चाइना  में फैला जानलेवा कोराना वायरस

चाइना  में फैला जानलेवा कोराना वायरस

वुहान। चाइना (China) में फैले जानलेवा कोराना वायरस (corona virus) का प्रभाव अब दुनियाभर में दिखने लगा है। चाइना से आने वाले सामान पर रोक का प्रभाव दुनियाभर के बाजारों पर पड़ रहा है। कोरोना वायरस की वजह से हिंदुस्तान (India) में भी दवाओं (medicines) की गंभीर संकट पैदा होने कि सम्भावना है। रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुस्तान के पास केवल अप्रैल तक की दवा का ही स्टॉक बचा है।



में किसी भी तरह का इजाफा न हो इसके लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का भी गठन किया है। इस कमेटी में तकनीकी विभागों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। इस कमेटी ने नरेन्द्र मोदी सरकार को जो रिपोर्ट सौंपी है उसके मुताबिक अगले एक महीने में अगर चाइना से दवाओं की सप्लाई नहीं होती है तो देश में गंभीर दशा पैदा हो सकते हैं।

बता दें कि हैं। इन कंपनियों से कच्चे माल के रूप में दवाएं निकलती हैं व दुनियाभर के राष्ट्रों में भेजी जाती हैं। हिंदुस्तान में भी 80 प्रतिशत एपीआई (दवाओं का कच्चा माल) चाइना से आता है। बता दें कि हिंदुस्तान चाइना से करीब 57 तरह के मॉलिक्यूल्स मंगाता है। कोरोना की वजह फैक्ट्रियों पर अभी ताला लग गया है। एपीआई ही नहीं ऑपरेशन थियेटर के 90 प्रतिशत पार्ट्स भी चाइना से आते हैं।

हिंदुस्तान से भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में हर वर्ष 1.3 लाख करोड़ रुपये की दवाओं का निर्यात होता है। (फोटो-प्रतीकात्मक)



क्यों बढ़ गई दवाओं की दिक्कत
हिंदुस्तान में दवाओं की परेशानी बढ़ने का कारण केवल करोनो वायरस ही नहीं है। दरअसल चाइना में जनवरी में छुट्टियां रहती हैं। ऐसे में कच्चा माल चाइना में बहुत कम आता है। इसके बाद से वायरस फैल गया है व तब से चाइना में उत्पादन पूरी तरह से रोक दिया गया है। कोरोना वायरस के कारण पिछले एक महीने से चाइना की ज्यादातर कंपनियों पर ताले लगा दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक जब तक संक्रमण का प्रकोप कम नहीं हो जाता तब तक इन कंपनियों को खोला नहीं जाएगा। इसके बाद भी जब कंपनियां फिर से उत्पादन प्रारम्भ करेंगी तब भी समुद्री रास्ते से हिंदुस्तान तक दवा पहुंचने में कम से कम 20 दिन का समय लगेगा।

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हिंदुस्तान में भी 80 प्रतिशत एपीआई (दवाओं का कच्चा माल) चाइना से आता है। (सांकेतिक तस्वीर)



दूसरे राष्ट्रों में दवा नहीं भेज पाएगा भारत
चाइना में फैले कोरोना वायरस का प्रभाव हिंदुस्तान की दवाओं पर पड़ता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए हिंदुस्तान दवाओं के निर्यात पर रोक लगा सकता है। हिंदुस्तान से भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में हर वर्ष 1.3 लाख करोड़ रुपये की दवाओं का निर्यात होता है। चाइना में इसी तरह के दशा बने रहे तो हिंदुस्तान में एंटीबॉयोटिक्स, एंटी डायबिटिक, स्टेरॉयड, हॉर्मोन्स व विटामिन की दवाओं की कमी हो सकती है।

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