जानिए, किस तरह स्वाथ्य के नुकसानदायक मोबाइल फोन

जानिए, किस तरह स्वाथ्य के नुकसानदायक मोबाइल फोन

गैजेट्स व सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने युवाओं और अन्य उपभोक्ता को भी इनका आदी बना दिया है. हालांकि ये हर आदमी की आवश्यकता बन गए हैं लेकिन सीमित समय से ज्यादा इनका इस्तेमाल दिमागी और शारीरिक रूप से बहुत ज्यादा नुकसानदायक है. दिनभर में 4 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम न दें व सोने से करीब आधा घंटा पहले मोबाइल फोन से दूरी बनाएं

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रिसर्च का दावा
हाल ही नॉर्वे में हुई एक रिसर्च के अनुसार अन्य सोशल साइट के मुकाबले फेसबुक प्रयोग करना एक लत के समान है. इससे लोगों में बर्जन फेसबुक एडिक्शन स्केल (बीएफएएस) नामक बिहेवियर प्रॉब्लम सामने आई है. पुरुषों की तुलना में ऐसी महिलाएं जिन्हें बेचैनी ज्यादा रहती है वे इसकी अधिक शिकार हैं. यह लत उन्हें धीरे-धीरे मूड स्विंग, स्वभाव में संयम न होने, समाज से दूर करने के साथ एकाग्रक्षमता घटाती है. ऐसा ही अन्य सोशल साइट पर भी अपनी अपििस्थत देेने की सोच लोगों के दिमाग में चलती है.
दिमाग के ग्रे व वाइट भाग का काम होता धीमा
दिमाग का ग्रे भाग इंटरनेट और गेमिंग से सक्रिय रहता है. मुख्य रूप से प्रोसेसिंग के लिए यह कार्य आता है जिसमें प्लानिंग, मैनेजिंग, ऑर्गेनाइजिंग शामिल है. इस भाग पर बुरा प्रभावपडऩे से दिमाग सिकुडऩे लगता है जिससे याद्दाश्त में कमी और चलने-फिरने में परेशानी होती है. लंबे समय तक गैजेक्ट की स्क्रीन देखने से दिमाग के वाइट मैटर पर प्रभाव होता है. ऐसे में यह अलर्ट सिग्नल नहीं दे पाता. गैजेट्स से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें दिमाग की जीन्स में परिवर्तन कर ब्रेन ट्यूमर व कैंसर की संभावना बढ़ा देती है. लगातार आंखों को स्क्रिन पर गड़ाए रखने से कॉर्निया पर होने वाले खिंचाव से देखने में परेशानी हो सकती है. कई बार धुंधला दिखने और बार-बार पानी आने की परेशानी रहती है. अभिभावकों व बच्चों सभी को सोशल मीडिया एडिक्शन पर ध्यान देना चाहिए.