कंपनियों के पीएम आपात राहत कोष में सहयोग को माना जाएगा सीएसआर खर्च

कंपनियों के पीएम आपात राहत कोष में सहयोग को माना जाएगा सीएसआर खर्च

सरकार ने बोला है कि कंपनियों द्वारा पीएम आपात राहत कोष (पीएम-केयर्स) में सहयोग को कंपनी कानून के तहत कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) खर्च माना जाएगा. वित्त व कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी. देश में कोरोना वायरस फैलने के बीच सरकार इस महामारी पर रोक लगाने के कोशिश कर रही है.  कंपनी कानून के तहत कुछ निश्चित श्रेणी की मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को अपने तीन वर्ष के औसत शुद्ध फायदा को दो फीसदी एक वित्त साल में सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होता है. सीतारमण ने ट्वीट किया, ''पीएम-केयर्स में किए गए किसी को सहयोग को सीएसआर खर्च माना जाएगा. 

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस बारे में ज्ञापन जारी कर स्पष्ट किया है कि कंपनियों द्वारा दान किए गए धन को उनकी सीएसआर गतिविधि में गिना जाएगा.सरकार ने आपात स्थितियों में पीएम नागरिक सहायता एवं राहत कोष (पीएम-केयर्स फंड) बनाया है. यह कोष कोरोना वायरस जैसी किसी आपात स्थिति में मदद देने का कार्य करेगा. 

 मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी ज्ञापन में बोला गया है, ''पीएम-केयर्स कोष का गठन किसी आपात स्थिति की वजह से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए किया गया है. इसी के अनुरूप यह स्पष्ट किया जाता है कि पीएम-केयर्स कोष में किए गए किसी भी सहयोग को कंपनी कानून, 2013 के तहत सीएसआर खर्च माना जाएगा.

मंत्रालय ने कुछ दिन पहले बोला था कि कोरोना वायरस पर रोक के लिए कंपनियों द्वारा किए जाने वाले किसी भी खर्च को कंपनी कानून के तहत सीएसआर गतिविधि माना जाएगा. उसके बाद अब मंत्रालय की ओर से इस बारे में ज्ञापन जारी किया गया है. सीएसआर कोष का प्रयोग कोविड-19 की रोकथाम जैसी गतिविधियों में किया जा सकता है. इसमें स्वास्थ्य व साफ-सफाई शामिल है.