Budget 2021: PMFAI ने की कीटनाशकों पर GST दर को 18 फीसद से घटाकर 5 फीसद करने की मांग

Budget 2021: PMFAI ने की कीटनाशकों पर GST दर को 18 फीसद से घटाकर 5 फीसद करने की मांग

पेस्टिसाइड्स मैनुफैक्चरर्स एंड फॉर्मुलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PMFAI) ने केंद्र सरकार से बजट में कीटनाशकों पर जीएसटी दर घटाने की मांग की है। पीएमएफएआई ने कीटनाशकों पर जीएसटी दर को 18 फीसद से घटाकर 5 फीसद करने की मांग की है। वर्तमान में बीज और खाद पर 5 फीसद जीएसटी लगता है। संगठन ने कहा कि कीटनाशकों पर जीएसटी दर घटाने से किसानों को काफी फायदा होगा।

पीएमएफएआई ने ड्यूटी ड्राबैक (एक्सपोर्ट बेनिफिट्स) को 2 फीसद से बढ़ाकर 13 फीसदी करने की मांग सरकार से की है। साथ ही संगठन ने टेक्निकल और फिनिश्ड पेस्टीसाइड्स पर आयात शुल्क बढ़ाकर 20 से 30 फीसद करने की मांग भी की है, जिससे घरेलू एग्रो-केमिकल्स इंडस्ट्री को संरक्षित किया जा सके।

एसोसिएशन ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत सरकार से इंटरमीडिएट्स और टेक्निकल ग्रेड पेस्टीसाइड्स के लिए तकनीकी विकास करने को वित्तीय मदद के अतिरिक्त अन्य डेवलपमेंट एसिस्टेंस देने की भी मांग की है। एसोसिएशन द्वारा केंद्र सरकार से की गई ये मांगे ऐसी हैं, जो 200 से अधिक छोटे, मध्यम और बड़े श्रेणी की इंडियन पेस्टीसाइड्स मैनुफैक्चरर्स, फॉर्मुलेटर्स और ट्रेडर्स के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। पीएमएफएआई ने इन मांगों को ऊर्वरक एवं रसायन मंत्रालय को भेज दिया है।


पीएमएफएआई के प्रेसिडेंट प्रदीप दवे के अनुसार, जीएसटी दर में कमी करने से देश के तीन-चौथाई किसानों को फायदा पहुंचेगा, जो अभी इस सीमा से बाहर हैं। उनके अनुसार, सरकार को इससे कोई खास वित्तीय नुकसान भी नहीं होगा। दवे ने कहा कि इससे किसानों को अपनी फसल का बेहतर रिटर्न पाने में मदद मिलेगी। अगले वित्त वर्ष 2021-22 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2021 को पेश किया जाएगा। यह आम बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी।


नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर सरकार जिस तरह से पूरी ताकत से जुटी है, उससे साफ है कि इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बजट में अलग से वित्तीय प्रविधान किए जा सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर वित्त मंत्रालय को एक प्रजेंटेशन भी दिया है। इसमें नीति के अमल से जुड़ी जरूरतों को प्रमुखता से रखा गया है। वैसे भी देश की आजादी के 75वें साल यानी वर्ष 2022 में जिस तरह स्कूली बच्चों को नई नीति के तहत किताबें मुहैया कराने जैसे लक्ष्य रखे गए हैं, उसमें ज्यादा जरूरत पैसों की होगी।

खास बात यह है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकार से शिक्षा पर खर्च को दोगुना करने की सिफारिश की गई है। नीति में साफ कहा गया है कि शिक्षा को नई ऊंचाई देने और नीति के अमल के लिए जरूरी है कि शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च का बीस फीसद राशि खर्च की जाए। जो मौजूदा समय में कुल सरकारी खर्च का सिर्फ दस फीसद ही है।

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की मानें, तो नीति में भले ही शिक्षा पर खर्च में दोगुनी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है, लेकिन यह मौजूदा परिस्थितियों में एक साथ करना संभव नहीं है। यह जरूर है कि यह बढ़ोतरी आने वाले सालों में एक क्रमबद्ध तरीके से की जा सकती है। इसकी शुरुआत सरकार की ओर से इसी साल से की जा सकती है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर वैसे तो शिक्षा मंत्रालय ने दो क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें एक क्षेत्र ऐसा है, जिनमें उन सारी गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनके अमल के लिए पैसों की कोई जरूरत नहीं होगी। बल्कि इन्हें मंत्रालय के स्तर पर प्रशासनिक तरीके से अंजाम दिया जाना है। जबकि दूसरे क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को रखा है, जिसके लिए पैसों की जरूरत होगी।


फिलहाल इनमें जो अमल है, उनमें स्कूली बच्चों को खाने के साथ नाश्ता भी देना, शिक्षकों को प्रशिक्षण देना, स्कूली शिक्षा में प्री-स्कूल को शामिल करना, शिक्षकों के खाली पदों को भरना, शोध को बढ़ावा देना, उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने सहित ऑनलाइन शिक्षा को मजबूती देने जैसे कदम शामिल हैं।

सरकार इस बार शिक्षा नीति के अमल को लेकर कुछ सतर्क भी है, क्योंकि इससे पहले जो नीति बनाई गई, उस पर पैसों के अभाव में ठीक से अमल नहीं हो सका था। हरेक नीति में शिक्षा पर जीडीपी का छह फीसद तक खर्च करने की सिफारिश की गई, लेकिन अभी भी शिक्षा पर जीडीपी के चार फीसद के आसपास खर्च किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में शिक्षा का कुल बजट करीब एक लाख करोड़ रुपये था।


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