गर्भवती स्त्रियों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल के लिए राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर उठाए गए यह बड़े कदम

गर्भवती स्त्रियों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल के लिए राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर उठाए गए यह बड़े कदम

गर्भवती स्त्रियों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल व प्रसव सम्बंधी जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष 11 अप्रैल को कस्तूरबा गांधी की जयंती पर राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है. यह दिवस मनाने वाला हिंदुस्तान संसार का पहला देश है. 

आज जब पूरी संसार कोविड-19 से जूझ रही है, तब यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि गर्भवती स्त्रियों व नवजातों को इस वायरस से हर हाल में बचाया जाए. सभी जिला अस्पतालों में सुरक्षा बंदोवस्त बढ़ा दिए गए हैं. अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है ताकि किसी प्रकार की चूक न हो. 

एसएनसीयू में पुरुषों के जाने पर रोक

अस्पतालों के एसएनसीयू वॉर्ड में भर्ती नवजात निमोनिया, पीलिया, श्वास सम्बंधी बीमारियों व कुपोषण के शिकार हैं. इसलिए उनका ज्यादा ख्याल रखा जा रहा है. डफरिन अस्पताल के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डाक्टर सलमान ने बताया कि कोरोना से नवजातों को बचाने के लिए पुख्ता बंदोवस्त किए गए हैं. वॉर्ड में पुरुष अटेंडेंट के जाने पर रोक लगा दी गई है. शिशु के साथ एक महिला तीमारदार अंदर रुक सकती है पर उसे बाहर जाने की इजाजत नहीं हे. महिला के लिए खाने की व्यवस्था अस्पताल ही कर रहा है.

सोशल डिस्टेंसिंग भी जरूरी
प्रसूता विभागों के एमसीएच यूनिट में प्रसूताओं के बीच भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी हो रहा है. यहां एक बेड छोड़कर एक पर प्रसूताओं को दाखिल किया गया है ताकि पर्याप्त दूरी रहे. मरीज के साथ एक ही तीमारदार को रुकने की इजाजत है. स्त्रियों को छुट्टी भी जल्दी दी जा रही है व बाद में उन्हें अगर किसी तरह के उपचार या परामर्श की आवश्यकता हो तो डॉक्टर फोन पर परामर्श दे रहे हैं. लॉकडाउन की अवधि में जिला अस्पतालों में अब तक 437 बच्चों का जन्म हुआ है