भारती एयरटेल की प्रवर्तक भारती टेलीकॉम ने इन कंपनियों से मांगी है यह अनुमति

भारती एयरटेल की प्रवर्तक भारती टेलीकॉम ने इन  कंपनियों से मांगी है यह अनुमति

भारती एयरटेल की प्रवर्तक भारती टेलीकॉम ने सिंगापुर की सिंगटेल व अन्य विदेशी कंपनियों से 4,900 करोड़ के निवेश के लिए केन्द्र से अनुमति मांगी है. इस कदम से देश की सबसे पुरानी व्यक्तिगत क्षेत्र की दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी एक विदेशी इकाई बन जाएगी.

भारती टेलीकॉम की भारती एयरटेल में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी

मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि इस निवेश से भारती टेलीकॉम में विदेशी हिस्सेदारी बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी. वर्तमान में सुनील भारती मित्तल व उनके परिवार की इसमें करीब 52 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि भारती टेलीकॉम की भारती एयरटेल में करीब 41 प्रतिशत हिस्सेदारी है. दूरसंचार विभाग इसी महीने इस निवेश को मंजूरी दे सकता है.

विदेशी निवेशकों के पास चली जाएगी बहुलांश हिस्सेदारी

बता दें कि भारती टेलीकॉम ने सिंगटेल व कुछ व विदेशी निवेशकों की ओर से कंपनी में 4,900 करोड़ रुपये की पूंजी डालने की अनुमति देने के लिए आवेदन किया है. अगर इसको मंजूरी मिलती है, तो बहुलांश हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों के पास चली जाएगी. इसलिए भारती टेलीकॉम एक विदेशी कंपनी बन जाएगी.

कंपनी पहले ही कर चुकी है आवेदन

भारती एयरटेल पहले ही कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की लिमिट को बढ़ाकर 100 फीसद करने के लिए आवेदन कर चुकी है. पिछले हफ्ते भारती एयरटेल के बोर्ड ने तीन अरब डॉलर जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. एजीआर के रूप में कंपनी को सरकार को 43,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.

कंपनी को हुआ था 23 हजार करोड़ रुपये का घाटा

दूरसंचार कंपनी को जुलाई-सितंबर, 2019 तिमाही में 23,045 करोड़ रुपये का वजनदार घाटा हुआ था. वहीं एक वर्ष पहले समान तिमाही में कंपनी को 119 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था.अदालत के निर्णय के आधार पर लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम शुल्क (एसयूसी) के मद में तिमाही के दौरान कंपनी पर 28,450 करोड़ रुपये का अलावा बोझ पड़ेगा.’ कंपनी ने बोला कि इस धनराशि में 6,146 करोड़ रुपये मूलधन, 12,219 करोड़ रुपये ब्याज, 3,760 करोड़ रुपये पेनल्टी व 6,307 करोड़ रुपये पेनल्टी पर ब्याज शामिल है.

भारती एयरटेल ने बोला कि भले ही उसे असाधारण मद के बाद 23,045 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, लेकिन इस असाधारण मद को हटा दें तो कंपनी को 1,123 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. वहीं कंपनी का भारतीय कारोबार से राजस्व सालाना आधार पर तीन प्रतिशत बढ़कर 15,361 करोड़ रुपये हो गया.