सिनेमा में फिल्म देखना किसी हल्के-फुल्के व्यायाम की तरह होता है लाभकारी, जाने कैसे

 सिनेमा में फिल्म देखना किसी हल्के-फुल्के व्यायाम की तरह होता है लाभकारी, जाने कैसे

आरामदायक सीट पर पॉपकॉर्न खाते हुए सिनेमा देखना किसे पसंद नहीं भला? थिएटर में बैठकर फिल्म देखना केवल आनंद ही नहीं देता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. हाल ही के अध्ययन में दावा किया गया है कि सिनेमा में फिल्म देखना किसी हल्के-फुल्के व्यायाम की तरह लाभकारी है. शोधकर्ताओं ने सिनेमा देखने को ‘लाइट वर्कआउट’ यानी हल्का-फुल्का व्यायाम माना है. उन्होंने पाया कि सिनेमा में लगभग 45 मिनट तक रोशनी कार्डियो के दौरान दिल गति बढ़ जाती है.


शोधकर्ताओं के अनुसार, शरीर रिएक्शन करता है व उत्तेजित होता है क्योंकि मस्तिष्क फिल्म में डूब जाता है व लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने से दिमाग को लाभ होता है. घर पर फिल्म देखते समय स्मार्टफोन, टैबलेट व टेलीविजन जैसे मल्टीप्लस डिवाइसेज यानी तरह-तरह के उपकरणों के बजाय सिनेमा जाकर फिल्म देखने से एक ही वस्तु पर ध्यान केंद्रित होता है जिससे एकाग्रता व याद्दाश्त बढ़ती है.

2019 में फिल्म ‘अलादीन’ के लाइव-एक्शन रीमेक को देखने वाले 51 लोगों के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दर्शकों की दिल गति व स्कीन की प्रतिक्रियाओं को ट्रैक करने के लिए सेंसर का प्रयोग किया. शोध यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन द्वारा किया गया था व वेव सिनेमा ने इसका खर्च उठाया था. सिनेमा देखने वालों की तुलना 26 लोगों के समूह के साथ की गई जिन्होंने एक ही समय किताब पढ़ने में बिताया.
अध्ययन में पाया गया कि सिनेमा में लोगों ने 'हेल्दी हार्ट जोन' (ऐसा जगह जहां हार्ट स्वस्थ्य रहता है) में लगभग 45 मिनट बिताए व उनके दिल की धड़कन 40 से 80 फीसदी के बीच रही. औसतन 30 वर्ष के आदमी के लिए यह प्रति मिनट 95 व 160 बीट्स (धड़कन) के बीच होने कि सम्भावना है. एक सामान्य दिल की दर 60 व 100 बीट्स प्रति मिनट के बीच है.

उसी असर को हल्के दिल व्यायाम से हासिल किया जा सकता है- जैसे तेज चलना या बागवानी के जरिए. अध्ययन में बोला गया है कि फिल्म देखने वाले लोगों का दिल भी एक-दूसरे में तालमेल बैठाता है व एकजुट होता है, जो एकजुटता की भावना पैदा कर सकता है.

शारीरिक रूप से लाभ मिलने के साथ हम फिल्म की कहानी को समझने की प्रयास करते हैं. यह एक तरह की दिमागी एक्सरसाइज़ है, जो प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स (कोई भी समस्या या सवाल हल करने की दिमाग की क्षमता) मस्तिष्क के लिए एक अच्छी एक्सरसाइज़ है.

यूसीएल में न्यूरोसाइंस प्रोफेसर डाक्टर जोसेफ डिवालिन का बोलना है कि ध्यान बनाए रखने की क्षमता आदमी को मानसिक रूप से लचीला बनने में जरूरी किरदार निभाती है, क्योंकि प्रॉब्लम सॉल्विंग में बाधाओं को दूर करने के लिए ध्यान लगाने की प्रयास करने की जरूरत होती है. बिना ध्यान भटकाए कार्य करने की क्षमता समस्याओं को हल करने में बेहतर बनाती है व इंसान अधिक कार्य करता है. ऐसी संसार में जहां उपकरणों से दूर होना कठिन है, इस स्तर का निरंतर ध्यान अच्छा है.