कोरोनावायरस की वजह से एयरलाइन इंडस्ट्री को उठाना पड़ा यह बड़ा नुकसान

कोरोनावायरस की वजह से एयरलाइन इंडस्ट्री को उठाना पड़ा यह बड़ा नुकसान

 कोरोनावायरस की वजह से एयरलाइन इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है. ग्लोबल एविएशन एसोसिएशन के मुताबिक एयरलाइंस इंडस्ट्री मौजूदा वक्त में इस दशा में पहुंच गई हैं, जहां उन्हें बिना सरकाी मदद के गुजारा करना संभव नहीं होगा.

 बताते चलें कि कोरोना वायरस की वजह से संसार के ज्यादा राष्ट्रों ने घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने रोक दी हैं. ऐसे में एविएशन इंडस्ट्री को प्रतिदिन करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है. इसलिए एविएशन इंडस्ट्री की तरफ से तत्काल असर से आर्थिक मदद की मांग की है. रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष एविएशन इंडस्ट्री को रेवेन्यू में 250 बिलियन डॉलर (19,06,875 करोड़ रुपए) का नुकसान उठाना पड़ सकता है.


रेवेन्यू में 44 प्रतिशत की गिरावट
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने बोला अगर हवाई यात्रा में तीन माह तक प्रतिबंध जारी रहता है, तो सालाना पैसेंजर रेवेन्यू 252 बिलियन डॉलर तक कम होने कि सम्भावना है. इससे इस वर्ष का रेवेन्यू वर्ष 2019 के मुकाबले 44 प्रतिशत कम होगा. आईएटीए चीफ एलेक्जेंडर डे जुनेक ने बोला कि एविएशन इंड्स्ट्री के रेवेन्यू में गिरावट इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है. एयरलाइंस संसार के हर कोने में अपनी अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं. उन्होने बोला कि हवाई यात्राओं पर प्रतिबंध व डिमांड न होने के चलते एयरलाइंस इंडस्ट्री को भारी नुकसान हो रहा है. ऐसे में सरकारों को एयरलाइंस इंडस्ट्री बचाने के लिए क्राइसिस फंड के तहत सामने आना चाहिए.


एयरलाइंस को बचाने के लिए 200 बिलियन डॉलर की जरूरत
आईएटीए ने पिछले सप्ताह चेतावनी दी थी कि संसार की एयरलाइनों को बचाने के लिए 200 बिलियन डॉलर तक की आवश्यकता है. उन्होंने बोला कुछ सरकारों ने इस ओर कदम उठाए हैं. लेकिन इसके बावजूद दशा चिंताजनक बने हुए हैं. उन्होंने चिंता जाहीर करते हुए बोला कि आईएटीए ने COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए सरकारी तरीकों का पूरी तरह से समर्थन किया. बताते चलें कि संसार भर में लगभग 400,000 लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हैं, जिसमें अब तक 17,000 के करीब लोग मारे गए हैं.