किस देश ने किया 81% आबादी को वैक्‍सीनेट, जल्‍द बनेगा दुनिया का पहला कंप्‍लीट मास्‍क फ्री नेशन

किस देश ने किया 81% आबादी को वैक्‍सीनेट, जल्‍द बनेगा दुनिया का पहला कंप्‍लीट मास्‍क फ्री नेशन

पूरी दुनिया में कोरोना की रफ्तार में आई कमी की वजह से कुछ देशों ने अब आगे कदम बढ़ा लिया है। पहले अमेरिका ने उन लोगों को मास्‍क लगाने से छूट देने की घोषणा की थी जिन्‍होंने वैक्‍सीन की दोनों खुराक ले ली थीं। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने इसको एतिहासिक पल बताया था। अब इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए इजरायल ने खुद को पूरी तरह से मास्‍क फ्री करने की घोषणा कर दी है। हालांकि ये अगले सप्‍ताह से लागू होगी। 15 जून के बाद इजरायल विश्‍व का पहला देश बन जाएगा जहां पर किसी को भी मास्‍क लगाना अनिवार्य नहीं होगा।

इजरायल के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री युली एडेलस्‍टीन ने इसकी घोषणा की है। आपको बता दें कि इजरायल अपने यहां पर करीब 81 फीसद आबादी को कोरोना वैक्‍सीन की खुराक दे चुका है। इसके बाद पहले उसने इससे संबंधित सभी प्रतिबंधों को हटाया और अब मास्‍क फ्री बनाने की भी घोषणा कर दी है। हालांकि इंडोर सार्वजनिक स्‍थलों पर अभी मास्‍क लगाना अनिवार्य होगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री का कहना है कि देश में कोरोना की स्थिति स्थिर है और आने वाले दिनों में इससे संबंधित सभी नियमों को खत्‍म कर दिया जाएगा। इजरायल उन देशों में शामिल है जहां पर 12-15 वर्ष के आयुवर्ग को भी वैक्‍सीन देने का काम शुरू हो गया है। 


इजरायल में जनवरी 2021 से अब तक कोरोना संक्रमण में काफी कमी आई है। जनवरी में यहां पर हर रोज कोरोना संक्रमण के दस हजार मामले सामने आ रहे थे। वहीं अब इनकी संख्‍या 10 से नीचे है। विशेषज्ञों की राय में कोरोना पर काबू पाने में इजरायल ने एक मिसाल कायम की है। आबादी की बात करें तो ये कई देशों के मुकाबले काफी कम है। यहां की आबादी करीब एक करोड़ है। कोरोना संक्रमण से हुई मौतों की बात करें तो ये 6418 है। लेकिन यहां पर कोरोना की रोकथाम को टेस्टिंग और क्‍वारंटीन को तेज किया गया। इसमें लोगों ने भी सरकार का भरपूर सहयोग किया। मौजूदा समय में यहां पर जबकि सक्रिय मरीजों की संख्‍या 200 से भी कम है।


इजरायल ने ये मुकाम हासिल करने के लिए छोटे-छोटे कई लक्ष्‍य निर्धारित किए थे। जैसे इजरायल ने लोगों की जांच के लिए कई टेस्टिंग सेंटर बनाए। ऐसा भी देखा गया कि लोगों ने खुद अपनी जांच करवाने को प्राथमिकता दी। संक्रमण की रफ्तार पर काबू पाने के लिए क्‍वारंटीन सेंटर में कई तरह की सुविधाएं मुहैया करवाई गई। इजरायल ने इस पूरे अभियान को युद्धस्‍तर पर चलाया। वैक्‍सीनेशन की बात करें तो इजरायल ने दिसंबर 2020 में इसकी शुरुआत की थी। इजरायल में सबसे तेजी से लोगों को वैक्‍सीनेट किया गया। इसके लिए फाइजर की वैक्‍सीन का इस्‍तेमाल किया गया। इजरायल की 50 फीसद आबादी ने वैक्‍सीन की दोनों खुराक ली है।


