अब पाकिस्तान के इन बड़े मंसूबों पर फिरेगा पानी, आप भी जाने

अब पाकिस्तान के इन बड़े मंसूबों पर फिरेगा पानी, आप भी जाने

पंजाब के तरनतारन में पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा हथियार गिराए जाने की घटना के बाद से भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं. सरकार भिन्न-भिन्न ड्रोन रोधी तकनीक के फील्ड परीक्षण के लिए एजेंसियों व अर्धसैनिक बलों को हरी झंडी देने का मन बना चुकी है. हिंदुस्तान में बनाए गए कुछ ड्रोन रोधी मॉडल का परीक्षण करने के साथ नए सिरे से तकनीक विकसित करने पर भी कार्य प्रारम्भ करने को बोला गया है जिससे कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले ड्रोन भी सरलता से पकड़ में आ सकें.

विदेशी तकनीक पर भी नजर
बाहरी राष्ट्रों से भी ड्रोन रोधी तकनीक साझा करने पर बात हो रही है. इनमें ऑस्ट्रेलिया, इजरायल व अमेरिका की तकनीक शामिल है. ऑस्ट्रेलिया में निर्मित ड्रोन गन रेडियो व जीपीएस की कार्यप्रणाली को जाम कर सकती है. यह मोबाइल सिग्नल को भी रोकने में सक्षम है. जिसके जरिए ड्रोन लक्ष्य से भटक सकता है व जमीन पर उतरने को विवश होने कि सम्भावना है. ऑस्ट्रेलिया में डिजाइन किए गए इस उपकरण की सीमा दो किलोमीटर तक है.

रास्ते में ही रोकने में मिलेगी सफलता
स्काई फेंस प्रणाली की भी भिन्न-भिन्न तकनीक पर विचार किया जा रहा है. इसके माध्यम से खतरनाक ड्रोन को लक्ष्य से पहले ही रोका जा सकता है. इस तकनीक से ड्रोन के रास्ते को ही जाम किया जा सकता है. बीएसएफ के पूर्व एडीजी पीके मिश्रा ने बोला कि इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फेंस सिस्टम व सेटेलाइट इमेजरी सिस्टम के जरिए सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन पर नजर रखने की आवश्यकता है. साथ ही नयी तकनीक पर कार्य करने की आवश्यकता है.

सुरक्षा एजेंसियां कर रही मंथन
बीपीआरडी ने पिछले दिनों ड्रोन रोधी तकनीक को लेकर बहुत ज्यादा मंथन भी किया था. विचार विमर्श में सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े तमाम आला अधिकारियों ने भाग लिया था. अधिकारियों का बोलना है कि आने वाले दिनों में ड्रोन बड़ा खतरा हो सकते हैं. खासतौर पर सऊदी अरब में हुए खतरनाक ड्रोन हमले व पंजाब में पकड़े गए ड्रोन को सुरक्षा एजेंसियां आने वाले दिनों की चुनौती से जोड़कर देख रही हैं. एक व्यक्तिगत कंपनी के एरोस्कोप ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम सहित कई अन्य मॉडल का परीक्षण किया जा चुका है. लेकिन अभी पूरी तरह से संतोषजनक परिणाम के लिए नयी तकनीक पर कार्य हो रहा है

आतंकी कर सकते हैं ड्रोन का इस्तेमाल
सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सूत्रों का बोलना है कि जैश ए मोहम्मद, लश्कर जैसे कुख्यात आतंकवादी संगठन अपने खतरनाक इरादों को अंजाम देने के लिए ड्रोन का प्रयोग कर सकते हैं. पंजाब में भी ड्रेान से हथियार गिराने की घटना को आंतकवाद को बढ़ावा देने की आईएसआई की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है.