देश में कोरोना की तीसरी लहर आने पर इसकी तीव्रता दूसरी वेव की अपेक्षा होगी काफी कम: सीएसआइआर

देश में कोरोना की तीसरी लहर आने पर इसकी तीव्रता दूसरी वेव की अपेक्षा होगी काफी कम: सीएसआइआर

देश में युद्धस्तर पर कोरोना का टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। टीकाकरण को लेकर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) के महानिदेशक डाक्टर शेखर सी मांडे ने कहा कि हम देश की एक बड़ी आबादी को पहली और दूसरी खुराक का टीका लगवाने में सफल रहे हैं। वैक्सीन बीमारी को काफी हद तक रोकती है, इससे कोरोना की गंभीरता भी कम होती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आने पर इसकी तीव्रता कम और दूसरी लहर से काफी कम होगी।


वहीं, दूसरी ओर केंद्र द्वारा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 81.39 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की डोज प्रदान की गई हैं। इसके साथ ही लगभग 86 लाख वैक्सीन की डोज पाइपलाइन में हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।

मंत्रालय ने आगे कहा कि 4 करोड़ 23 लाख 43 हजार 720 (4,23,43,720) वैक्सीन की डोज अभी भी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पास उपलब्ध हैं।

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में भारत सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में कोरोना के टीके उपलब्ध कराकर उनका समर्थन कर रही है।

कोरोना टीकाकरण अभियान के चलते केंद्र देश में वैक्सीन निर्माताओं द्वारा उत्पादित किए जा रहे टीकों का 75 फीसद राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मुफ्त में खरीद और आपूर्ति करेगा।

 
पिछले 24 घंटों में 31 हजार से ज्यादा आए नए मामले

देश में कोरोना के मामलों की बात करें तो रोजाना 30 हजार के आस पास नए केस सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी हुए आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में देशभर में कोरोना के 31,382 नए कोरोना केस आए हैं। इस दौरान 318 लोगों की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हुई है। 


आधुनिक वार्निग प्रणाली से कारों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाने की तैयारी, दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम

आधुनिक वार्निग प्रणाली से कारों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाने की तैयारी, दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम

विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) के शोधकर्ता वाहनों के लिए अपनी तरह के पहले 'स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम' को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो सड़क के बुनियादी ढांचे और भौगोलिक स्थिति के आधार पर चालक को वाहन की तेज गति से हो सकने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिहाज से सतर्क करेगा।सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 70 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं वाहन की तेज गति के कारण होती हैं। ऐसी दुर्घटनाओं को कम से कम करने के लिए सरकार ने एक जुलाई, 2019 के बाद बिकने वाली सभी नई कारों में गति नियंत्रण उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। वाहन की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने पर यह उपकरण चेतावनी स्वरूप बीच-बीच में बीप की आवाज करेगा और 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार होने पर बीप की आवाज लगातार होगी।


हालांकि आइआइटी गुवाहाटी और आइआइटी बंबई के शोधकर्ताओं का मानना है कि गति नियंत्रण उपकरण में उतनी बुद्धिमता नहीं है कि यह पहाड़ी क्षेत्रों, मैदानी इलाकों या रेगिस्तानी स्थानों समेत हर जगह प्रभावी रूप से काम कर सके।आइआइटी गुवाहाटी में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अखिलेश कुमार मौर्य ने कहा, 'स्मार्ट स्पीड वार्निंग सिस्टम विकसित करने की जरूरत है जो सड़क के ढांचे के मुताबिक गति के बारे में बता सके और तेज गति से हो सकने वाले हादसों को रोका जा सके।'