अलगाववादी जम्मू और कश्मीर के विद्यार्थियों के लिए पाक में करते थे पढ़ाई की सिफारिश, जाने खबर

अलगाववादी जम्मू और कश्मीर के विद्यार्थियों के लिए पाक में करते थे पढ़ाई की सिफारिश, जाने खबर

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बोला है कि अलगाववादी जम्मू और कश्मीर के ऐसे विद्यार्थियों के लिए पाक में पढ़ाई की सिफारिश करते थे, जिनकी इंडियन आर्मी व सुरक्षाबलों के विरूद्ध पत्थरबाजी, उपद्रव जैसी हिंसक गतिविधियों में अहम किरदार होती थी. 

ऐसे विद्यार्थियों के लिए पाकिस्तानी वीजा हासिल करने के अलगाववादियों के सिफारिशी लेटर एनआईए के हाथ लगे हैं. एजेंसी ने इससे पहले पाक में मेडिकल संस्थानों में प्रवेश के लिए अलगाववादियों द्वारा कश्मीरी विद्यार्थियों को भेजे जाने को आतंकवादी समूहों को फंडिंग की वैकल्पिक प्रक्रिया करार दिया था.


दरअसल, एनआईए ने 2017 में आतंकवादी फंडिंग का एक केस दर्ज किया व पाक समर्थक हुर्रियत कॉन्फ्रेंस नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंटूश समेत कई लोगों को अरैस्ट किया. गिलानी ने बीते सप्ताह पॉलिटिक्स से किनारा किया है. एनआईए के मुताबिक, अलगाववादी पाक जाने वाले कश्मीरी विद्यार्थियों से इन सिफारिशी पत्रों के बदले मोटी रकम लेते हैं जिनमें बड़ा भाग घाटी को दहलाने के लिए आतंकवादियों के पास भेजा जा रहा है. 
यह खुलासा तब हुआ जब एनआईए ने हवाला समेत गैर बैंकिंग चैनलों से आतंकवादी फंडिंग का भंडाफोड़ किया. साल 2018 में न्यायालय में पेश चार्जशीट में एनआईए ने बोला था कि पाक का वीजा उन्हीं विद्यार्थियों को मिलता था, जो किसी पूर्व आतंकवादी के सम्बन्धी होते या घाटी में सक्रिय आतंकवादी से जुडे़ होते थे. ये विद्यार्थी किसी न किसी रूप में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल रहे थे या फिर हुर्रियत नेताओं को जानते थे.

हर वर्ष 100 विद्यार्थी भेजे जाते थे पाकिस्तान, आतंकवादियों की फंडिंग का नया विकल्प

एक वरिष्ठ ऑफिसर के मुताबिक, पाक के कॉलेजों में प्रवेश के लिए घाटी के विद्यार्थियों को अलगाववादियों व उनसे जुड़े संगठनों को पैसा देना होता है, तभी सिफारिशी लेटर मिलता था. यह लेटर दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में जमा करना होता है. उसके बाद ऐसे विद्यार्थियों को पाक के कॉलेजों में दाखिला मिलता. आतंकवादियों का फंडिंग के इसी नए विकल्प व नेटवर्क का एनआईए ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है. इसके तहत हर वर्ष तकरीबन 100 कश्मीरी विद्यार्थियों को पाक भेजा जाता था.

यह था पाकिस्तानी मेडिकल सीट रैकेट

अधिकारियों ने बताया, दो दशक पहले पाक के तत्कालीन तानाशाह राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की सरकार ने कश्मीरी विद्यार्थियों के लिए पीओके, इस्लामाबाद, कराची व लाहौर के इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज में सीटें रिजर्व करने का निर्णय किया. इसके तहत हिंदुस्तान विरोधी मानसिकता वाले जिन कश्मीरी विद्यार्थियों को लोकल कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिलता, वे पाक का रुख करते. अधिकांश सीटें पाक सरकार द्वारा प्रायोजित होती थीं. इन सीटों के आवंटन की जिम्मेदारी पीओके व कश्मीर के हुर्रियत जैसे अलगाववादी नेताओं को दी गई थी.

भारत के विरूद्ध भड़काने की कोशिश

बताया जाता है कि पाक पढ़ने गए इन कश्मीरी विद्यार्थियों का ब्रेनवॉश कर इन्हें हिंदुस्तान के विरूद्ध भड़काया जाता है, जिससे कश्मीर में अमन चैन की हिंदुस्तान सरकार की कोशिशों को नाकाम किया जा सके. कई विद्यार्थियों को हिंदुस्तान के विरूद्ध जासूसी के लिए तैयार किया जाता है. कुछ विद्यार्थियों को जम्मू और कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों की तरफ से मानवाधिकार हनन से जुड़ी फर्जी खबरें फैलाने को भी बोला जाता है.