एनजीएस के वैज्ञानिकों की टीम ने यहां स्थापित किया मौसम स्टेशन

एनजीएस के वैज्ञानिकों की टीम ने यहां स्थापित किया मौसम स्टेशन

नेशनल जियॉग्रफिक सोसाइटी (एनजीएस) के वैज्ञानिकों की टीम ने यहां मौसम स्टेशन स्थापित किया है। जो पूरी तरह से ऑटोमेटेड है। इसका उद्देश्य पर्वतारोहियों, आम जनता और शोध करने वालों को मौसम की सटीक जानकारी और वहां की परिस्थितियों के बारे में बताना है। सभी मौसम स्टेशन अपने क्षेत्र के तापमान, आद्रता, हवा का दबाव, हवा की गति, और हवा की दिशा आदि की जानकारी देंगे।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे रियल टाइम में मौसम की जानकारी मिलेगी। यहां ग्लेशियर से वैज्ञानिकों ने सैंपल भी लिए हैं, जिनका अगले छह माह तक अध्ययन किया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये विश्लेषण आने वाले समय में जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक निर्णय लेने को प्रभावित कर सकता है।

यहां कठिन परिस्थितियों के कारण हर साल कई मौतें होती हैं और लोगों के रोजगार पर भी संकट बना रहता है। मौसम स्टेशनों की स्थापना से माउंट एवरेस्ट की परिस्थितियों से प्रभावित होने वाले लोगों को फायदा होगा। हैरानी की बात तो ये है कि वैज्ञानिकों की टीम ने मौसम स्टेशन शिखर के पास लगाया है ना कि उसके ऊपर। ऐसा इसलिए क्योंकि टीम के सदस्यों के लिए पर्वतारोहियों के पीछे लाइन में लगकर ऊपर तक जाना किसी जोखिम से कम नहीं था।

मौसम वैज्ञानिक टॉम मैथ्यूज ने एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए लगी लाइन पर निराशा जताई और इसे हर किसी के लिए असुरक्षित बताया है। टीम का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक पॉल मायेवस्की का कहना है कि उन्हें स्थानीय लोगों से इस बारे में पता चला है कि कैसे जलवायु परिवर्तन एवरेस्ट को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बताया कि सैंपल के विश्लेषण से समुद्र तल से 6,500 मीटर ऊपर किसी भी क्षेत्र से दुनिया को पहली बार जलवायु की जानकारी मिलेगी।

मायेवस्की का कहना है, "बेहद कम समय में ही एवरेस्ट के आसपास के गल्शियर काफी छोटे हो गए हैं। अगर आप जलवायु के आंकड़े देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि बीते 20 सालों में यहां ऊंचाई के आधार पर तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है।"