बुखार, डायरिया और पेट में ऐंठन जैसे 4 लक्षण बताते हैं कोरोना हुआ तो लम्बे समय तक इससे लड़ने की क्षमता बनी रहेगी

बुखार, डायरिया और पेट में ऐंठन जैसे 4 लक्षण बताते हैं कोरोना हुआ तो लम्बे समय तक इससे लड़ने की क्षमता बनी रहेगी

कोरोना का संक्रमण होने के बाद खास तरह के लक्षण बताते हैं कि इम्युनिटी लम्बे समय तक बनी रहेगी। अमेरिका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि अगर संक्रमण के दौरान पेट में ऐंठन, डायरिया, भूख न लगना और पेट में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो वायरस के प्रति इम्युनिटी यानी इससे लड़ने की क्षमता लम्बे समय तक बनी रहेगी।

कोरोना के 113 मरीजों पर हुई रिसर्च
रिसर्च कोरोना के 113 मरीजों पर हुई। ये मरीज 5 हफ्ते तक कोरोना से जूझ चुके थे। रिकवरी के बाद इन पर रिसर्च शुरू हुई। इनका ब्लड टेस्ट किया गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, शरीर में एंटीबॉडीज अधिक बनने पर बुखार भी तेज हो सकता है। ये लक्षण भी लम्बी इम्युनिटी का इशारा है।

जानिए, कोरोना संक्रमण के 4 लक्षणों का इम्युनिटी से कनेक्शन

बुखार : तेज बुखार का मतलब लम्बी इम्युनिटी
कोरोना के संक्रमण का सबसे कॉमन लक्षण है बुखार। कुछ मामलों में बुखार के साथ खांसी और सांस लेने में तकलीफ होती है। नई रिसर्च कहती है, तेज बुखार अधिक इम्युनिटी विकसित होने का एक इशारा भी हो सकता है।

भूख न लगना : इम्युनिटी बनने की शुरुआत होने पर ये लक्षण दिख सकता है
रिसर्च कहती है, कोरोनावायरस अलग-अलग मरीजों में अलग-अलग तरह से असर दिखाता है। कई लोगों में भूख न लगना, खुश्बू न पहचान पाना जैसे लक्षण दिखते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है, भूख न लगना एक इंफ्लेमेट्री रिस्पॉन्स की तरह है। यह लक्षण तब दिखता है जब शरीर में वायरस से लड़ने की क्षमता बननी शुरू होती है।

डायरिया : इसके लक्षण कम हैं तो लम्बी होगी इम्युनिटी
कोरोना के कुछ मरीजों में उल्टी और मिचली के लक्षण दिखते हैं। ये बताते हैं कि मरीज डायरिया से जूझ रहा है। रिसर्च में सामने आया है कि जिन मरीजों में डायरिया के लक्षण बहुत हल्के होते हैं उनमें भी कोरोना के खिलाफ लम्बे समय तक इम्युनिटी डेवलप होती है।

पेट में ऐंठन : ये लक्षण एंटीबॉडीज ज्यादा बनने का इशारा
रिसर्च के मुताबिक, संक्रमण के दौरान पेट में ऐंठन भी इस बात का इशारा हो सकता है कि रिकवरी के बाद इम्युनिटी लम्बे समय तक रहेगी। वैज्ञानिकों का कहना है, इस पर अभी और रिसर्च की जानी बाकी है। यह रिसर्च कोरोना के लक्षण और इम्युनिटी के बीच का एक कनेक्शन है।


सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं नोनी के पत्‍तों का रस, इन 7 रोगों से दिलाए निजात

सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं नोनी के पत्‍तों का रस, इन 7 रोगों से दिलाए निजात
हाल के वर्षों में नोनी के सेहत से जुड़े फायदों और एंटीऑक्सीडेंट गुणों की तरफ सभी का ध्यान खींचा है। हालांक‍ि, ज्यादातर नोनी के पेड़ को इसकी आकर्षक पत्तियों के लिए उगाया जाता है।नोनी के पत्तों का साग झारखंड, बिहार, बंगाल और उड़ीसा में खूब खाया जाता है। नोनी के पत्तों में फ्लेवोनॉइड, प्रोटीन, सैपोनिन और टैनिन होते हैं। ये विटामिन-ए, विटामिन-बी, विटामिन-सी, विटामिन-डी और विटामिन-ई से भरपूर होते हैं।
ज‍िसके चलते नोनी के पत्तों का रस एंटी-बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी-ऑक्सीडेंट और सूजन को कम करने में फायदेमंद होते हैं और डायजेशन बेहतर करने में भी मददगार है। तो आइए जानते हैं क‍ि नोनी के पत्तों का रस क‍िन बीमार‍ियों या सेहत से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी है।

