थाईलैंड में सामने आया इस अज्ञात वायरस का पहला केस

थाईलैंड में सामने आया इस अज्ञात वायरस का पहला केस

चीन में निमोनिया का नया वायरस सामने आया है. अनुसंधानकर्ताओं का बोलना है कि उन्होंने पहले ऐसा वायरस नहीं देखा है. इससे वुहान शहर में 40 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं व एक शख्स की मृत्यु हो गई है. 

वैज्ञानिकों को संभावना है कि यह वायरस तेजी से दूसरे राष्ट्रों में फैल सकता है. इस बीच, चाइना से बाहर इस अज्ञात वायरस का पहला केस थाईलैंड में सामने आया है. 

वुहान की महिला यहां पर्यटन के लिए आई थी, जिसमें लक्षण नजर आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हालांकि, दुनिया स्वास्थ्य संगठन का बोलना है कि वुहान के सिंगल सी-फूड बाजार के कारण वहां यह वायरस फैला है व इस बात की संभावना कम है कि यह बाकी शहरों में भी फैले. जो मरीज सामने आए हैं, उनमें से अधिकतर इस समुद्री खाद्य मार्केट में कार्य करते थे. यहां तीतर व सांप के साथ ही खरगोश के अंग भी बेचे जाते थे. निमोनिया के मुद्दे सामने आने के बाद से यह मार्केट बंद है.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, अब तक इस वायरस के इंसान से इंसान में फैलने से इशारा नहीं मिले हैं, लेकिन पूरी सावधानी बरती जा रही है. हर संदिग्ध की निगरानी की जा रही है. मरीजों से संपर्क में रह चुके लोगों की लगातार जाँच की जा रही है.
इससे पहले चीनी मीडिया में जारी रिपोर्ट में इस बीमारी के लिए कोरोना वायरस को जिम्मेदार बताया गया था. बता दें, चाइना में वर्ष 2003 में यह सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम (एसएआरएस) फैला था व तब 646 लोगों की मृत्यु हुई थी. पूरी संसार में मरने वालों का आंकड़ा 813 था. एसएआरएस के 14 से 15 फीसद मामलों में मरीज की जान चली जाती है.   

चीन में फैले निमोनिया वायरस के लक्षण
सूखी खांसी के साथ बुखार व थकान
सांस की तकलीफ
लगातार खांसी
 

निमोनिया से बचने के उपाय
चाइना में भले ही निमोनिया का कारण बनने वाला अज्ञात वायरस मिला हो, लेकिन हिंदुस्तान में निमोनिया की बीमारी आम है. हर वर्ष लाखों लोग इसकी चपेट में आते हैं. www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डाक्टर अजय मोहन बताते हैं कि निमोनिया साधारण से लेकर जानलेवा तक होने कि सम्भावना है. यह छोटे बच्चों, बुजुर्गों व निर्बल रक्षा प्रणाली के लोगों को ज्यादा निशाना बनाता है. इसके अन्य लक्षणों में शामिल हैं - बलगम वाली खांसी, भूख कम लगना, ब्लड प्रेशर कम होना, उल्टी या मितली आना, खांसी के साथ खून आना. यदि इनमें से कोई इशारा मिलें तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

इसके बचाव के ढंग उपलब्ध हैं. सबसे अच्छा है टीकाकरण. इसके अतिरिक्त साफ-सफाई रखने व धूम्रपान समेत सभी तरह के नशे से दूर रहने की सलाह दी जाती है. बीमारियों से लड़ने की क्षमता पैदा करने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन महत्वपूर्ण है. अपने खानपान पर ध्यान दें. फेफड़ों को लाभ पहुंचने वाले योगासन व प्राणायाम करें. चिकित्सक एंटीबयोटिक्स के साथ ही खांसी व बुखार की दवा देकर इसका उपचार करते हैं. जिन लोगों को बार-बार निमोनिया होता है, उन्हें मीठे व ठंडे पदार्थों से दूर रहना चाहिए.