लंबे समय तक डिस्टेंसिंग से परिवारों पर बढ़ सकता है बेवजह दबाव, जाने विशेषज्ञों की बात

 लंबे समय तक डिस्टेंसिंग से परिवारों पर बढ़ सकता है बेवजह दबाव, जाने विशेषज्ञों की बात

ईसाइयों का त्योहार ईस्टर आ रहा है व इसके साथ ही रमजान भी जल्द ही प्रारम्भ होने वाला है। इन त्योहारों पर परिवार वर्ष मिलकर प्रार्थना करते हैं व जश्न मनाते हैं। लेकिन, इस बार कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण त्योहार अलग दिखाई देंगे। विशेषज्ञों का बोलना है कि ज़िंदगी में इस तरह की बाधाएं आने से गुस्सा, अवसाद, घबराहट व दुख में बढ़ोतरी हो सकती है।



अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन के निदेशक चिकित्सक वाइले राइट ने कहा, प्रियजनों को खोने जैसा दुख व कोई नहीं है। लेकिन, अभी हम अनुभवों के नुकसान होने के दुख का भी अनुभव कर रहे हें। अभी लोगों को ऐसा लग सकता है कि अभी उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है। लोगों को आजादी की कमी महसूस हो रही है। अगले कुछ महीनों में देश के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकते हैं।
कई तरह की परेशानियां

मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डाना गारफिन के अनुसार लंबे समय तक सोशल डिस्टेंसिंग से परिवारों पर बेवजह दबाव बढ़ सकता है। घरों में झगड़े होने पर बच्चे प्रताड़ित महसूस कर सकते हैं, लोगों को अकेलापन महसूस होने कि सम्भावना है, जॉब की चिंता सता सकती है, आर्थिक तौर पर निर्बल वर्ग व भी ज्यादा तनाव में है। अगर ये आइसोलेशन ज्यादा लंबा चलता है तो मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद उल्टा असर पड़ सकता है। आवश्यक सेवाओं में उपस्थित कर्मचारियों को ग्लानि, शोक व पीटीएसडी होने कि सम्भावना है।

इससे पार पाना महत्वपूर्ण

गारफिन ने बोला कि अगले कुछ हफ्तों के लिए लोगों को नया रूटीन बनाना पड़ेगा। इसे किसी छुट्टी के रूप में नहीं देखना चाहिए। लोगों के पास नयी रुचियां विकसित करने का भरपूर मौका है। कुछ नयी वस्तु सीखकर तनाव दूर कर सकते हैं। अकेलापन महसूस करने वाले लोगों को सोशल मीडिया का प्रयोग करना चाहिए। हर किसी को ये समझना चाहिए कि हम अपने घरों में अकेले नहीं है व ये कठिन समय स्थायी नहीं है।