उदयपुर में गायों की जान बचाने के लिए लोगो ने चलाई ये मुहीम

उदयपुर में  गायों की जान बचाने के लिए लोगो ने चलाई ये मुहीम

उदयपुर के प्रतापगढ़ में पॉलिथीन का प्रयोग करने वाले लोगों को गौ रक्षक अब गौ कातिल कह कर बुला रहे हैं। यहां पॉलिथीन के प्रयोग से गायों की जान पर बन आई है।

हर वह शख्स जो पॉलिथीन कार्य में ले रहा है, वह परोक्ष-अपरोक्ष रूप में गौ मर्डर के पाप का भागीदार बन रहा है। पॉलिथीन का उपयोग कर लोग परोक्ष रूप से गौ हत्यारे बन रहे हैं . गौ रक्षकों ने उठाए सवाल है कि लोग क्यों गौ-माता को मारने पर तुले हुए हैं? उनका बोलना है कि रोज गायों की मृत्यु पॉलिथीन खाने से हो रही है।

में जिधर नजर दौड़ाएं, घरों के आसपास, गली-मोहल्ले या शहर के बाहर कचरे के ढेर में बड़ी संख्या में पॉलिथीन मिल जाता है। गौ माता अक्सर अपना पेट भरने के लिए खाने के साथ पॉलिथीन भी निगल जाती है। ऐसी गौ माता अक्सर नजर आ जाती है, जिसका पेट फूला हुआ होता है, जैसे वह गर्भवती हो। दरअसल ऐसी गौ माता के पेट में पॉलिथीन भरा होता है।एक अनुमान के अनुसार पिछले दस साल में सैंकड़ों गौ माता पॉलिथीन से दम तोड़ चुकी है।

पॉलिथीन की थैलियों में लोग घर की जूठन या बासी बचाखुचा खाना भर कर फेंकते हैं। कूड़े के ढेर में खाद्य पदार्थ ढूंढते हुए गौ माता थैलियां निगल जाती हैं। इस तरह बहुत ज्यादामात्रा में पॉलिथीन उनके पेट में चला जाता है। बाद में ये गौ माता बीमार होकर दम तोड़ देती है। शादीब्याह में होने वाले भोज में अक्सर जूठन के ढेर में गौ माता के झुंड के झुंड पहुंच जाती हैं व खाने के साथ पॉलिथीन भी उनके पेट में चला जाता है। अंतत: उनकी मृत्यु हो जाती है।

जिला प्रशासन द्वारा गठित पशु क्रूरता समाधान समिति के सचिव रमेश शर्मा ने बोला कि पॉलिथीन का प्रयोग करने वाले परोक्ष रूप से गौ मर्डर में सहयोग दे रहे हैं। गौरक्षकों ने पॉलिथीन से पीड़ित कुछ गायों का ऑपरेशन करवाया है। हर गौ माता के पेट से कई किलो पॉलिथीन निकली। लेकिन ऑपरेशन के बाद भी गौ माता बच नहीं पाती है।

जिले में गौरक्षकों ने गौरक्षा के लिए कई अनुकरणीय कोशिश किए हैं। सूचना मिलते ही गौ रक्षक आधी रात को गौवंश को कत्लखाने जाने से रोकने के लिए अपनी जान पर खेल जाते हैं। लेकिन गौरक्षकों का ध्यान अभी उन लोगों की ओर नहीं गया, जो पॉलिथीन से गायों को मृत्यु के मुंह में धकेलने का पाप कर रहे हैं। अब पशु क्रूरता समाधान समिति ने पॉलिथीन के विरूद्ध जंग छेड़ने की बात कही है। गौरक्षकों ने जिला प्रशासन से पॉलिथीन की बिक्री पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

सिर्फ गौ रक्षक ही नहीं अब तो समाज के अन्य लोग भी इस मुहिम में आगे आने लगे हैं। वे भी यही मानते हैं कि जो भी पोलिथिन का उपयोग कर रहा है वह गौ मर्डर में सहयोग दे रहा है।हालांकि पॉलिथीन से पर्यावरण को भी बेदद नुकसान हो रहा है। इसलिए पॉलिथीन से होने वाले प्रदूषण के बचाव के लिए सबको आगे आना होगा व अपने-अपने स्तर पर इससे निपटने के कोशिश करने होंगे। बच्चे, बूढ़े, महिला, पुरुष, धनी या गरीब, शहरवासी या ग्रामीण सबको पॉलीथीन के विरूद्ध युद्ध में शामिल होना होगा। तभी हम यह जंग जीत सकते हैं।