धरती पर हैं चार नहीं, पांच महासागर? अंटार्कटिका के पास है कुछ सबसे अनोखा

धरती पर हैं चार नहीं, पांच महासागर? अंटार्कटिका के पास है कुछ सबसे अनोखा

हमारी धरती का 75 परसेंट भाग पानी में डूबा हुआ है. सात महाद्वीपों के साथ चार महासागर जीवन का आधार हैं. हालांकि, नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार महासागर चार नहीं बल्कि पांच हैं. इसके अनुसार अंटार्कटिका के पास दक्षिणी महासागर भी अपने आप में एक अलग महासागर है और उसे आर्कटिक, अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागर के साथ स्थान मिलनी चाहिए. नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी जियोग्राफर अलेक्स टेट के अनुसार वैज्ञानिक तो अंटार्कटिक दक्षिणी महासागर को अलग मानते रहे हैं लेकिन कभी अंतर्राष्ट्रीय सहमति नहीं बन पाई जबकि दुनिया का यह भाग बहुत खास है. (UK Ministry of Defence/REUTERS)

Southern Ocean of Antarctica: अंटार्कटिका के पास पानी का करंट इतना अलग है कि National Geographic ने इसे अलग महासागर मान लिया है.



हमारी धरती का 75 परसेंट भाग पानी में डूबा हुआ है. सात महाद्वीपों के साथ चार महासागर जीवन का आधार हैं. हालांकि, नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार महासागर चार नहीं बल्कि पांच हैं. इसके अनुसार अंटार्कटिका के पास दक्षिणी महासागर भी अपने आप में एक अलग महासागर है और उसे आर्कटिक, अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागर के साथ स्थान मिलनी चाहिए. नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी जियोग्राफर अलेक्स टेट के अनुसार वैज्ञानिक तो अंटार्कटिक दक्षिणी महासागर को अलग मानते रहे हैं लेकिन कभी अंतर्राष्ट्रीय सहमति नहीं बन पाई जबकि दुनिया का यह भाग बहुत खास है. (UK Ministry of Defence/REUTERS)



अब तक कहां छिपा था?

नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार यह महासागर अंटार्कटिका के तट से 60 डिग्री दक्षिण की ओर है और दूसरे राष्ट्रों से किसी महाद्वीप नहीं बल्कि अपने करंट की वजह से अलग होता है. इसके अंदर आने वाले क्षेत्र अमेरिका से दोगुना है. सोसायटी आमतौर पर इंटरनैशनल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन के नामों को मानती है जिसने 1937 की गाइडलाइन्स में दक्षिणी महासागर को अलग माना था लेकिन 1953 में इसे बाहर कर दिया. इसके बावजूद अमेरिका के जियोग्राफिक नेम्स बोर्ड ने 1999 से दक्षिणी महासागर नाम का इस्तेमाल किया है. फरवरी में National Oceanic and Atmospheric Administration ने इसे मान लिया. (फोटो: British Antarctic Survey Reuters)



खतरों से घिरा

यह कदम कई अर्थ में खास है. नैशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर एनरिक साला ने बताया है कि दक्षिणी महासगर में बहुत अनोखे और गम्भीर जलीय ईकोसिस्टम पाए जाते हैं जहां वेल, पेंग्विन्स और सील्स जैसे जीव रहते हैं. ऐसी हजारों प्रजातियां हैं जो केवल यहीं रहती हैं, और कहीं नहीं पाई जातीं. इस क्षेत्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है. ऐसे में संरक्षण की आवश्यकता के चलते भी इसे अलग से मान्यता देना अहम हो जाता है. इसके अतिरिक्त जलवायु बदलाव का प्रभाव भी पड़ रहा है. पिछले महीने दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड अंटार्कटिका से अलग हो गया. फरवरी में भी एक विशाल हिमखंड टूट गया था. (Reuters)



कब बना था?

एक खास अंटार्कटिक सर्कमपोलर करंट भारी मात्रा में पानी ट्रांसपोर्ट करता है और पूरे विश्व में ऐसे सर्कुलेशन सिस्टम को चलाता है जो धरती पर गर्मी ट्रांसपोर्ट करता है. नैशनल जियोग्राफिक 1915 से मैप तैयार कर रहा है और इसके करंट के आधार पर कार्टोग्राफर्स ने यह निर्णय किया है. वर्ल्ड वाइड फंड के अनुसार यह महासागर सबसे हाल में बना महासागर हुआ. यह 3 करोड़ वर्ष पहले बना था जब अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका एक-दूसर से अलग हुए थे. टेट का बोलना है कि इस महासागर के बारे में लोगों को अलग से बताया-पढ़ाया नहीं गया तो इसकी जरूरतों, सम्मान और खतरों को समझा नहीं जा सकेगा.