गुर्दा बेकार होने के क्या हो सकते हैं संभावित कारण, जानिए

गुर्दा बेकार होने के क्या हो सकते हैं संभावित कारण, जानिए

बिना चिकित्सक की सलाह के इंजेक्शन और दवा खाने से गुर्दे बेकार हो रहे हैं. इसके सेवन से डायबिटीज व ब्लड प्रेशर वाले मरीजों का गुर्दा बेकार होने की संभावना अधिक होती है.

 यह बोलना है कि पीजीआई के नेफ्रोलॉजिस्ट व सरकार द्वारा संचालित नेशनल डायलसिस कार्यक्रम के मेम्बर डाक्टर नारायण प्रसाद का.

उनका बोलना है कि अमूमन झोलाछाप या मेडिकल स्टोर संचालक बुखार, शरीर दर्द की दवा व इंजेक्शन देते हैं. इसके सेवन से पेशाब कम बनती है. जिसकी वजह से गुर्दा बेकार हो जाता है. पीजीआई की ओपीडी में प्रत्येक हफ्ते करीब 15 मरीज ओपीडी में आते हैं. जिनकी जाँच में गलत दवाओं के सेवन से गुर्दा बेकार हो रहा है. यही हाल लोहिया संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी का है. गलत दवा के सेवन से गुर्दे की बीमारी लेकर मरीज आ रहे हैं.

ये रहे संजीदा :  दिल, डायबिटीज, मोटापा, पथरी व पेशाब में संक्रमण वाले मरीज गुर्दे के प्रति सचेत रहें. इन लोगों में गुर्दे की बीमारी होने की आंशका अधिक होती है. इन लोगों में प्रोटीन का बहाव, लाल रक्त व पेशाब में डब्ल्यूबीसी के कण की मात्रा लगातार घटने लगती है. इसके बचाव के लिए यह लोग समय-समय पर पेशाब व खून की जाँच कराते रहें.

गुर्दे से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देकर मरीजों ने इनाम जीते : आलमबाग स्थित अजंता अस्पताल में गुरुवार को दुनिया गुर्दा दिवस पर गुर्दा मरीजों को बचाव के प्रति जागरूक किया गया. नेफ्रोलॉजिस्ट डाक्टर कविता विश्वकर्मा ने बोला कि बिना चिकित्सक की सलाह के गुर्दा मरीजों को दवा नहीं लेनी चाहिए. संयमित खानपान व नियमित जाँच से गर्दे का बचाव संभव है. अजंता के प्रबंध निदेशक डाक्टर अनिल खन्ना ने बोला कि गुर्दा मरीजों के लिए अस्पताल में अलग से सुविधा है. आईवीएफ विशेषज्ञ व अस्पताल की निदेशक डाक्टर गीता खन्ना के निर्देशन में क्विज प्रतियोगिता हुई. डायलिसिस यूनिट नेफ्रोपल्स ने समारोह में भाग लिया. मरीजों को उपहार भी दिए.

केस 1
सुलतानपुर के सुनील सिंह (55) को फरवरी में बुखार आया. उन्होंने बिना चिकित्सक की परामर्श के मेडिकल स्टोर से दवा ली. करीब 15 दिन उपचार किया. पेशाब में परेशानी होने पर पीजीआई में दिखाया. जाँच में यूरिया क्रिटनिन 4.5 निकला. पता चला गुर्दा दर्द की दवा ने गुर्दा बेकार कर दिया.
केस 2
आजमगढ़ के सिद्धार्थ (19) को धुंधला दिखाई दे रहा था. गांव में झोलाछाप डॉक्टरों से बहुत ज्यादा उपचार कराया. अच्छा न होने पर चिकित्सक की परामर्श ली. जाँच में ब्लड बढ़ा निकला. पीजीआई में आकर दिखाया तो जाँच में यूरिया क्रेटिनिन सात निकला. अब उपचार की वजह से यह घटकर 3.5 पर आ गया है.
केस 3
सूरत की धनेश्वरी (35) को आकस्मित पेशाब में संक्रमण मिला. लोकल डॉक्टरों के यहां बहुत ज्यादा उपचार कराया. यूरिया क्रेटिनिन करीब 6 हो गया. फिर धनेश्वरी ने उत्तर प्रदेश में अपने एक सम्बन्धी की मदद से पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग में दिखाया. बिना डायलिसिस के दवाइयों से उसका क्रेटिनिन 1.7 आ गया है.

मरीजों को दी सलाह
दुनिया गुर्दा दिवस पर पीजीआई की नवीन ओपीडी में गुरुवार को नेफ्रोलॉजी विभाग के डाक्टर नारायण प्रसाद द्वारा गुर्दे के बचाव की जागरूरता के लिए टी शर्ट वितरित की गईं. स्टाफ व मरीजों को गुर्दा बचाव के टिप्स भी दिए. वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते दुनिया गुर्दा दिवस पर पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता प्रोग्राम स्थगित कर दिया गया है.