उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर मांगी प्रदेश सरकार से स्टेटस रिपोर्ट, पढ़े

उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर मांगी प्रदेश सरकार से स्टेटस रिपोर्ट, पढ़े

दुष्कर्म की शिकार स्त्रियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर प्रदेश सरकार से स्टेटस रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय ने मांगी है. न्यायालय ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि बलात्कार पीड़िताओं के बयान दर्ज कराने के लिए प्रदेश के सभी थानों में महिला अधिकारी प्रतिनियुक्त हैं या नहीं. अगर महिला अफसरों की प्रतिनियुक्ति है तो उन महिला अफसरों ने बलात्कार के कितने मामलों में स्त्रियों का बयान दर्ज किया.

सुप्रीम न्यायालय ने प्रदेश में बलात्कार या यौनाचार से जुड़े मामलों में लागू कानून, त्वरित अनुसंधान, सजा दिलाने, मेडिको फॉरेंसिक एजेंसियों की कार्यशैली, कानूनी सलाह, ट्रॉयल, पुनर्वास और राहत के विषयों पर पूरी जानकारी मांगी है. उच्चतम न्यायालय के स्टैंडिंग काउंसिल तापेश कुमार सिंह ने प्रदेश के मुख्य सचिव डीके तिवारी को इस विषय में लेटर भेजा है. मुख्य सचिव ने सात दिनों के भीतर प्रदेश सरकार के गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, स्वास्थ्य, महिला और बाल विकास विभाग, अभियोजन निदेशालय से संबंधित पहलुओं पर रिपोर्ट मांगी है.

दुष्कर्म पीड़िता के बयान की करानी होगी वीडियोग्राफी
उच्चतम न्यायालय ने 18 दिसंबर को आदेश जारी किया था, जिसमें बोला गया था कि पुलिस के लोग बलात्कार पीड़िताओं के बयान की वीडियोग्राफी कराएं. उच्चतम न्यायालय ने अब प्रदेश पुलिस से पूछा है कि क्या प्रदेश में बलात्कार पीड़िताओं के बयान की वीडियोग्राफी का सरकुलर जारी हुआ है या इस विषय में पुलिस की तरफ से कोई प्रावधान किए गए हैं. बलात्कार के कांडों में कई बार पीड़िताओं को मानसिक और शारीरिक विकलांगता झेलनी पड़ती है. ऐसे में पीड़िताओं के बयान दर्ज कराने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस को स्पेशल एडुकेटर या इंटरप्रेटर रखना है, जो महिला की बातों को समझ उसे पुलिस अनुसंधानक को ठीक ढंग से बता सके.

जीरो एफआईआर जरूरी, कहीं भी दर्ज कराया जा सकता है महिला का बयान
बलात्कार की शिकार महिला का बयान किसी भी स्थान पर दर्ज कराया जा सकता है. उच्चतम न्यायालय ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि ऐसे कितने मुद्दे दर्ज हुए हैं, जहां घटनास्थल संबंधित थाने में नहीं था, बावजूद इसके पुलिस ने बगैर केस नंबर के एफआईआर दर्ज कर मुद्दे में कार्रवाई की. वहीं, बलात्कार पीड़िता थाने के अलावे अपनी पसंद की स्थान या आवास पर भी पुलिस के समक्ष बयान दर्ज करा सकती है. स्थायी या अस्थायी तौर पर शारीरिक-मानसिक विकलांगता की स्थिति में पीड़िता पुलिस को अपनी पसंद की स्थान पर बयान दर्ज करने के लिए बुला सकती है.