शोध में हुआ खुलासा, हड्डियों के दर्द में संजीवनी है हल्दी

शोध में हुआ खुलासा, हड्डियों के दर्द में संजीवनी है हल्दी

नयी दिल्ली: आज-कल की लाइफस्‍टाइल (Lifestyle) व खान-पान में गड़बड़ी के चलते जवां लोग, खासतौर पर महिलाएं बहुत परेशान रहती हैं। जोड़ों का दर्द बहुत तकलीफदेह होता है। अक्‍सर लोग इस दर्द से बचने के लिए पेनकिलर (Pain Killer) का सहारा लेते हैं, लेकिन ज्‍यादा पेनकिलर लेने से भविष्‍य में आपकी किडनी (Kidney) व लिवर (Liver) पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

अगर आपकी डाइट (Diet) में हल्‍दी (Turmeric) शामिल नहीं है तो आज से इसे लेना प्रारम्भ कर दें। न केवल हल्‍दी अद्भुत स्‍वाद देती है बल्कि बॉडी (Body) के लिए सबसे अच्‍छे फूड्स में से एक है व आपकी हेल्‍थ को कई तरह के हेल्‍थ बेनिफिट्स (Health Benefits) देती है। ऑस्ट्रेलिया स्थित तसमानिया यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन (Study) में हल्दी को ऑस्टियोआर्थराइटिस का रामबाण उपचार करार दिया गया है। इसमें उपस्थित ‘करक्युमिन’ दर्द के एहसास में कमी लाने में बेहद अच्छा साबित होने कि सम्भावना है।

शोधकर्तओं के मुताबिक हल्दी ‘करक्युला लोंगा’ नामक पौधे की सूखी जड़ को पीसकर तैयार की जाती है। इसमें पाया जाने वाला ‘करक्युमिन’  नाम का पॉलीफेनॉल अपने संक्रमण व सूजन रोधी गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यही वजह है कि जो लोग नियमित रूप से हल्दी का सेवन करते हैं, उन्हें न सिर्फ जोड़ों में सूजन की शिकायत से निजात मिलती है, बल्कि दर्द का एहसास जगाने वाले सिग्नल भी ब्लॉक होते हैं।

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहे 70 मरीजों को दो समूह में बांटा। पहले समूह में शामिल प्रतिभागियों को प्रतिदिन हल्दी से तैयार दो कैप्सूल का सेवन करवाया। वहीं, दूसरे समूह को दर्दनिवारक दवा बताकर साधारण मीठी गोली खिलाई। 12 सप्ताह बाद पहले समूह के प्रतिभागियों ने दूसरे समूह के मुकाबले जोड़ों के दर्द में कहीं ज्यादा राहत मिलने की बात कही। उन्होंने पेनकिलर की खुराक घटाने की भी जानकारी दी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार के लिए वैसे पेनकिनर के अतिरिक्त कोई व असरदार दवा नहीं है। ऐसे में चिकित्सक हल्दी को एक बेहतरीन साइडइफेक्ट रहित इलाज के रूप में सुझा सकते हैं। प्रतिभागियों के जोड़ों के स्कैन से पता चलता है कि हल्दी उनकी संरचना में कोई परिवर्तन नहीं लाती, पर सूजन घटाकर पेन सिग्नल को जरूर बाधित कर देती है, जिससे दर्द के एहसास में कमी आती है। अध्ययन के नतीजे ‘एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिकल जर्नल’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।