World Population Day: ग्लोबल पॉपुलेशन में पिछले छह दशकों में आई सबसे ज्यादा तेजी

World Population Day: ग्लोबल पॉपुलेशन में पिछले छह दशकों में आई सबसे ज्यादा तेजी

आज दुनिया जनसंख्या दिवस है। दुनिया की बढ़ती जनसंख्या व उसके दुष्परिणामों के प्रति जागरुक करने के लिए हर वर्ष 11 जुलाई को दुनिया जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाया जाता है। संसार की आबादी किस तेजी से बढ़ रही है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 1800 में संसार की आबादी थी 100 करोड़। जो 2018 में बढ़कर हो गई 761 करोड़। ग्लोबल पॉपुलेशन में पिछले छह दशकों में सबसे ज्यादा तेजी आई है। पिछले छह दशक में आबादी 120 प्रतिशत बढ़ी है। 1960 में संसार की आबादी 300 करोड़ थी। अस्सी के दशक में संसार की बढ़ती आबादी के प्रति जागरुकता आई। संयुक्त देश संघ ने 1989 से हर 11 जुलाई को दुनिया जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाने का फैसला लिया।उसके बाद हर वर्ष संसार के सारे देश इस दिन बढ़ती आबादी के प्रति लोगों को जागरुक करते हैं।

25 वर्ष पहले संसार को हुई बढ़ती आबादी की चिंता

पिछले वर्ष वर्ल्ड पॉपुलेशन डे की थीम परिवार नियोजन थी। लेकिन इस बार कोई थीम नहीं रखी गई। यूएन ने निर्णय लिया कि पहले 1994 के इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट के बचे हुए कामों पर ध्यान दिया जाए। 25 वर्ष पहले संसार के राष्ट्रों ने निर्णय लिया था कि लोगों को प्रजनन स्वास्थ्य व लैंगिक असमानता के प्रति लोगों को जागरुक बनाकर विकास की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

बढ़ती जनसंख्या की वजह से प्राकृतिक संसाधनों में कमी आ रही है। ग्लोबल वार्मिंग व क्लाइमेट चेंज के पीछे संसार की बढ़ती आबादी का ही हाथ है। हमें खुद को बचाए रखने के साथ प्रकृति को बचाए रखने के प्रति भी कार्य करना होगा। आने वाली पीढ़ी को संसार की बढ़ती आबादी के खतरों से आगाह करना होगा।

1951 में हिंदुस्तान सरकार ने जनसंख्या के प्रति जागरुकता के कदम उठाए

भारत ने इस दिशा में सबसे पहले 1951 में कदम उठाए। उस वर्ष हिंदुस्तान ने नेशनल फैमिली प्लानिंग कार्यक्रम की आरंभ की। विकासशील राष्ट्रों में हिंदुस्तान फैमिल प्लानिंग चलाने वाला पहला देश बना। इस कार्यक्रम का मकसद था कि हिंदुस्तान की जनता आबादी व उससे होने वाले दुष्परिणामों को समझें। लोग खुद निर्णय करें कि उन्हें कितने बच्चे चाहिए कि वो उनपर पूरा ध्यान दे सकें व उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें। इसमें सबसे बड़ी सफलता परिवार नियोजन के प्रति जागरुकता से आई।
संसार का हर छठा आदमी हिंदुस्तान में रहता है

यूएन के डाटा के मुताबिक हिंदुस्तान की जनसंख्या 137 करोड़ है। हिंदुस्तान संसार का दूसरा बड़ी आबादी वाला देश है। हालांकि क्षेत्रफल के हिसाब से हिंदुस्तान का जगह 7वां है।संसार का हर छठा आदमी हिंदुस्तान में निवास करता है। हिंदुस्तान की आबादी पिछले 40 वर्ष में दुगुनी हो चुकी है। अगले कुछ वर्ष में हम जनसंख्या के मुद्दे में चाइना को भी पछाड़ने वाले हैं। वैसे हिंदुस्तान की जनसंख्या 1.02 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। हिंदुस्तान में हर एक स्कॉयर किलोमीटर में 416 लोग रहते हैं। पॉपुलेशन डेनसिटी (जनसंख्या घनत्व) के हिसाब से हिंदुस्तान का संसार में 31वां जगह है। मुंबई में आबादी का वजन सबसे ज्यादा है। वहां हर स्कॉयर किलोमीटर में 21 हजार लोग रहते हैं।

भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर

हिंदुस्तान में मुंबई सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है। 2011 की जनगणना के मुताबिक मुंबई की आबादी 1 करोड़ 25 लाख थी। दिल्ली का जगह दूसरा है, जहां की आबादी करीब 1 करोड़ 11 लाख की है। हिंदुस्तान में 50 शहर ऐसे हैं जिनकी आबादी 10 लाख से ज्यादा है। 1971 में मुंबई की आबादी 59 लाख थी
देश के बाकी बड़ी आबादी वाले शहरों में बेंगलुरु का भी नाम है। बेंगलुरु की आबादी करीब 84 लाख है। हैदराबाद की आबादी 68 लाख, वहीं अहमदाबाद की जनसंख्या 55 लाख है।

भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य

आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश सबसे बड़ी जनसंख्या वाला प्रदेश है। यहां देश के करीब 20 करोड़ लोग रहते हैं। सिक्किम सबसे छोटा प्रदेश है, जहां की आबादी 5 लाख के करीब है। देश के दो बड़े प्रदेश महाराष्ट्र व बिहार हैं। महाराष्ट्र की आबादी 11 करोड़ व बिहार की आबादी करीब 10 करोड़ है।
एक आंकड़े के मुताबिक जनसंख्या के मुद्दे में हम 2024 तक चाइना को पछाड़ देंगे। हमारी आबादी 144 करोड़ के करीब होगी। 2029 तक हमारी जनसंख्या 150 करोड़ को पार कर जाएगी।ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2061 के बाद हिंदुस्तान की आबादी घटनी प्रारम्भ होगी। यानी आबादी कम होने के लिए हमें अभी भी 42 वर्ष का इंतजार करना होगा।