छोटे कारोबार की सीमा बढ़ेगी इतने गुना, सरकार करेगी यह बड़ा काम

छोटे कारोबार की सीमा बढ़ेगी इतने गुना, सरकार करेगी यह बड़ा काम

सुस्ती का सामना कर रही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की सीमा 25 गुना बढ़ेगी. सूत्रों ने बुधवार को हिन्दुस्तान को बताया है कि नयी व्यवस्था में एमएसएमई की सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़कर 250 करोड़ रुपये हो सकती है. इस व्यवस्था के लिए सरकार अध्यादेश का सहारा ले सकती है.

सूत्रों ने बताया कि सरकार 5 करोड़ रुपये सालाना तक कारोबार करने वाले को सूक्ष्म उद्योगों का दर्जा देगी. पांच करोड़ से 75 करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार करने वाले कारोबारियों को लघु उद्योगों की श्रेणी बनेगी. वहीं 75 करोड़ से 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार मध्यम उद्योग की श्रेणी में होंगे. सालाना कारोबार के हिसाब से सरकार कारोबारों की अलग श्रेणियां भी बनाने पर कार्य कर रही है. अकेले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए तीन से ज्यादा वर्ग बनाने पर विचार हो रहा है. इनमें जेम्स एंड ज्वैलरी, ऑटो कंपोनेंट व कपड़ा उद्योग के लिए भिन्न-भिन्न परिभाषा होगी.

नए कानून में सरकार इन उद्योगों से जुड़े भुगतान में देरी संबंधी समस्याओं को दूर करने व समय पर GST रिटर्न देने जैसी पुख्ता व्यवस्था भी देगी. मौजूदा दौर में देश की जीडीपी में एमएसएमई कारोबारियों का महज 29 प्रतिशत सहयोग है. सरकार अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है.
अभी सिर्फ विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की श्रेणियां : मौजूदा व्यवस्था में एमएसएमई कारोबारियों को कारोबार के लिहाज से दो श्रेणियों में बांटा गया है. विनिर्माण क्षेत्र व सेवा क्षेत्र. विनिर्माण क्षेत्र में में 25 लाख रुपये तक के कारोबारियों को सूक्ष्म उद्योग, 25 लाख से 5 करोड़ रुपये तक लघु उद्योग व 5 से 10 करोड़ तक के कारोबार को मध्यम उद्योगों की श्रेणी में रखा गया है.


कारोबारियों की लंबे समय से मांग है कि जिस गति से पिछले कई वर्षों में अर्थव्यवस्था में परिवर्तन देखने को मिला है, कारोबारियों के इनपुट कॉस्ट में भी इजाफा हुआ है. साथ ही पहले के मुकाबले कई कारोबार टर्नओवर में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है. इसके चलते कई उद्योग एमएसएमई के दायरे से बाहर हो गए हैं. अब सरकार इन्हें फिर से मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. एमएसएमई क्षेत्र में डूबे हुए या बेकार लोन कारोबारियों को उबारने के लिए सरकार ने 5000 करोड़ का अलावा फंड बनया है. ज्यदा कंपनियों के इस दायरे में आने के बाद भविष्य में सरकार इस फंड की रकम में भी इजाफा कर सकती है. वहीं विदेशी निवेशकों व क्राउड फंडिंग के जरिए इन कारोबारियों के लिए रकम जुटाना सरल बनाने के लिए स्पेशल परपस व्हीकल की भी व्यवस्था है जो जाहिर है नयी व्यवस्था में व कारोबारियों को लाभ देगी.

इस तरह परिवर्तन की तैयारी
- सूक्ष्म व लघु उद्योगों के साथ मझोले उद्योग की परिभाषा बदलेगी सरकार
- सालाना टर्नओवर के मुताबिक भिन्न भिन्न कैटेगरी के लिए अलग परिभाषा होगी
- विनिर्माण क्षेत्र के लिए तीन से ज्यादा कैटेगरी बनाने पर विचार ’ जेम्स एंड ज्वैलरी, ऑटो कंपोनेंट व कपड़ा उद्योग के लिए अलग परिभाषा
- भुगतान में देरी व GST रिफंड की पुख्ता व्यवस्था होगी नए कानून में

लंबे समय से मांग कर रहे हैं कारोबारी
देशभर के व्यापारी कारोबार की सीमा के हिसाब से एमएसएमई की परिभाषा बदलने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं. कारोबारियों का बोलना है कि जिस गति से पिछले कई वर्षों में अर्थव्यवस्था में परिवर्तन देखने को मिला है, उससे इनपुट लागत मे इजाफा हुआ है. टर्नओवर में भी बड़ा परिवर्तन आया है. इसके चलते कई उद्योग एमएसएमई के दायरे से बाहर हो गए हैं. अब सरकार इन्हें फिर से मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. एमएसएमई क्षेत्र में डूबे हुए या बेकार लोन वाले कारोबारियों को उबारने के लिए सरकार ने 5000 करोड़ का अलावा फंड बनाया है. अधिक कंपनियों आने से रकम में भी इजाफा होने कि सम्भावना है.

इस तरह मिलेगा फायदा
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों का दायरा बढ़ाए जाने से न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा बल्कि वैश्विक मार्केट में हिंदुस्तान की धाक भी बढ़ेगी. कारोबारियों को मिलने वाली सहूलियतों के चलते उनका उत्पादन बढ़ेगा व बढ़े हुए उत्पादन का निर्यात भी दुनियाभर के बाजारों संभव होगा. इसके अतिरिक्त रोजगार के मोर्चे पर खुशखबरी आ सकती है. सहूलियतों के बाद कारोबारी आपनी यूनिटों में इजाफा करेंगे जो जाहिर है नए लोगों के लिए रोजगार के मौके मुहैया कराएगा.