बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने बोली यह बात

बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने बोली यह बात

बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने बुधवार (11 दिसंबर, 2019) को बोला कि नागरिकता संशोधन बिल, 2019 से हिंदुस्तान की ऐतिहासिक धर्मनिरपेक्ष छवि निर्बल होगी. उन्होंने अपने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताए जाने के आरोपों का भी खंडन किया. बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल में 31 दिसंबर 2014 तक हिंदुस्तान में बांग्लादेश, अफगानिस्तान व पाक से धार्मिक आधार पर सताए जाने के कारण आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाई समुदाय को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. बिल संसद के दोनों सदनों में पास हो चुका है.

विदेश मंत्री मोमेन ने कहा, ‘ऐतिहासिक रूप से हिंदुस्तान सहिष्णु देश है जो धर्मनिरपेक्षता में भरोसा करता है लेकिन यह छवि निर्बल होगी अगर वे इससे हटेंगे.’ उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान व बांग्लादेश के मित्रवत संबंध हैं व इसे द्विपक्षीय संबंधों का ‘सुनहरा अध्याय’ करार दिया जाता है. इसलिए स्वभाविक है कि हमारे लोग (बांग्लादेशी) उम्मीद करते हैं कि हिंदुस्तान ऐसा कुछ नहीं करें जिससे उनमें व्यग्रता पैदा हो.’

मोमेन ने गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के सताए जाने के आरोप को झूठ करार दिया व बोला कि ‘जिन्होंने भी उन्हें यह सूचना दी वह ठीक नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘हमारे देश के कई अहम निर्णय विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों द्वारा लिए जाते हैं… हम किसी का भी आकलन उनके धर्म से नहीं करते.’ मोमेन बोला कि अल्पसंख्यक समुदाय का अगुवाई भी उनके दावे की पुष्टि करते हैं. उन्होंने बोला कि बांग्लादेश धार्मिक सौहार्द को कायम रखता है व यह सुनिश्चित करता है कि सभी धर्मों के लोगों को बराबर अधिकार मिलें.

अपने बयान में विदेश मंत्री ने अमित शाह के दावों पर निशाना साधते हुए बोला कि बहुत कम देश ऐसे हैं जहां सांप्रदायिक सौहार्द बांग्लादेश की तरह अच्छा है. अगर अमित शाह कुछ महीने के लिए बांग्लादेश में ठहरते हैं तो वह हमारे देश में सांप्रदायिक सद्भाव समझ सकेंगे.’ बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने गुरुवार को यह भी बोला कि उन्होंने ढाका में अमेरिकी राजदूत अर्ल आर मिलर से बात की व उन्होंने भी नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर चिंता जताई.

इसी बीच संयुक्त देश प्रमुख एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता ने बोला कि महासचिव हिंदुस्तान के नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर टिप्पणी नहीं करेंगे. बहरहाल, उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि सभी सरकारें भेदभाव रहित कानूनों पर चलें.