2059 तक हिंदुस्तान की आबादी चाइना से अधिक होगी, हिंदुस्तान की आबादी 1.65 बिलियन हो जाएगी

2059 तक हिंदुस्तान की आबादी चाइना से अधिक होगी, हिंदुस्तान की आबादी 1.65 बिलियन हो जाएगी

भारत की बढ़ती आबादी का आलम यही रहा तो 2059 तक देश की आबादी बढ़कर 1.65 बिलियन हो जाएगी. 2059 तक हिंदुस्तान आबादी के मुद्दे में चाइना को पीछे छोड़ देगा. यूएन की ओर से वर्ल्ड पॉप्युलेशन प्रॉस्पेक्ट 2019 रिपोर्ट के अनुसार, आनेवाले दौर में सब-सहारन राष्ट्रों की जनसंख्या तेजी से बढ़ेगी. दूसरी तरफ दुनिया के अन्य हिस्सों में बढ़ती आयु वाली आबादी चिंता का कारण होगी.

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2019 से लेकर 2050 तक दुनिया की आबादी जिस लिहाज से बढ़ेगी उसमें आधे से अधिक की वृद्धि सिर्फ 9 राष्ट्रों के कारण होगी. रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया, इजिप्ट व अमेरिका ये 9 देश हैं जिनका आबादी वृद्धि में आधे से अधिक का सहयोग रहेगा. रिपोर्ट में यह भी बोला गया है कि वैश्विक स्तर पर औसत ज़िंदगी आयु बढ़ी है व प्रजनन क्षमता में गिरावट पंजीकृत की गई है. इन कारणों से दुनिया के सामने उम्रदराज आबादी का संकट भी भविष्य में बढ़ने जा रहा है.

इस तरह से समझें जन्म दर व औसत ज़िंदगी आयु
पिछले कई दशक से लगातार प्रति महिला बच्चों को जन्म देने की क्षमता में गिरावट पंजीकृत की गई है. 1960 से अब तक में इसमें 50% की गिरावट पंजीकृत की गई है.1960 में प्रति महिला 5 बच्चे की प्रजनन क्षमता थी जो अब घटकर 2.5 तक रह गई है. इसी दौरान में प्रति आदमी औसत आयु में बड़ी वृद्धि हुई. 1960 में औसत आयु 52.5 साल था जो अब बढ़कर 72.6 वर्ष हो गए.

जनसंख्या बढ़ने व स्थिर रहने के भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में कई कारण
जनसंख्या में ठहराव या कमी का कारण सिर्फ प्रजनन क्षमता में गिरावट भर नही हैं. अर्थव्यवस्था में सुधार, तकनीकी आधुनिकीकरण व एजुकेशन के स्तर में सुधार के साथ स्त्री व पुरुष दोनों के लिए आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों को अपनाने की सुविधाओं में विस्तार हुआ है. इसके साथ ही प्रवासी संकट भी एक कारण है जिससे विभिन्न राष्ट्रों में जनसंख्या के स्तर में कमी या वृद्धि देखी जा रही है. 2010 से 2020 के बीच कुछ राष्ट्रों की जनसंख्या में वृद्धि पंजीकृत की गई है व इसका कारण बड़ी संख्या में प्रवासियों का आना है. दूसरी तरफ कुछ ऐसे देश हैं जहां लोगों के दूसरे राष्ट्रों में जाकर बसने के कारण जनसंख्या आंकड़ों पर प्रभाव पड़ा है.

कुछ राष्ट्रों के सामने लोगों की कमी का संकट होने कि सम्भावना है
2017 की रिपोर्ट के अनुसार, 2100 तक दुनिया की कुल आबादी बढ़कर 11.2 बिलियन तक हो सकती है, कुछ राष्ट्रों के लिए यह खुशखबरी जरूर है. 2010 में 27 ऐसे देश थे जहां आबादी में 1% तक की गिरावट देखी गई थी. यूएन रिपोर्ट के अनुसार, '2019 से 2050 के बीच ऐसे 27 देश अथवा क्षेत्र हैं जिनकी आबादी 1% की दर से कम हो सकती है. 55 ऐसे देश हैं जहां आबादी में 10% तक की गिरावट पंजीकृत हो सकती है. इस दौरान चाइना की आबादी में बड़ी गिरावट देखी जाएगी व यह करीब 31.4 मिलियन (2.2%) तक की गिरावटपंजीकृत की जा सकेगी.'