​याददाश्त में कमी में भी मददगार

नोनी के पत्तियों का रस याददाश्त में कमी की समस्याओं को ठीक करने में कारगर है। कमजोर याददाश्त के मरीजों पर किए गए र‍िसर्च स्टडी के मुताब‍िक, नोनी की पत्तियों के रस के सेवन से द‍िमाग में ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और मेमोरी फंक्शंस को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।नोनी की पत्तियों का रस शरीर में शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है जिससे घाव जल्द भरने में मदद म‍िलती है।

​लीवर की सुरक्षा में फायदेमंद

नोनी के पत्तों का रस रोजाना पीने से लीवर को कई समस्याओं से बचाया जा सकता है। नोनी के पत्तों का रस लीवर पर हेपाटो-प्रोटेक्टिव इफेक्ट्स डालता है जो कि क्रोनिक एक्सोजेनस केमिकल्स से सुरक्षित रखते हुए लिवर डैमेज जैसी बड़ी बीमारियों से बचाता है।

​अल्ट्रावॉयलेट क‍िरणों से बचाता है त्वचा को

नोनी की पत्त‍ियों का रस धूप के चलते होने वाली लालिमा और सूजन को कम करता है। स्टडी से पता चलता है क‍ि इसके पत्ते त्वचा पर सीधे इस्तेमाल के ल‍िए सुरक्षित हैं और त्वचा के लिए अल्ट्रावॉयलेट क‍िरणों से होने वाले नुकसान को कम करने में फायदेमंद हो सकते हैं। स्टडीज के मुताब‍िक, नोनी के पत्तों का रस एंथ्राक्विनोन से भरपूर होता है, जो स्क‍िन में झुर्रियां बनने से रोकता है। इसके एंटी-बैक्टीरियल, सूजन कम करने वाले गुण सेलुलर स्तर पर काम करते हैं और मुंहासे, जलन, स्क‍िन में होने वाली एलर्जी र‍िएक्शन को ठीक करने में उपयोगी होते हैं।

​इम्यून‍िटी बूस्टर है नोनी के पत्तों का साग और रस

र‍िसर्च में सामने आया है क‍ि नोनी के पत्तियों में एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की मौजूदगी इसे इम्यून‍िटी बूस्टर बनाती है। इसके पत्तियों को कच्चा चबाकर खाने से, साग बनाकर खाने से या रस पीने से बॉडी की टी और बी सेल्स की एक्टिव‍िटीज बढ़ती है, जिससे शरीर में संक्रमण से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएं 50% ज्यादा बेहतर काम करती है।

​गठिया की समस्या

वैज्ञान‍िक जांच में नोनी के पत्तियों के रस में एनाल्जेसिक लक्षणों के बारे में बताया गया है जो दर्द और संवेदनशीलता को कम करने में मदद करता है, जिससे गठिया की समस्या में राहत म‍िलती है। स्टडीज से यह भी बात पता चलती है क‍ि नोनी रस के औषधीय गुण बाजार में म‍िलने वाली कुछ मशहूर एनाल्जेसिक दवाओं के बराबर है।

​हार्ट की ब‍ीमार‍ियों से करता है बचाव

हाई ब्लड प्रैशर द‍िल की बीमार‍ियों का सबसे बड़ा कारण है। नोनी के पत्तों में रुटिन की उच्च मात्रा होती हैं जो क‍ि आमतौर पर चाय और सेब में पाया जाने वाला एक फ्लेवोनोइड है। इसके अलावा इसमें स्कोपोलेटिन होता है। ये दोनों ब्लड प्रैशर कम करने में हेल्पफुल है।

​टाइप-2 डायब‍िटीज के खतरे को करता है कम

डायब‍िटिक लोगों को नोनी के पत्तियों का साग बनाकर खाने से बहुत फायदा हो सकता है। टाइप-2 डायब‍िटीज के खतरे को कम करने में नोनी की पत्तियां बहुत असरदार है। इसके पत्तियों का साग या रस का सेवन शरीर में ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन, सीरम ट्राइग्लिसराइड्स और लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह इंसुलिन सेंसेव‍िटी को बढ़ाने में मदद करता है।


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