कृत्रिम जीभ बताएगी अल्कोहल में कितनी मिलावट, 99% सटीक नतीजे का दावा

कृत्रिम जीभ बताएगी अल्कोहल में कितनी मिलावट, 99% सटीक नतीजे का दावा

स्कॉटलैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी कृत्रिम जीभ बनाई है, जिसका प्रयोग अल्कोहल में मिश्रण का पता लगाने में किया जाएगा. यह इंसान की जीभ की तरह कार्य करती है इसमें भी कई टेस्ट बड्स हैं जो भिन्न-भिन्न तरह के स्वाद को पहचानने में समर्थ हैं. इसे ग्लासगो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है. शोधकर्ताओं का दावा है कि ब्लैक कॉफी में क्या है ,यहइंसानी जीभ नहीं बता सकती,लेकिनकृत्रिम जीभ इसकी भी जानकारी देने में सक्षम है.

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  1. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसे कृत्रिम जीभ इसलिए बोला गया है कि क्योंकि यह पूरी तरह से मनुष्य की जीभ की तरह है, लेकिन इसे लैब में तैयार किया गया है. यह स्वाद के बारे में ज्यादा व सटीक जानकारी देती है. यह नकली व वास्तविकव्हिस्की में अंतर बताने में समर्थ है. रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, कृत्रिम जीभ की आरंभ एक जाँच करने वाली डिवाइस के तौर पर की गई थी व इस्तेमाल स्कॉच व्हिस्की पर हुआ था.

  2. शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब कृत्रिम जीभ पर प्रकाश डाला जाता है तो इसमें लगी नैनोस्केल मेटल इसे अवशोषित करती हैं व भिन्न-भिन्न तरह की व्हिस्की के बारे में 99%तक सटीक जानकारी देती हैं. यह 12, 15 व 18 वर्ष पुरानी व्हिस्की के बीच अंतर बताने में भी समर्थ हैं.

  3. शोधकर्ता एल्सडेयरक्लार्क का बोलना है- इस जीभ में दो तरह नैनोस्केल मेटल लगाए गए हैं जो टेस्टबड्स की तरह कार्यकरते हैं. ये सोने व एल्युमिनियम से तैयार किए गए हैं. नैनोस्केल मेटल इंसान की टेस्टबड्स से 500 गुना ज्यादा छोटे हैं,जो स्वाद की तेज व सटीक जानकारी देते हैं.

  4. क्लार्क के मुताबिक- हमने इसकी जाँच के लिए व्हिस्की का प्रयोग किया ताकि भविष्य में इसका प्रयोग खाने-पीने की चीजों की जाँच करने व क्वालिटी कंट्रोल में किया जा सकेगा. इसके साथ खाने को दाेबारा प्रयोग करने पर भी इसकी जाँचकृत्रिम जीभ से की जा सकेगी.