प्यार करने वालों के लिए आज है ये दिन

 प्यार करने वालों के लिए आज है ये दिन

प्रेम शब्द से न चिढ़ो। यह होने कि सम्भावना है कि तुमने जो प्रेम समझा था वह प्रेम ही नहीं था। उससे ही तुम जले बैठे हो। व यह भी मैं जानता हूं कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीने लगता है। तो तुम्हें प्रेम शब्द सुनकर पीड़ा उठ आती होगी, चोट लग जाती होगी। तुम्हारे घाव हरे हो जाते होंगे। फिर से तुम्हें अपनी पुरानी यादें उभर आती होंगी। लेकिन मैं उस प्रेम की बात नहीं कर रहा हूँ।



मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं उस प्रेम का तो तुम्हें अभी पता ही नहीं है। व मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं वह तो कभी असफल होता ही नहीं। व मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं उसमें अगर कोई जल जाए तो निखर कर कुंदन बन जाता है,

प्रेम शब्द से न चिढ़ो। यह होने कि सम्भावना है कि तुमने जो प्रेम समझा था वह प्रेम ही नहीं था। उससे ही तुम जले बैठे हो। व यह भी मैं जानता हूं कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीने लगता है। तो तुम्हें प्रेम शब्द सुनकर पीड़ा उठ आती होगी, चोट लग जाती होगी। तुम्हारे घाव हरे हो जाते होंगे। फिर से तुम्हें अपनी पुरानी यादें उभर आती होंगी। लेकिन मैं उस प्रेम की बात नहीं कर रहा हूँ।



मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं उस प्रेम का तो तुम्हें अभी पता ही नहीं है। व मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं वह तो कभी असफल होता ही नहीं। व मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं उसमें अगर कोई जल जाए तो निखर कर कुंदन बन जाता है, शुद्ध स्वर्ण हो जाता है। मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं उसमें जलकर कोई जलता नहीं व जीवंत हो जाता है। व्यर्थ जल जाता है, सार्थक निखर आता है।

लेकिन मैं तुम्हारी तकलीफ भी समझता हूं। बहुतों की तकलीफ यही है। इसलिए तो प्रेम जैसे प्यारे शब्द, बहुमूल्य शब्द ने अपना अर्थ खो दिया है। जैसे हीरा कीचड़ में गिर गया हो।


स्वभावतः तुमने तो जिसको प्रेम करके जाना था उसमें सिवा दुख के व कुछ भी नहीं पाया, पीड़ा के सिवा कुछ हाथ न लगा। तुमने तो सोचा था कि प्रेम करेंगे तो ज़िंदगी में बसंत आएगा। प्रेम ही पतझड़ लाया। प्रेम न करते तो ही भले थे। प्रेम ने सिर्फ नए-नए नर्क बनाए।

व ऐसा ही नहीं है कि जो प्रेम में हारते हैं उनके लिए ही नर्क व दुख होता है; जो जीतते हैं उनके लिए भी नर्क व दुख होता है। जॉर्ज बर्नाड शॉ ने बोला है- संसार में दो ही दुख हैं, एक तुम जो चाहो वह न मिले व दूसरा तुम जो चाहो वह मिल जाए। व दूसरा दुख मैं कहता हूं कि पहले से बड़ा है। क्योंकि मजनू को लैला न मिले तो भी विचार में तो सोचता ही रहता है कि काश, मिल जाती! काश मिल जाती, तो कैसा सुख होता! तो उड़ता आकाश में, कि करता सवारी बादलों की, चांद-तारों से बातें, खिलता कमल के फूलों की भांति। नहीं मिल पाया इसलिए दुखी हूं। मजनू को मैं कहूंगा, जरा उनसे पूछो जिनको लैला मिल गई है। वे छाती पीट रहे हैं। वे सोच रहे हैं कि मजनू धन्यभागी था; बड़ा सौभाग्यशाली था। कम से कम बेचारा भ्रम में तो रहा। हमारा भ्रम भी टूट गया।
जिनके प्रेम पास हो गए हैं, उनके प्रेम भी असफल हो जाते हैं। इस दुनिया में कोई भी वस्तु

शुद्ध स्वर्ण हो जाता है। मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूं उसमें जलकर कोई जलता नहीं व जीवंत हो जाता है। व्यर्थ जल जाता है, सार्थक निखर आता है।

लेकिन मैं तुम्हारी तकलीफ भी समझता हूं। बहुतों की तकलीफ यही है। इसलिए तो प्रेम जैसे प्यारे शब्द, बहुमूल्य शब्द ने अपना अर्थ खो दिया है। जैसे हीरा कीचड़ में गिर गया हो।





स्वभावतः तुमने तो जिसको प्रेम करके जाना था उसमें सिवा दुख के व कुछ भी नहीं पाया, पीड़ा के सिवा कुछ हाथ न लगा। तुमने तो सोचा था कि प्रेम करेंगे तो ज़िंदगी में बसंत आएगा। प्रेम ही पतझड़ लाया। प्रेम न करते तो ही भले थे। प्रेम ने सिर्फ नए-नए नर्क बनाए।

व ऐसा ही नहीं है कि जो प्रेम में हारते हैं उनके लिए ही नर्क व दुख होता है; जो जीतते हैं उनके लिए भी नर्क व दुख होता है। जॉर्ज बर्नाड शॉ ने बोला है- संसार में दो ही दुख हैं, एक तुम जो चाहो वह न मिले व दूसरा तुम जो चाहो वह मिल जाए। व दूसरा दुख मैं कहता हूं कि पहले से बड़ा है। क्योंकि मजनू को लैला न मिले तो भी विचार में तो सोचता ही रहता है कि काश, मिल जाती! काश मिल जाती, तो कैसा सुख होता! तो उड़ता आकाश में, कि करता सवारी बादलों की, चांद-तारों से बातें, खिलता कमल के फूलों की भांति। नहीं मिल पाया इसलिए दुखी हूं। मजनू को मैं कहूंगा, जरा उनसे पूछो जिनको लैला मिल गई है। वे छाती पीट रहे हैं। वे सोच रहे हैं कि मजनू धन्यभागी था; बड़ा सौभाग्यशाली था। कम से कम बेचारा भ्रम में तो रहा। हमारा भ्रम भी टूट गया।
जिनके प्रेम पास हो गए हैं, उनके प्रेम भी असफल हो जाते हैं। इस दुनिया में कोई भी वस्तु