जानिए क्या हैं कोविड-19 से संक्रमित होने की पांच मिथक व सच्चाई

जानिए क्या हैं कोविड-19 से संक्रमित होने की पांच मिथक व सच्चाई

कोरोना वायरस ने पूरी दिया को अपनी चपेट में ले लिया है. हिंदुस्तान में भी यह तेजी से अपने पांव पसार रहा है. ऐसे में रोज सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं. इन अफवाहों व भ्रांतियों को दूर करने के लिए दुनिया स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोशिश तेज किया है. आपका अपना अखबार 'हिन्दुस्तान' ने विशेष पहल के जरिए पाठकों तक विश्वसनीय व सटीक जानकारी पहुचाने के लिए प्रयासरत है. जानिए आज के पांच मिथक व उनकी सच्चाई-


1- कोविड-19 संक्रमण जान-बूझकर अमेरिकी या चीनी सेना द्वारा फैलाया गया है. 
हकीकत: चाइना व अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इसे गलत बताया है. वैज्ञानिक अभी भी इस संक्रमण की उत्पत्ति का ठीक स्रोत जानने की प्रयास कर रहे हैं. हालांकि वैज्ञानिकों ने इशारा दिए हैं कि यह वायरस चमगादड़ों में जन्मा है. बाद में किसी अन्य जीव के जरिये इनसानों तक पहुंचा है. अच्छा इसी तरह 2003 में इस वायरस केपविार के एक वायरस की वजह से सार्स संक्रमण फैला था.

2- बच्चों को कोविड-19 संक्रमण नहीं हो सकता. यह वयस्कों को ही अपनी चपेट में लेता है. 
हकीकत: सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, कोविड-19 संक्रमण किसी भी आयु के इनसान को होने कि सम्भावना है. संक्रमण के ज्यादातर मामलों की पुष्टि वयस्कों में हुई है. बच्चे भी इसकी चपेट में आए हैं. हालांकि इससे बुजुर्गों व अस्वस्थ लोगों को ज्यादा खतरा है. इसलिए ऐसा मान कर असावधानी न बरतें कि यह संक्रमण बच्चों को नहीं होता. बच्चों के मुद्दे में पूरा एहतियात बरतें.

3- कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद आदमी बचता नहीं है. 
हकीकत: यह तथ्य एकदम गलत है. कोविड-19 संक्रमण के कुल मामलों में से सिर्फ 4-4.5 प्रतिशत मामलों में ही मौत हुई है. इम्पीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के अनुसार, यह दर 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में दस गुना ज्यादा है. इसके बावजूद, ज्यादातर बुजुर्गों पर बीमारी का असर कम व सामान्य स्तर का रहा है. इससे हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि युवाओं में इस संक्रमण का प्रभाव हल्का है. कोविड-19 संक्रमण के कुछ ऐसे भी मुद्दे आए हैं, जिनमें नौजवानों की मौत भी हुई है.

4- होमियोपैथिक औषधि ‘आर्सेनिक अल्बम 30’ कोविड-19 संक्रमण को समाप्त कर देती है, या इससे बचाव करती है. 
हकीकत: अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक अध्ययन सामने नहीं आया है, जिसमें कोरोना वायरस पर होमियोपैथिक दवा आर्सेनिक अल्बम 30 के प्रभाव को मापने के लिए इनसानों या जानवरों पर इस्तेमाल किए गए हों. इसके अलावा, इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं या कोई भी ऐसा अध्ययन नहीं सामने आया है, जो कोविड-19 के मुद्दे में इस दवा की क्षमता के बारे में बताता है.

5- कोविड-19 संक्रमण से बचने के लिए निमोनिया का टीका लगवाएं. यह टीका कोविड-19 में मददगार है. 
हकीकत: दुनिया स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कोरोना वायरस इतना नया व अलग है कि इससे बचाव के लिए इसका खुद का टीका विकसित करने की आवश्यकता है. निमोकोकल व हेमोफिलस इनफ्लूएंजा टाइप बी वैक्सीन, निमोनिया के उपचार में अच्छा हैं, पर ये कोविड-19 से सुरक्षा नहीं देते. फिर भी हमें सांस संबंधित रोगों से बचाव के लिए टीका जरूर लगवाना चाहिए.