नयी खोज डायबिटीज रोगियों के लिए ले कर आई है अच्छी खबर 

नयी खोज डायबिटीज रोगियों के लिए ले कर आई है अच्छी खबर 

दुनियाभर में करोड़ों लोग डायबिटीज यानि मधुमेह की बीमारी का शिकार हैं. व सबसे चिंताजनक बात ये है कि इससे बुर्जुग ही नहीं, किशोर व बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक नयी खोज डायबिटीज रोगियों के लिए अच्छी खबर ले कर आई है. 

एक अध्‍ययन में शोधकर्ताओं ने ग्लाइको-इंसुलिन ( Glycoinsulin ) नामक एक इंसुलिन एनालॉग को संश्लेषित किया व यह दिखाया कि प्रीक्लिनिकल अध्ययनों में यह ब्‍लड शुगर के स्तर को भी कम कर सकता है.

जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ग्लाइको-इंसुलिन फाइब्रिल के निर्माण के बिना इंसुलिन जैसे असर प्राप्त कर सकता है, जो तब उत्पन्न होते हैं जब इंसुलिन कंपाउंड एक साथ इकट्ठे होते हैं.

वैज्ञानिकों ने बोला कि इंसुलिन नियंत्रित करने के लिए पंप इन्फ्यूजन का इस्तेवाल करने वाले डायबिटीज रोगियाें में फाइब्रिल एग्रीगेट्स दवा की डिलीवरी को रोक कर गंभीर जोखिम पैदा करते हैं, जिससे ज़िंदगी की आसार कम हो जाती है.

अध्ययन के सह-लेखक अख्तर हुसैन, फ्लोरी इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस एंड मेंटल हेल्थ ने बोला कि हमारे से शोध इस बात का पता चला है कि ग्लाइको-इंसुलिन फाइब्रिल का निर्माण ही नहीं करता है, बल्कि यह उच्च तापमान व एकाग्रता पर भी फाइब्रिल नहीं बनाता. इंसुलिन पंपों में उपयोग के लिए ग्लाइको-इंसुलिन एक उत्कृष्ट व बेहतर विकल्प है व यह ज़िंदगी को बेहतर बना सकता है.

उन्‍होंने बोला कि अब हम ग्लाइकोजिन के लिए निर्माण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की उम्मीद करते हैं ताकि इस यौगिक की आगे बड़े, नैदानिक अध्ययनों में जाँच की जा सके. शोधकर्ताओं ने कहा, फाइब्रिल को कम करने के लिए इंसुलिन पंप इफ्यूजन सेट को हर 24 घंटे से 72 घंटे में बदलने की जरूरत हाेती है.

अध्‍ययन के सह-लेखक जॉन वेड फॉर फ्लोरी इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस एंड मेंटल हेल्थ ने बोला कि आमतौर पर, इंसुलिन का रासायनिक संशोधन संरचनात्मक अस्थिरता व निष्क्रियता का कारण बनता है, लेकिन हम ग्लाइको-इंसुलिन को सफलतापूर्वक एक ऐसे ढंग से संश्लेषित करने में सक्षम थे, जो इसकी इंसुलिन जैसी पेचदार संरचना को बनाए रखता है.