ट्रंप-पुतिन में बढ़ी दूरियां, रूस के साथ परमाणु करार से अलग होने को तैयार अमरीका

ट्रंप-पुतिन में बढ़ी दूरियां, रूस के साथ परमाणु करार से अलग होने को तैयार अमरीका

वाशिंगटन. चीन, उत्तर कोरिया व ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अब रूस के साथ भी अमरीका के संबंधों में दूरियां बढ़ती जा रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है.

दरअसल, अमरीका ईरान के बाद अब रूस के साथ परमाणु समझौते से बाहर निकलना चाहता है. लिहाज इसे लेकर ट्रंप कभी भी औपचारिक घोषणा कर सकते हैं.

अमरीका ने रूस के साथ 'इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज ट्रीटी' ( INF ) से औपचारिक रूप से अलग होने की तैयारी कर ली है, जिससे हथियारों को लेकर नयी होड़ मचने की संभावना बढ़ गई है.

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बता दें कि 1987 में समझौते पर राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन व सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने हस्ताक्षर किए गए थे. इस समझौते के मुताबिक, 500 व 5,500 किलोमीटर की दूरी के बीच मार करने वाले मिसाइलों पर प्रतिबंध है.

हालांकि इस वर्ष के आरंभ में अमरीका व नाटो ने रूस पर एक नए प्रकार की क्रूज मिसाइल तैनात करके समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था. लेकिन रूस ने इसे सिरे से नकार दिया था.

अमरीका ने रूस पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए बोला कि उनके पास इसके प्रमाण हैं कि रूस ने 9 एम 729 मिसाइलों को तैनात किया था, जिसे एसएससी-8 के तौर पर जाना जाता है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी 2019 में घोषणा की थी कि अगर रूस ने समझौते के नियमों का पालन नहीं किया तो अमरीका इससे अलग हो जाएगा व इसके लिए 2 अगस्त की समय सीमा तय की थी.

रूस-अमरीका में बढ़ती दूरियां

बता दें कि रूस के साथ अमरीका के संबंधों में आ रहे खटास के कई कारण हैं. हाल के दिनों में अमरीका ने कई राष्ट्रों को रूसी निर्मित मिसाइल S-400 को खरीदने पर पाबंदी लगा दी है.

S-400 को लेकर अमरीका व रूस में तनाव गहराता जा रहा है. अभी हाल ही में रूस ने तुर्की को S-400 की पहली खेप पहुंचा दी है वउम्मीद है कि बहुत जल्द हिंदुस्तान को भी S-400 मिल जाएगा.

अमरीका मानता है कि रूस ने अमरीकी मिसाइल का सामना करने के लिए इसे डिजाइन किया है. बीते दिनों ट्रंप ने बोला था कि वह इस तरह के सैन्य उपकरण खरीदने वाले किसी भी देश के विरूद्ध हैं जिसमें रूसी निर्मित S-400 मिसाइल रक्षा सिस्टम शामिल है, जो कि अमरीका की पांचवीं पीढ़ी के जटिल विमान का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है.

गौरतलब है कि हिंदुस्तान भी रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है. बीते वर्ष अक्टूबर में हिंदुस्तान ने रूस के साथ S-400 खरीदने के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का समझौता किया है.