भूकंप के जोरदार झटकों से थर्राया इंडोनेशिया, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

भूकंप के जोरदार झटकों से थर्राया इंडोनेशिया, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

जकार्ता. इंडोनेशिया ( Indonesia ) के सुमात्रा ( Sumatra ) व जावा ( JAVA ) में शुक्रवार को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए. भूकंप के फौरन बाद अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की है. अधिकारियों ने 3 मीटर ऊंचे सुनामी आने की संभावनाजताई है.

संयुक्त प्रदेश भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ( USGS ) के अनुसार, राजधानी जकार्ता के दक्षिण-पश्चिम में लाबुआन से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर 6.9 तीव्रता का भूकंप आया जिसका केन्द्र 52.8 किलोमीटर की गहराई पर था.

USGS ने प्रारम्भ में भूकंप की तीव्रता 6.8 व एक shallower गहराई पर बताई थी. बता दें कि सुनामी की चेतावनी को दो घंटे से अधिक समय के बाद हटा लिया गया. हालांकि तट के किनारे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से धरती को खाली करने का आग्रह किया गया है.

इंडोनेशिया की आपदा एजेंसी ने पहले बोला था कि जावा व सुमात्रा द्वीपों के बीच, जलडमरूमध्य पर एक सुनामी आ सकती है, जहां दिसंबर में ज्वालामुखी से फैली सूनामी में 400 से अधिक लोग मारे गए थे.

कोई भी हताहत नहीं

बता दें कि भूकंप आने के बाद किसी के भी हताहत होने की कोई सूचना नहीं है. भूकंप इतना ताकतवर था कि इसे जावा द्वीप पर याग्याकार्टा ( Yogyakarta ) जैसे अन्य शहरों में भी महसूस किया जा सकता था.

भूकंप का यह झटका शाम को सात बजे के करीब महसू किया गया. भूकंप आने के बाद जकार्ता में लोग घरों से निकलकर भागने लगे व सड़कों पर आ गए. लोगों ने बताया कि भूकंप के झटके शाम के 7:03 बजे समाप्त हो गया.

50 वर्षीय एलिसा ने बोला कि मेरे अपार्टमेंट में झूमर हिल रहा था व मैं फौरन 19 वीं मंजिल से नीचे भागा. बाहर देखा तो हर कोई भाग रहा था. यह एक बहुत मजबूत झटका था व मैं बहुत भय गई थी.

वहीं क्रिस्टाबेल एडलाइन जिसका ऑफिस मध्य जकार्ता में है, ने कहा, जब इमारत हिल रही थी तब मैं 18 वीं मंजिल पर था. यह बहुत ज्यादा डरावना था व लगभग भूंकप का झटका एक मिनट तक चलत रहा.

मालूम हो कि पिछले वर्ष सुलावेसी द्वीप पर 7.5 तीव्रता का भूकंप व उसके बाद की सुनामी ने 2,200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि एक हजार लोग लापता हो गए थे.

26 दिसंबर 2004 को सुमात्रा के तट पर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया था व इंडोनेशिया में लगभग 170,000 सहित हिंद महासागर क्षेत्र में 220,000 लोग मारे गए थे.