाती है। अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो अगले वर्ष आपकी पिच धीमी हो जाएगी। आपकी पिच थकी हुई होगी।

मध्‍य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के चीफ क्‍यूरेटर समंदर सिंह चौहान ने विकेट की तुलना पार्लर जाने से की। उन्‍होंने बोला कि विकेट की ड्रेसिंग करना अच्छा उसी तरह है, जैसे आप ब्‍यूटी पार्लर जाएं व फिर फ्रेश होकर वापस आए। मानसून से पहले पिच को ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है। तभी वे अच्‍छा व्‍यवहार करती हैं।

मई में मध्‍य में आने लगती है मिट्टी
विकेट व आउटफील्‍ड के लिए मुंबई में मिट्टी का आना मई के दूसरे या तीसरे सप्‍ताह से प्रारम्भ हो जाता है। इसके लिए मुंबई क्रिकेट एसोसिशन अप्रैल के अंत में आदेश देती है व फिर इसकी आपूर्ति मई के दूसरे या तीसरे सप्‍ताह से प्रारम्भ हो जाती है। मिट्टी मुंबई से करीब 54 किलोमीटर दूर पड़घा गांव से आती है। आउटफील्‍ड के लिए मिट्टी की लागत एससीए वहन करती है, जबकि विकेटों के लिए क्‍लब करता है। मगर इस समय मुंबई देश का सबसे ज्‍यादा कोरोना प्रभावित शहर है व इस समय मिट्टी की आपूर्ति संभव नहीं है। एमसीए अपेक्‍स काउंसिल के सदस्‍य नदीम मेमन ने बोला कि मिट्टी लाने के लिए कोई ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है व गांव वाले भी अपने इलाके में किसी गाड़ी को आने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इसके साथ ही स्‍टाफ की भी कठिनाई है। अब सभी कोई यह कार्य मानसून के बाद होने की उम्‍मीद है।