इन मुकदमों में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत

इन मुकदमों में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत

यूपी में कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी बड़ी समाचार आई है। उत्तर प्रदेश में गैर-जमानती अपराधों में फिर से अग्रिम जमानत की व्यवस्था प्रारम्भ कर दी गई है। अब इस प्रदेश में भी गैर-जमानती अपराधों में गिरफ्तारी से पहले मिल अग्रिम जमानत ली जा सकेगी। यह व्यवस्था 6 जून 2019 से सारे प्रदेश में प्रभावी होगी। उत्तर प्रदेश में चार दशक पहले समाप्त की गई थी अग्रिम जमानत प्रक्रिया पिछले वर्ष 30 अगस्त को विधानमंडल में पास हुआ था। 'यूपी दंड संहिता संशोधन विधेयक', गवर्नर के अनुमोदन के बाद राष्ट्रपति भवन भेजा गया था।राष्ट्रपति की अनुमति के बाद उत्तर प्रदेश में अग्रिम जमानत के नियम लागू हो गए हैं।

ये होंगी शर्तें-:
- अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान अभियुक्त का मौजूद रहना महत्वपूर्ण नहीं।

- जिस दौरान पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा अभियुक्त को पुलिस ऑफिसर या विवेचक के समक्ष मौजूद होना पड़ेगा।

-आवेदक मुद्दे से जुड़े गवाहों और अन्य व्यक्तियों को धमका नहीं सकेंगे, न ही किसी तरह का आश्वासन दे सकेंगे।

- SC/ST एक्ट में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत।

अग्रिम जमानत की व्यवस्था एससीएसटी एक्ट समेत कई गंभीर क्राइम के मामलों में लागू नहीं होगी। आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों (अनलॉफुल एक्टिविटी एक्ट 1967), आफिशियल एक्ट, नारकोटिक्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और सज़ा-ए-मौत से जुड़े मुकदमों में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी।

30 दिन में करना होगा निस्तारण
विधेयक के तहत अग्रिम जमानत के लिए जो भी आवेदन आएंगे उनका आने की तिथि से 30 दिन के अंदर निस्तारण करना होगा। न्यायालय को अंतिम सुनवाई से सात दिन पहले लोक अभियोजक को नोटिस भेजना भी जरूरी होगा। अग्रिम जमानत से जुड़े मामलों में न्यायालय अभियोग की प्रकृति व गंभीरता, आवेदक के इतिहास, उसकी न्याय से भागने की प्रवृत्ति वआवेदक को अपमानित करने के उद्देश्य से लगाए गए आरोप पर विचार कर उसके आधार पर निर्णय ले सकती है।

यहां आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि 1976 में उत्तर प्रदेश में क़ानून में अग्रिम ज़मानत की व्यवस्था ख़त्म कर दी गई थी, जिससे हर मुद्दे में आरोपी को गिरफ़्तारी के बाद या फिर न्यायालय में आत्म समर्पण के बाद ही ज़मानत की अर्ज़ी लगाने का अधिकार था, फ़रार रहते हुए ज़मानत नहीं मिल पाती थी।