क्या आप जानते हैं हिटलर का इतिहास

क्या आप जानते हैं हिटलर का इतिहास

Difference between Adolf Hitler and Narendra Modi: राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शुक्रवार को पीएम मोदी (Narendra Modi) को लेकर कई तीखे बयान दिए उन्होंने बोला कि जर्मनी का तानाशाह हिटलर (Adolf Hitler) भी चुनाव जीत जाता था उसके पास पूरे संस्थान थे Paramilitary थी, पूरा का पूरा ढांचा था उन्होंने ये भी बोला कि आज यदि उन्हें भी पूरा का पूरा ढांचा दे दिया जाए तो वो बता सकते हैं कि चुनाव कैसे जीता जाता है राहुल गांधी एक तरह से हिटलर से मोदी की तुलना करते हैं लेकिन क्या उनका ये तर्क ठीक है?

क्या आप जानते हैं हिटलर का इतिहास?

राहुल गांधी ने शायद हिटलर पर अच्छे से Home Work नहीं किया लेकिन हम आपको बताते हैं कि हिटलर (Adolf Hitler) पूर्ण बहुमत से चुनाव जीत कर चांसलर नहीं बना था ये बात सब जानते हैं कि 1914 से 1919 तक चले पहले विश्व युद्ध में जर्मनी की हार हुई थी, जिसके बाद Treaty of Versailles के अनुसार जर्मनी को भारी भरकम रकम चुकानी थी ये रकम उन राष्ट्रों को चुकानी थी, जो पहले विश्व युद्ध में विजयी हुए थे जैसे फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका

ये रकम चुकाने के लिए जर्मनी ने बड़े पैमाने पर अपनी करेंसी छापने का काम प्रारम्भ किया लेकिन इसका हानि ये हुआ कि जर्मनी में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई और लोगों में गवर्नमेंट के विरूद्ध असंतोष बढ़ने लगा साल 1929 में जब अमेरिका में The Great Depression आया यानी ऐतिहासिक मंदी की आरंभ हुई तो इससे पूरी दुनिया प्रभावित हुई इसके चलते जर्मनी में भी बेरोजगारी रेट ऐतिहासिक रूप से बढ़ गई

बहुमत न होने पर भी बन गया चांसलर

इस आर्थिक संकट और लोगों में बढ़ती नाराज़गी के बीच Adolf Hitler की पार्टी काफी लोकप्रिय हुई क्योंकि ये पार्टी तब महंगाई और बेरोज़गारी के मामले को उठा रही थी इसके बाद जब जर्मनी में 1932 में आम चुनाव हुए तो हिटलर की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हालांकि हिटलर के पास तब बहुमत नहीं था जब कोई भी नेता पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाया तो जर्मनी के राष्ट्रपति Paul Von Hindenburg ने हिटलर को राष्ट्र का चांसलर नियुक्त कर दिया इसके कुछ ही समय बाद 27 फरवरी 1933 को जर्मनी की संसद में आग लगने की एक घटना हुई

इस घटना के लिए तब एक डच Communist नेता को दोषी पाया गया और उसे सज़ा-ए-मौत दी गई इसी के बाद पूरे जर्मनी में Communist नेताओं, पार्टियों और Trade Unions पर हिटलर ने कार्रवाई प्रारम्भ कर दी आग लगने की घटना के बाद एक नया इमरजेंसी कानून लाया गया, जिसके अनुसार पुलिस किसी को भी अरैस्ट कर सकती थी अखबारों पर प्रतिबंध लगा दिए और पत्रकारों की भी आवाज दबा दी गई

खुद को सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया

2 अगस्त 1934 को जब जर्मनी के तत्कालीन राष्ट्रपति Paul Von Hindenburg की मौत हुई तो हिटलर ने जर्मनी के दो सबसे बड़े संवैधानिकों पदों का विलय कर दिया एक पद था राष्ट्रपति का और दूसरा पद था चांसलर का इन दोनों को मिला कर हिटलर (Adolf Hitler) ने एक नया पद बनाया, जिसे Fuhrer बोला गया इसका अर्थ होता है सुप्रीम लीडर हिटलर के सुप्रीम लीडर बनते ही उसने एक ऐसा कानून बनवाया, जिसके अनुसार सभी विरोधी पार्टियों को निष्क्रिय कर दिया गया यानी पूरा जर्मनी एक सिंगल पार्टी स्टेट बन गया

इसके बाद हिटलर ने जर्मनी के भिन्न भिन्न प्रांतों की चुनी हुई सभाओं को भंग कर दिया और राष्ट्रीय संसद को सारी शक्तियां दे दी अब आप स्वयं सोचिए कि क्या हिटलर से पीएम मोदी की तुलना करना ठीक है?

भारत में 2 हजार से अधिक सियासी दल

हिटलर के शासन में जर्मनी एक सिंगल पार्टी स्टेट था लेकिन अब जब नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) राष्ट्र के पीएम हैं, तब हिंदुस्तान में 8 राष्ट्रीय पार्टियां है, 54 क्षेत्रीय दल है और 2 हज़ार 796 गैर मान्यता प्राप्त सियासी दल हैं  हिटलर ने जर्मनी के सभी प्रांतों की चुनी हुई सभाओं को भंग कर दिया था जबकि पीएम मोदी के शासन काल में भाजपा एक नहीं बल्कि कई राज्यों में चुनाव हारी है जिसमें राष्ट्र की राजधानी दिल्ली में पार्टी लगातार दो चुनाव हारी है, पंजाब में दो बार पार्टी चुनाव हार चुकी है छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान और झारखंड में भी भाजपा चुनाव कर चुकी है

सोचिए ये कैसी तानाशाही है, जिसमें भाजपा चुनाव हार जाती है यदि राहुल गांधी ठीक हैं तो इस हिसाब से तो भाजपा को कोई चुनाव हारना ही नहीं चाहिए

एक और बात हिटलर बहुमत से जीतकर सत्ता में नहीं आया था बल्कि बहुमत नहीं होने पर वहां के राष्ट्रपति ने विशेष परिस्थितियों में उसे चांसलर नियुक्त किया था जबकि पीएम मोदी एक नहीं बल्कि दो दो बार पूर्ण बहुमत से चुन कर सत्ता में आए हैं

देश को लोकतांत्रिक ढंग से आगे बढ़ा रहे पीएम मोदी

इनमें 2014 का लोक सभा चुनाव उन्होंने तब जीता था, जब राष्ट्र में UPA की गवर्नमेंट थी जिसे गांधी परिवार द्वारा कंट्रोल किया जाता था इसके अतिरिक्त हिटलर ने अपनी तानाशाही साबित करने के लिए राष्ट्रपति की सारी शक्तियां भी अपने हाथ में ले ली थीं लेकिन पीएम मोदी (Narendra Modi) ने लोकतंत्र का सम्मान किया है हाल ही में द्रौपदी मुर्मू हिंदुस्तान की 15वीं राष्ट्रपति नियुक्त हुई हैं और वो राष्ट्र की पहली स्त्री आदिवासी राष्ट्रपति हैं यदि केन्द्र गवर्नमेंट में तानाशाही होती तो क्या ये चुनाव होते तब चुनाव नहीं होते बल्कि वो होता, जो एक समय जर्मनी में हुआ था

हम यहां ये नहीं कह रहे कि हिंदुस्तान के लोकतंत्र में कमियां नहीं है हिंदुस्तान के लोकतंत्र में जरूर कमियां होंगी और उनमें सुधार होना ही चाहिए लेकिन लोकतंत्र में कमियों का मतलब तानाशाही नहीं होता और ये बात कांग्रेस को अब समझनी होगी