पति की बेइज्जती करना, धमकी देना तलाक का आधार नहीं, उच्च न्यायालय

पति की बेइज्जती करना, धमकी देना तलाक का आधार नहीं, उच्च न्यायालय

दिल्ली हाई कोर्ट ने तलाक के दो मामलों में सुनवाई की है. एक मुद्दे में जहां पत्नी को तो दूसरे मुद्दे में पति को राहत मिली. कोर्ट ने पहले मुद्दे में पारिवारिक न्यायालय के निर्णय को उलट दिया. पारिवारिक न्यायालय ने विवाह के 28 वर्ष बाद पति की मांग को मानते हुए केवल इसलिए तलाक दे दिया था क्योंकि पत्नी खाना बनाकर नहीं देती व उससे सहानूभूति नहीं रखती है.

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कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व ज्योति सिंह की बेंच ने सोमवार को पत्नी की याचिका पर बोला कि पत्नी का खाना बनाकर न देना, साहनुभूति न रखना, दोनों के बीच एजुकेशन के अंतर पर बहस होना, बिजली का बिल न भरना आदि कारण तलाक का आधार नहीं हो सकते हैं. यह बातें शादीशुदा ज़िंदगी में होने वाली नोंक-झोंक हैं.

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने अपने निर्णय में बोला कि पत्नी से तलाक के लिए पति ने जो आधार पेश किए हैं उनमें कोई भी ऐसा आधार नहीं है जो कानूनी रूप से क्रूरता की श्रेणी में आता हो.वहीं हाथापाई व अन्य गंभीर आरोपों के पुख्ता सबूत नहीं हैं. निचली न्यायालय ने इस तथ्य को अनदेखा किया कि बेशक 2008 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं लेकिन दोनों एक ही बिल्डिंग में रहते हैं जोकि दोनों की संयुक्त संपत्ति है.

इसी वजह से दोनों के बीच टकराव समाप्त होने की अभी भी आसार है. इस कारण पारिवारिक न्यायालय के निर्णय को ठीक नहीं बोला जा सकता. अत: पारिवारिक न्यायालय के तलाक के निर्णय को रद्द किया जाता है. इस जोड़े की विवाह छह जुलाई 1989 को यूपी के शाहजहांपुर में हुई थी. दोनों 2008 से अलग रह रहे थे. पति की याचिका पर 23 सितंबर, 2017 को पारिवारिक न्यायालय ने सभी आधार को क्रूर मानते हुए तलाक दे दिया था.

दूसरे मुद्दे में दिल्ली हाई कोर्ट ने बोला कि पत्नी द्वारा पति के दोस्तों के सामने उसकी बेइज्जती करना, रात में लड़ाई करके सोने न देना व दहेज के झूठे केस में फंसाने की धमकी देना तलाक का आधार हैं. न्यायालय ने पारिवारिक न्यायालय द्वारा वायुसेना के एक ऑफिसर को उनकी पत्नी से इन आधारों पर तलाक को जायज ठहराया.

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने बोला कि वायुसेना के ऑफिसर से पत्नी रातभर झगड़ा करती है, जिसके कारण वह अच्छा से सो नहीं पाता है. वह प्रातः काल पांच बजे ड्यूटी पर जाता है. इससे न केवल उसका बल्कि अन्य लोगों का ज़िंदगी भी खतरे में पड़ सकता है.