हांगाकांग में लाखों लोग सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ कर रहे विरोध प्रदर्शन

हांगाकांग में लाखों लोग सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ कर रहे विरोध प्रदर्शन

हांगाकांग में लाखों लोग सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन विवादास्पद प्रत्यर्पण विधेयक के कारण हो रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि रविवार को हुई मार्च में बीस लाख लोग शामिल हुए हैं। जबकि बीते हफ्ते दस लाख 40 हजार लोग शामिल हुए थे। भयानक उमस भरी गर्मी के बीच प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान 'बुरे कानून को वापस लेने' के नारे लगाए। इस विधेयक को बीते हफ्ते तक पारित किया जाना था। लेकिन लोगों के भारी विरोध को देखते हुए बीजिंग समर्थक हांगकांग की नेता कैरी लाम ने शनिवार को कहा कि चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देने वाला ये विधेयक अब निलंबित रहेगा। उन्हें एक हफ्ते तक चले प्रदर्शन के बाद आखिरकार झुकना पड़ा।

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इस विधेयक को रोकने के लिए लाम पर उनके राजनीतिक सहयोगियों और सलाहकारों का भी दबाव पड़ रहा था। लेकिन लोग अब भी विरोध खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि विधेयक को निलंबित नहीं बल्कि पूरी तरह से खत्म किया जाए।

क्या है ये कानून?

इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है को उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेज दिया जाएगा। हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन के लिए फरवीर में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी और हांगकांग वापस आ गया।

हांगकांग की अगर बात की जाए तो यह चीन का एक स्वायत्त द्वीप है। चीन इसे अपने संप्रभु राज्य का हिस्सा मानता है। वहीं हांगकांग की ताइवान के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जिसके कारण हत्या के मुकदमे के लिए उस व्यक्ति को ताइवान भेजना मुश्किल है।

अगर ये कानून पास हो जाता है तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाएगी, जिनके साथ हांगकांग के समझौते नहीं हैं। जैसे संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकेगा।