रिटायरमेंट के बाद अपनी जिंदगी को इस तरह बनाए मजेदार

रिटायरमेंट के बाद अपनी जिंदगी को इस तरह बनाए मजेदार

 रिटायरमेंट शब्द जेहन में आते ही बढ़ती आयु का ख्याल आने लगता है. रिटायरमेंट के बाद अधिकांश सभी लोग अपना सारा समय घर पर बिताते हैं व हर रोज एक ही तरह की दिनचर्या से ऊबने लगते हैं.

 अधिकांश लोगों को लगता है कि रिटायर होते ही ज़िंदगी नीरस हो जाएगा, ऊब होगी, खाली समय कैसे निकलेगा वगैरह-वगैरह. यदि आप भी ऐसा सोचते हैं तो अब अपनी सोच को बदल डालिए. क्लीनिकल साइकोलॉजिस डाक्टर पूनम सिंह जानें कुछ सुझाव जो सेवानिवृत्ति के बाद के आपके सफर को रोचक व मजेदार बना देंगे.

पहले से योजना बनाएं
रिटायरमेंट के पहले सभी की स्थायी दिनचर्या होती है. समय से उठना, तैयार होना, कार्यालय निकलना. रिटायरमेंट के बाद इसी दिनचर्या को यथावत रखना कठिन होता है. ऐसे में सेवानिवृत्ति के पहले ही दिनचर्या को लेकर योजना बना लेनी चाहिए. इसमें उठने के समय से लेकर चाय पीना, अख़बार पढ़ना, व्यायाम करने का समय तय होना चाहिए. इसके बाद बाकी के दिन क्या कुछ करना चाहते हैं उसकी रूपरेखा भी तय कर लें. रिटायरमेंट के बाद दिन की आरंभ करने में समस्या नहीं होगी.

लक्ष्य निर्धारित कर लें
सेवाकाल के पहले लक्ष्य तय होते हैं, जैसे कि हर दिन कार्य की समय सीमा बनाना, परियोजनाओं को पूरा करना, पदोन्नति प्राप्त करना आदि. रिटायर होने के बाद भी लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, हालांकि वे पहले की तुलना में थोड़े अलग हो सकते हैं. उदाहरण के तौर पर 5 किताब पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें ख़त्म करने का समय तय करें. एक वर्ष में कहां-कहां घूमने जाना चाहते हैं उन जगहों के बारे में विचार करें. इससे आप पहले से ही अपने लक्ष्यों को लेकर मानसिक रूप से तैयार रहेंगे.

दोस्ती बढ़ाएं
दफ़्तर जाने के दौरान लोगों से मिलना-जुलना, दोस्त बनना, उनके साथ दिन के 8-9 घंटे बिताना सामान्य होता है. व हकीकत कहें तो जिन लोगों के साथ कार्य करते हैं उनके साथ की आदत बन जाती हैं. यदि आपके साथी भी आपके साथ ही रिटायर हो रहे हों तो आप सप्ताह में एक बार उनसे मिलने का प्रोग्राम रख सकते हैं. जॉब में व्यस्त रहने के चलते पड़ोसियों से मेलजोल कम ही होता है. ऐसे में उनकेे साथ शाम के वक्तटहलने, एकसाथ फिल्म देखने या प्रातः काल की सैर साथ करने की योजना बना सकते हैं.

नए विकल्प तलाशें
कौन कहता है कि एक जॉब से सेवानिवृत्ति का मतलब घर पर खाली बैठना है. आजकल नयी या कहें कि दूसरी जॉब के कई विकल्प उपस्थित हैं. रिटायरमेंट के बाद कुछ दिनों का अंतराल लेकर अपनी पसंदीदा जॉब तलाश सकते हैं. इससे आपका समय भी अच्छा गुज़रेगा व नए लोगों से मिलने-जुलने के साथ ही कुछ नया सीख सकेंगे. इसके साथ ही अगर समाज सेवा में समय बिताना चाहते हैं तो ये भी अच्छा विकल्प होने कि सम्भावना है. इसके लिए समाजसेवी संस्था से जुड़ सकते हैं.

नए शौकविकसित करें
यदि आप व्यस्त रहना चाहते हैं तो अपनी सामाजिक गतिविधियों को बढ़ा सकते हैं या नए शौक़ विकसित कर सकते हैं. सेवानिवृत्ति का फ़ायदा यह है कि आपके पास इस्तेमाल करने के बहुत सारे मौका होते हैं. हर दिन को नए तरह से बिता सकते हैं. खाना बनाने की नयी तरकीबें जान सकते हैं, पेंटिंग, डांस, संगीत सीख सकते हैं. इनमें निपुण होना महत्वपूर्ण नहीं है बस शौकके लिए सीखना ही काफीहोगा.

कुछ अलग करके देखें
सेवानिवृत्ति के बाद शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया जाता. रोज़ व्यायाम करें, ताकि आयु बढ़ने पर होने वाली समस्याओं से दूर रह सकेंगे. दिमाग़ी एक्सरसाइज़ के सवाल हल करें, बच्चों के साथ खेलें. इससे बच्चों को बड़ों का मार्गदर्शन मिलेगा व बड़ों को बच्चों का उत्साह और ज़िंदादिली. अगर कोई रोग नहीं है तो छह-सात महीनों में एक बार या मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसा कोई रोग है, जो हर चार महीनों में चिकित्सक से परामर्श लेते रहें. वार्षिक जांचें भी करवाएं.