विजयवर्गीय बोले- मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने को ही डस लिया?

विजयवर्गीय बोले- मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने को ही डस लिया?

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मध्य प्रदेश के इंदौर में राज्य सरकार के खिलाफ अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। कैलाश विजयवर्गीय ने बीजेपी के सारे गुटों को दरकिनार करते हुए किसान आक्रोश रैली के जरिए अपने खेमे के साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वो लोगों से किए वादे पूरे नहीं किए तो वे ऐसी हालत कर देंगे कि मुख्यमंत्री कमलनाथ सड़क पर निकल नहीं पाएंगे।

किसान आक्रोश रैली में शामिल हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनों को ही डस लिया है। उन्होंने सबको खत्म करके बेटे नकुलनाथ को खड़ा कर दिया। लोकसभा चुनाव परिणाम को लेकर कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजय सिंह और सुरेश पचौरी को निपटा दिया। विजयवर्गीय ने कमलनाथ पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो राज्य में कांग्रेस के बड़े नेताओं को दरकिनार कर अपने बेटे नकुलनाथ को मध्य प्रदेश का नेता बनाना चाहते हैं।

राज्य की जनता कमलनाथ सरकार से परेशान हैं

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यही वजह है कि वो अपने बेटे को लेकर पीएम मोदी से मिलने गए थे। मध्य प्रदेश में किसान परेशान हैं और उनका गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा विजयवर्गीय ने और भी कई मुद्दों को लेकर कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा है। बता दें कि बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में ज्यादा एक्टिव रहे हैं। जिसकी असर भी राज्य में देखने को मिला है और बीजेपी के खाते में 18 सीटें आई हैं।

किसान आक्रोश रैली पर कांग्रेस ने किया पटलवार

इंदौर में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयर्गीय की किसान आक्रोश रैली और उनके बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। रैली के ठीक बाद उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कैलाश विजयवर्गीय भाषा की मर्यादा भूल रहे हैं। वो इंदौर की गरिमा को गिरा रहे हैं। जीतू पटवारी ने कहा कि ज्यो-ज्यो कैलाश विजयवर्गीय की उम्र बढ़ती जा रही है कि त्यों-त्यों उनकी भाषा शैली और शब्दों का चयन छोटा होता जा रहा है। बीजेपी किसानों के नाम पर राजनीति कर रही है। जबकि असल लड़ाई बीजेपी के अंदर के वर्चस्व की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ शिवराज सिंह, राकेश सिंह, गोपाल भार्गव कहते हैं कि मैं नेता हूं नेता हूं तो दूसरी ओर कैलाश विजयवर्गीय अपने आपको नेता बताते हैं। पार्टी के अंदर इस लड़ाई का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।