इन उपभोक्ताओं के लिए महंगी हो जाएगी वोडाफोन-आइडिया व एयरटेल की दरें

इन उपभोक्ताओं के लिए महंगी हो जाएगी वोडाफोन-आइडिया व एयरटेल की दरें

वित्तीय संकट से उबरने के लिए दूरसंचार कंपनियों ने रविवार को मोबाइल कॉल व डेटा की दरें बढ़ाने की घोषणा की. वोडाफोन-आइडिया व एयरटेल की दरें पोस्टपेड उपभोक्ताओं के लिए तीन दिसंबर से महंगी हो जाएगी. वहीं, रिलायंस जियो छह दिसंबर को नयी दरें की घोषणा करेगी. दूरसंचार कंपनियों का बोलना है कि भारी घाटे के बाद दरों में बढ़ोतरी करना महत्वपूर्ण हो गया था.

इस बढ़ोतरी पर रिएक्शन देते हुए दूरसंचार विशेषज्ञों ने बोला कि दूरसंचार क्षेत्र में लंबे समय से चला आ रहा सस्ती कॉल व डेटा का दौर समाप्त हो गया है. भारी लोन में डूबी कंपनियों के पास दरें बढ़ाने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि हाल ही में समायोजित सकल आय (एजीआर) पर सु्प्रीम न्यायालय के निर्णय के बाद एयरटेल व वोडाफोन-आइडिया पर वित्तीय दबाव बढ़ा है. बताते चलें कि शीर्ष न्यायालय दूरसंचार कंपनियों पर पुरानी वैधानिक देनदारियों के रूप में सरकार का 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया चुकाने का आदेश दिया है. 

* 2016 में जियो के आने के बाद से सस्ते कॉल व डेटा का दौर प्रारम्भ हुआ.
* 13 में सिर्फ चार दूरसंचार कंपनियां रह गई रिलायंस जियो के सामने कीमतों की जंग में.
* 1.47 लाख करोड़ करोड़ देने का आदेश उच्चतम न्यायालय ने कंपनियों को दिया.

कंपनियों को नुकसान के दो बड़े कारण
1.  एक अरब से अधिक मोबाइल ग्राहकों के साथ हिंदुस्तान संसार के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में से एक है. इसके बावजूद कंपनियों को नुकसान के दो कारण हैं. पहला यह कि जियो के आने के बाद दूरसंचार मार्केट में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ी. इससे कॉल की दरें तेजी से गिरी. वहीं, कंपनियों के लिए डेटा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रही. इससे हिंदुस्तान डेटा के मुद्दे में संसार का सबसे सस्ता देश बन गया. लेकिन, कंपनियों को नुकसान बढ़ता चला गया.

2. दूसरा कारण एजीआर है. यह है समायोजित सकल आय (एजीआर) का मामला. इसका मतलब है कि दूरसंचार कंपनियों को अपनी कमाई का एक भाग सरकार के दूरसंचार विभाग के साथ साझा करना होगा. हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए दूरसंचार कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ चुकाने का आदेश दिया. इस निर्णय का कंपनियों पर गहरा प्रभाव पड़ा है. इसकी वजह से भी दूरसंचार कंपनियों पर लोन का बोझ बढ़ा है. 

दूरसंचार क्षेत्र पर 7.88 लाख करोड़ का कर्ज
दूरसंचार क्षेत्र पर 7.88 लाख करोड़ रुपये का वजनदार लोन है व यह 31 अगस्त 2017 के आंकड़ों के अनुसार है. संसद में (20 नवंबर) को यह जानकारी दी गई. 31 अगस्त 2017 की अंतर-मंत्रालयी समूह की रिपोर्ट के अनुसार दूरसंचार उद्योग का कुल लोन 7.88 लाख करोड़ रुपये है. इसमें से भारतीय लोन कुल 1.77 लाख करोड़ रुपये, विदेशी लोन 83,918 करोड़ रुपये व कुल बैंक/एफआई लोन 2.61 लाख करोड़ रुपये है. 

राहत पर एक साथ सीआईआई, फिक्की
दूरसंचार कंपनियों के समायोजित सकल आय (एजीआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसला के बाद इस क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को लेकर परस्पर विरोधी तर्क-वितर्क के बीच उद्योगमंडल सीआईआई व फिक्की ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से इस क्षेत्र के लिए राहत की मांग की  है. सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने वित्तमंत्री को लिखे लेटर में राजस्व साझा करने की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार कर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की. 

डेटा सस्ता लेकिन लागत बढ़ी
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, जून 2016 से दिसंबर, 2017 के बीच देश में मोबाइल डेटा की दरों में 95% की तेज गिरावट दर्ज की गई है.  मोबाइल डेटा 11.78 रुपए प्रति गीगाबाइट (जीबी) के औसत दाम में उपलब्ध है. मोबाइल कॉल की दरें भी 60 प्रतिशत गिरकर करीब 19 पैसे प्रति मिनट हो गई. वहीं, इस दौरान लागत बढ़ी.

नुकसान भरपाई की कोशिश
विश्लेषकों का मानना है कि दूरसंचार क्षेत्र में प्राइस वार की वजह से नुकसान झेल चुकी कंपनियों को कॉल व डाटा की दरें बढ़ाने से नुकसान की भरपाई करने का मौका मिल सकता है. सिटी रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में बोला है कि कंपनियों द्वारा दरें बढ़ाना एक टर्निंग पॉइंट साबित होने कि सम्भावना है. इससे गलाकट प्रतिस्पर्धा पर रोक लगेगी. हालांकि, दरें बढ़ाने से नुकसान की कितनी भरपाई हो पाएगी यह बोलना अभी जल्दबाजी होगा.

भारत संचार निगम लिमिटेड भी खस्ताहाल
जियो के मार्केट में आने के बाद सिर्फ व्यक्तिगत दूरसंचार कंपनियों की ही हालत बेकार नहीं हुई है. देश की सबसे प्रतिष्ठित टेलीकॉम कंपनी रही भारत संचार निगम लिमिटेड भी आर्थिक संकट के दौर से गुजर है. दूरसंचार कंपनियों में सबसे अधिक 1.76 लाख कर्मचारी वाली इस सरकारी की दशा बहुत बेकार है. सरकार की ओर से इसे उबारने के लिए वीआरएस स्कीम प्रारम्भ की गई है. इसके तहत करीब एक लाख कर्मचारी वीआरएस लेंगे.

सिर्फ चार कंपनियां रह गई
वर्ष 2016 के बाद देश के दूरसंचार क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आया. वित्तीय साल 2008-10 में देश में 13 दूरसंचार कंपनियां अपनी सेवा दे रही थी, जिनकी संख्या अब घटकर मात्र चार पर आ गई है. जियो के आने से मार्केट से आरकॉम, टाटा इंडिकॉम, एयरसेल, डाटाकॉम (वीडियोकॉन), लूप मोबाइल (पूर्व बीपीएल), युनिटेक वायरलेस, स्वान टेलिकॉम, वर्जिन मोबाइल इंडिया जैसी कंपनियां मार्केट से बाहर हो गई.