सरकार इन विशेष स्टार्टअप पर दे रही है ध्यान

सरकार इन विशेष स्टार्टअप पर दे रही है ध्यान

सरकार 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए निर्माण व सेवा क्षेत्र के साथ स्टार्टअप पर भी विशेष ध्यान दे रही है. यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़े, इसके लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय उच्चस्तरीय परिषद बनाने वाला है. यह कैसे कार्य करेगा, इस पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) सचिव गुरु प्रसाद महापात्र से वार्ता की. पेश है अंश :

प्रश्न- स्टार्टअप वित्तपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं. यह कैसे दूर होगी?

उत्तर- इस समय बहुत ज्यादा स्टार्टअप वित्तपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं. हमने जब इस क्षेत्र के दिग्गजों से बात की तो पता चला कि बैंक इस क्षेत्र को ऋण देने में इसलिए रुचि नहीं लेते क्योंकि उनके लिए इस क्षेत्र को ऋण देना महत्वपूर्ण नहीं है.

जबकि मकान खरीदने या बनाने के लिए होम कर्ज़ या खेती-किसानी के लिए कृषि ऋण देना बैंकों की बाध्यता है क्योंकि ये क्षेत्र प्रायोरिटी सेक्टर में आते हैं. स्टार्टअप अभी तक प्रायोरिटी सेक्टर में नहीं है. ऐसा करने के लिए हमने भारतीय रिजर्व बैंक से सम्पर्क किया.

वहां बताया गया कि कौन-कौन से क्षेत्र प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में आए व कौन से नहीं, यह केन्द्र सरकार तय करती है. अब हम प्रयास कर रहे हैं कि स्टार्टअप क्षेत्र भी प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में आ जाए. उसके बाद स्टार्टअप को बैंकों से ऋण लेने में कोई परेशानी नहीं होगी.

प्रश्न- 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने को सरकार का बहुत ज्यादा जोर स्टार्टअप पर है, लेकिन यह क्षेत्र कई समस्याओं से घिरा है. समस्याएं कैसे दूर होंगी?

उत्तर- स्टार्टअप की समस्याओं पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते उच्चस्तरीय मीटिंग की थी. इसमें उद्योग जगत के भी प्रतिनिधि उपस्थित थे. इसमें बताया गया कि इस क्षेत्र की कई समस्याओं को दूर किया गया, जिनमें एंजल कर सबसे बड़ी समस्या थी. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के स्पष्टीकरण के बाद यह समस्या तो दूर हो गई है, लेकिन अब भी कई मसले हैं, जिन पर कार्य होना है.

इनमें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ सेबी, भारतीय रिजर्व बैंक व कॉरपोरेट मंत्रालय आदि से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं. इनके शीघ्र व स्थायी निवारण के लिए एक संगठित कोशिश के क्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक परिषद के गठन का निर्णय हुआ है.

इसमें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के प्रतिनिधि, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग से जुड़े प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर विभाग, बैंक, कॉरपोरेट मंत्रालय के साथ ही मार्केट नियामक सेबी व भारतीय रिजर्व बैंक के भी ऑफिसर शामिल होंगे. इसमें स्टार्टअप व वेंचर कैपिटल कंपनियों के प्रतिनिधि भी होंगे. हम उम्मीद कर रहे हैं कि इन नियमित बैठकों में समस्याओं का निदान निकलेगा.

प्रश्न- स्टार्टअप को सरलता से ऋण मिले, इसके लिए कुछ वर्ष पहले फंड ऑफ फंड्स बनाया गया था. इसकी क्या स्थिति हैै?

उत्तर- हमने एक फंड ऑफ फंड्स बनाया है, जिसका प्रबंधन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) करता है. यह बहुत अच्छा कार्य कर रहा है. इस कोष से राशि की बहुत ज्यादा मांग है, जिसके मिले मिलने वाला बजट कम पड़ जाता है. इस वर्ष भी हमें लग रहा है कि करीब 500-600 करोड़ रुपये की कमी पड़ रही है. इसलिए हमने वित्त मंत्रालय से इस वर्ष के लिए 600 करोड़ रुपये व मांगा है.

प्रश्न- आप चाहते हैं कि नए स्टार्टअप सामने आएं व रोजगार-कारोबार बढ़े. लेकिन इन दिनों ई-कॉमर्स कंपनियों के विरूद्ध कारोबारियों का एक वर्ग अभियान छेड़े हुए है. इस संकट से कैसे निपटेंगे?

उत्तर- मैं बताना चाहूंगा कि देश में दो तरह के ई-कॉमर्स हैं. पहला ई-कॉमर्स वह है, जिसमें 100 प्रतिशत देश का पैसा लगा है. इसे गैर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) ई-कॉमर्स कहते हैं. दूसरा ई-कॉमर्स वह है, जिसमें एफडीआई लगा हुआ है. इन्हें एफडीआई ई-कॉमर्स कहते हैं. गैर एफडीआई ई-कॉमर्स में तो कोई परेशानी नहीं है, लेकिन एफडीआई ई-कॉमर्स के लिए नियम अलग हो जाते हैं. इन्हें देश के कानून के हिसाब से कार्य करना पड़ता है.

एफडीआई ई-कॉमर्स के मुद्दे में हमारे पास एमआरपी से बहुत कम मूल्य पर सामान बेचनेकी शिकायत आई है. हमने इन कंपनियों से कुछ सवालों के जवाब मांगे थे. कुछ व बिंदुओं पर उनसे जवाब मांगा गया है.

प्रश्न- इन कंपनियों के विरूद्ध छोटे दुकानदार प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

उत्तर-यहां लोकतंत्र है, जहां सबको अपनी बात रखने की आजादी है. मैं किसी भी बात को दबा नहीं सकता. हमारा कार्य यह देखना है कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं. हमारे पास एक संगठन की तरफ से इन कंपनियों के विरूद्ध शिकायत आई, जिसके आधार पर उन कंपनियों से जवाब मांगा गया. मैंने अभी तक उनका जवाब देखा नहीं है, लेकिन यह आ गया है.