भारत से लौटने वाले अपने नागरिकों से रोक हटा लेगा ऑस्ट्रेलिया

भारत से लौटने वाले अपने नागरिकों से रोक हटा लेगा ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मारिसन ने कहा कि अगले शनिवार से ऑस्ट्रेलिया कोविड से प्रभावित भारत से लौटने वाले अपने नागरिकों से प्रतिबंध हटा लेगा। उसी दिन स्वदेश वापसी वाली पहली फ्लाइट ऑस्ट्रेलियाई शहर डारविन में लैंड करेगी।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इतिहास में पहली बार भारत में 14 दिन या उससे अधिक रहकर लौटे अपने नागरिकों पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया था। ताकि वह ऑस्ट्रेलिया में लैंड न कर सकें। लेकिन अब यह प्रतिबंध अगले शनिवार से हटा लिया जाएगा।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस प्रतिबंध का पालन नहीं करने पर पांच साल की जेल या 66 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (50,899 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस फैसले से ऑस्ट्रेलियाई सांसदों, डॉक्टरों, व्यापारियों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने सख्त एतराज जताया था। उन्होंने भारत में ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को छोड़ने और वापसी पर जुर्माना और जेल की धमकी देने का विरोध किया था।


सरकार का यह आदेश संभवत: 15 मई को खत्म हो रहा है। शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के बाद मोरिसन ने कहा कि इस तारीख को और आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। लिहाजा, अब ऑस्ट्रेलिया 15 से 31 मई के बीच भारत से अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए तीन उड़ानें भेजेगा। पहली फ्लाइट 15 मई को डारविन पहुंचेगी। भारत से सीधे ऑस्ट्रेलिया आने वाली वाणिज्यिक उड़ानों पर अभी भी प्रतिबंध है। मोरिसन ने कहा कि फिलहाल उन्हीं ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को वापस लाया जाएगा जो भारत में उच्चायोग और काउंसलर आफिस में अपना पंजीकरण करा चुके हैं।


धरती पर हैं चार नहीं, पांच महासागर? अंटार्कटिका के पास है कुछ सबसे अनोखा

धरती पर हैं चार नहीं, पांच महासागर? अंटार्कटिका के पास है कुछ सबसे अनोखा

हमारी धरती का 75 परसेंट भाग पानी में डूबा हुआ है. सात महाद्वीपों के साथ चार महासागर जीवन का आधार हैं. हालांकि, नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार महासागर चार नहीं बल्कि पांच हैं. इसके अनुसार अंटार्कटिका के पास दक्षिणी महासागर भी अपने आप में एक अलग महासागर है और उसे आर्कटिक, अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागर के साथ स्थान मिलनी चाहिए. नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी जियोग्राफर अलेक्स टेट के अनुसार वैज्ञानिक तो अंटार्कटिक दक्षिणी महासागर को अलग मानते रहे हैं लेकिन कभी अंतर्राष्ट्रीय सहमति नहीं बन पाई जबकि दुनिया का यह भाग बहुत खास है. (UK Ministry of Defence/REUTERS)

Southern Ocean of Antarctica: अंटार्कटिका के पास पानी का करंट इतना अलग है कि National Geographic ने इसे अलग महासागर मान लिया है.



हमारी धरती का 75 परसेंट भाग पानी में डूबा हुआ है. सात महाद्वीपों के साथ चार महासागर जीवन का आधार हैं. हालांकि, नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार महासागर चार नहीं बल्कि पांच हैं. इसके अनुसार अंटार्कटिका के पास दक्षिणी महासागर भी अपने आप में एक अलग महासागर है और उसे आर्कटिक, अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागर के साथ स्थान मिलनी चाहिए. नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी जियोग्राफर अलेक्स टेट के अनुसार वैज्ञानिक तो अंटार्कटिक दक्षिणी महासागर को अलग मानते रहे हैं लेकिन कभी अंतर्राष्ट्रीय सहमति नहीं बन पाई जबकि दुनिया का यह भाग बहुत खास है. (UK Ministry of Defence/REUTERS)



अब तक कहां छिपा था?

नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार यह महासागर अंटार्कटिका के तट से 60 डिग्री दक्षिण की ओर है और दूसरे राष्ट्रों से किसी महाद्वीप नहीं बल्कि अपने करंट की वजह से अलग होता है. इसके अंदर आने वाले क्षेत्र अमेरिका से दोगुना है. सोसायटी आमतौर पर इंटरनैशनल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन के नामों को मानती है जिसने 1937 की गाइडलाइन्स में दक्षिणी महासागर को अलग माना था लेकिन 1953 में इसे बाहर कर दिया. इसके बावजूद अमेरिका के जियोग्राफिक नेम्स बोर्ड ने 1999 से दक्षिणी महासागर नाम का इस्तेमाल किया है. फरवरी में National Oceanic and Atmospheric Administration ने इसे मान लिया. (फोटो: British Antarctic Survey Reuters)



खतरों से घिरा

यह कदम कई अर्थ में खास है. नैशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर एनरिक साला ने बताया है कि दक्षिणी महासगर में बहुत अनोखे और गम्भीर जलीय ईकोसिस्टम पाए जाते हैं जहां वेल, पेंग्विन्स और सील्स जैसे जीव रहते हैं. ऐसी हजारों प्रजातियां हैं जो केवल यहीं रहती हैं, और कहीं नहीं पाई जातीं. इस क्षेत्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है. ऐसे में संरक्षण की आवश्यकता के चलते भी इसे अलग से मान्यता देना अहम हो जाता है. इसके अतिरिक्त जलवायु बदलाव का प्रभाव भी पड़ रहा है. पिछले महीने दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड अंटार्कटिका से अलग हो गया. फरवरी में भी एक विशाल हिमखंड टूट गया था. (Reuters)



कब बना था?

एक खास अंटार्कटिक सर्कमपोलर करंट भारी मात्रा में पानी ट्रांसपोर्ट करता है और पूरे विश्व में ऐसे सर्कुलेशन सिस्टम को चलाता है जो धरती पर गर्मी ट्रांसपोर्ट करता है. नैशनल जियोग्राफिक 1915 से मैप तैयार कर रहा है और इसके करंट के आधार पर कार्टोग्राफर्स ने यह निर्णय किया है. वर्ल्ड वाइड फंड के अनुसार यह महासागर सबसे हाल में बना महासागर हुआ. यह 3 करोड़ वर्ष पहले बना था जब अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका एक-दूसर से अलग हुए थे. टेट का बोलना है कि इस महासागर के बारे में लोगों को अलग से बताया-पढ़ाया नहीं गया तो इसकी जरूरतों, सम्मान और खतरों को समझा नहीं जा सकेगा.