तालिबान के लैंडमाइन्‍स से सहमा अफगानिस्‍तान, सड़कों पर बिछे शव

तालिबान के लैंडमाइन्‍स से सहमा अफगानिस्‍तान, सड़कों पर बिछे शव

अफगानिस्तान में अफगान सेना और तालिबान के बीच संघर्ष जारी है। अफगानिस्‍तान के कई प्रमुख शहरों में तालिबान और अफगान सुरक्षा बलों के बीच जंग जारी है। दक्षिणी अफगानिस्तान के लश्कर गाह अफगान सेना और तालिबान के बीच भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है। इस जंग की वजह से शहर के हजारों लोग घरों में फंस चुके हैं, जबकि सकैड़ों स्‍थानीय नागरिक पलायन कर गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालिबान हमारे ऊपर दया नहीं करेगा और सरकार बमबारी जारी रखेगी। ने बताया कि यहां के हालात बद से बदतर हो चुके हैं।

लश्कर गाह में कम से कम 40 नागरिक मारे गए

संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि पिछले एक दिन में लश्कर गाह में कम से कम 40 नागरिक मारे गए हैं। लश्कर गाह के एक स्‍थानीय नागरिक ने कहा कि सड़कों पर शव पड़े हुए हैं। उसने बताया कि हमें नहीं मालूम है कि ये नागरिकों की लाशें या फिर तालिबान की। उक्‍त नागरिक के अनुसार कई दर्जन परिवार अपनी जान बचाकर कहीं पलायन कर गए हैं। उसने बताया कि कई परिवार हेलमंद नदी के किनारे ठेरा डाले हुए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने सड़कों पर शव पड़े हुए देखे हैं। तालिबान हेलमंद प्रांत की राजधानी पर अपना प्रभुत्‍व कायम करना चाहते हैं। यह इलाका उनके लिए काफी महत्व का है। बता दें कि हेलमंद अमेरिकी और ब्रिटिश सेना के अभियान का केंद्र था।

अफगान की वायु सेना के हमले में यहां पर 77 तालिबानी आतंकी मारे गए

अफगानिस्‍तान के हेलमंड प्रांत में अफगान सेना और तालिबान के बीच कब्‍जे को लेकर जबरदस्‍त जंग छिड़ी हुई है। बीते दिनों के दौरान अफगानिस्‍तान की वायु सेना के हमले में यहां पर 77 तालिबानी आतंकी मारे गए हैं। इसमें तालिबान के मिलिट्री कमीशन के तीन हैड भी शामिल है। अफगानिस्‍तान के उप रक्षा मंत्री के प्रवक्‍ता फवाद अमान ने कहा है कि लश्‍कारगाह में 77 तालिबानी आतंकी, जिसमें तीन मिलिट्री कमीशन के हैड शामिल है मारे गए हैं। इसके अलावा 22 अन्‍य घायल हुए हैं। आपको बता दें कि लश्‍कारगाह हेलमंड प्रांत की राजधानी है। अमान ने बताया है कि पिछले 24 घंटों के दौरान तालिबान के ऊपर अफगान सेना और वायुसेना ने जबरदस्‍त हमले किए हैं।


अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद अब कट्टर इस्लामी कानूनों को लागू किया जाएगा। तालिबान के संस्थापकों में से एक और पूर्व कार्यकाल में इस्लामी कानूनों को कठोर व्याख्या के साथ लागू करने करने वाले एक प्रमुख प्रवर्तक ने कहा कि अफगानिस्तान में फिर से फांसी देने और हाथ काटने जैसी सजाएं देने का दौर लौटेगा। द एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में, मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने अतीत में तालिबान के फांसी देने के तरीके पर दुनिया के ऐतराज को खारिज कर दिया है।

उल्लेखनीय है तालिबान के पिछले कार्यकाल में अक्सर चोरी करने वालों के हाथ काटने जैसी सजाएं स्टेडियम में भीड़ के सामने दी जाती थीं। तुराबी ने दुनिया को अफगानिस्तान के नए शासकों के मामले में हस्तक्षेप करने के खिलाफ चेतावनी दी।तुराबी ने कहा, स्टेडियम में दंड के लिए सभी ने हमारी आलोचना की। लेकिन हमने कभी उनके कानूनों और सजा देने के तरीके के बारे में कुछ नहीं कहा। हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि हमारे कानून क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान के मुताबिक अपने कानून बनाएंगे।


अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से अमेरिका को सताने लगा हमले का डर

फेडरल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआइ)के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने चेतावनी दी कि अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा अमेरिका स्थित चरमपंथियों को अमेरिकी जमीन पर हमले की साजिश रचने के लिए प्रेरित कर सकता है। रे ने मंगलवार को सीनेट होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर कमेटी के समक्ष यह आशंका जाहिर की।दि हिल की रिपोर्ट के मुताबिक, रे ने कहा कि 2020 के मध्य से घरेलू आतंकवाद के मामले आसमान छू रहे हैं। मामले एक हजार से 2700 तक पहुंच गए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। चरमपंथी संगठनों ने कभी भी अमेरिकी जमीन पर हमलों की साजिश रचना बंद नहीं किया है।


इतना ही नहीं, नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक क्रिस्टाइन अबीजेद ने भी कमेटी के समक्ष कहा कि दो दशक पूर्व की तुलना में अमेरिका में आतंकी हमलों की आशंका अधिक बढ़ गई है। अबीजेद ने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट किस प्रकार अपनी ताकत में इजाफा कर सकते हैं और अमेरिका में हमलों की साजिश रच सकते हैं।