अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने अपने प्रोडक्शन हाउस क्लीन स्लेट फिल्म्ज को लेकर बोली यह बड़ी बात

अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने अपने प्रोडक्शन हाउस क्लीन स्लेट फिल्म्ज को लेकर बोली यह बड़ी बात

अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ( Anushka Sharma ) व उनके भाई कर्णेश शर्मा ने अपने प्रोडक्शन हाउस क्लीन स्लेट फिल्म्ज के बनैर तले 'पाताल लोक', 'बुलबुल' जैसे हिट शोज देखकर संसार को दिखा दिया कि अच्छा भारतीय कंटेंट क्या होता है. 

इसकी बदौलत इस भाई-बहन की जोड़ी की भारतीय कंटेंट का परिदृश्य बदलने के लिए सराहना मिल रही है. अनुष्का इस बात को लेकर रोमांचित हैं कि स्ट्रीमिंग करने वाले दिग्गजों के माध्यम से उनके प्रोजेक्ट दुनिया स्तर पर दर्शकों तक पहुंच रहे हैं.

अभी व मेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेहनत करना बाकी
अनुष्का का बोलना है,'कर्णेश व मैं इस वस्तु का याद करके लुत्फ उठा रहे हैं कि क्लीन स्लेट फिल्म्ज बीते सालों में किस तरह दिन-प्रतिदिन ग्रोथ कर रहा है. हमने इस कंपनी को खड़ा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया है. कंटेंट के परिदृश्य को बदलने के लिए हमने छोटे किंतु जरूरी कदम उठाए हैं. अपना निर्धारित लक्ष्य पाने के लिए अभी हमें व मेहनत करनी है.'

25 की आयु में प्रारम्भ किया प्रोडक्शन हाउस
अभिनेत्री ने कहा, 'जब मैं 25 वर्ष की थी तो अपना प्रोडक्शन वेंचर प्रारम्भ किया था. तभी मैंने तय कर लिया था कि क्लीन स्लेट फिल्म्ज की एक अलग पहचान होगी. क्योंकि मुझे यकीन था कि हम संसार भर के दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए जो कंटेंट तैयार करेंगे, उससे हमारी अलग पहचान बनेगी. यही वजह है कि आज हमारे पास जश्न मनाने की वजह है. मुझे गर्व है कि हमने कई प्रतिभाशाली लोगों का भविष्य बनाया है.'

हम सभी सह निर्भर हैं
अनुष्का का बोलना है कि कोविड—19 महामारी ने उन्हें सिखाया है कि सभी एक-दूसरे पर सह निर्भर हैं, भले ही यह साफ तौर पर नजर न आता हो. उन्होंने कहा, 'एक कनेक्शन, जिससे हम सब जुड़े हैं, चाहे वो एक किसान से होकर एक कॉपोर्रेट (संगठन) में सबसे ऊपरी स्तर पर कार्य करने वाले आदमी के साथ हो. हर कोई किसी न किसी तरह से जुड़ा हुआ है व इनके कार्य एक आदमी दूसरे के ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं. यह एक बटरफ्लाई इफेक्ट की तरह है.'

महामारी ने सिखाया सराहना करना
अनुष्का ने बोला कि हम सभी एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं व इस महामारी ने हमें एक-दूसरे की सराहना करना सिखाया है व उस कार्य की सराहना करना है जो हर कोई करता है. मैं केवल फ्रंटलाइन श्रमिकों के बारे में बात नहीं कर रही हूं, उनका सहयोग बेहद बहादुरी भरा रहा है व हम सभी इसके लिए बेहद आभारी हैं.